बचपन में पतंग उड़ाने के शौकीन थे इरफान, छत से गिरे और तोड़ ली अपनी कलाई

एक्टर इरफान खान अपनी लाइफ को काफी बोरिंग बताते थे. वे कहते थे कि बचपन में तो उनके पास कुछ चीजें थी जिनकी मदद से वे अपनी बोरियत को दूर कर लिया करते थे. इसमें पतंग उड़ाना और क्रिकेट खेलना भी शामिल था.

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इरफान खान इरफान खान

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2020,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

एक्टर इरफान खान के दुखद निधन के बाद से दुनियाभर में शोक की लहर है. मुंबई में 54 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. इरफान खान जो स्क्रीन के सामने खामोश भी हो जाए तो लोग जान जाते थे कि क्या कहना चाह रहे हैं. पर्फेक्ट एक्टिंग बिना किसी एफर्ट के करने वाला एक्टर. जो धीरे-धीरे फिल्म दर फिल्म अभिनय के जगत में अपने कद को बढ़ाता जा रहा था. छोटे पर्दे से आर्ट फिल्में इसके बाद बॉलीवुड और फिर हॉलीवुड. एक्टर इरफान खान ने अपने अभिनय से दुनियाभर के लोगों को अपना मुरीद बना दिया.

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एक्टर अपने आप को काफी बोरिंग इंसान कहकर बुलाते थे. वे कहते थे कि वे शर्मीले थे और किसी से ज्यादा मेल-जोल नहीं करते थे. बचपन में तो उनके पास कुछ चीजें थी जिनकी मदद से वे अपनी बोरियत को दूर कर लिया करते थे. इन्हीं में से एक चीज थी पतंग उड़ाने के प्रति उनका प्रेम. इसके अलावा उन्हें क्रिकेट खेलना भी पसंद था. एक्टर ने एक दफा इंटरव्यू के दौरान वो किस्सा बताया था जब पतंग का मांझा पकड़ने के चक्कर में वे छत पर से गिर गए थे.

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एक्टर ने कहा- मैं 7 साल का था. यूं तो हमलोग जमींदार परिवार से थे मगर इसके बाद भी हम किराय के मकान में रहा करते थे. मकान की छत पर प्रोटेक्शन ज्यादा नहीं था और बस 2 फिट की एक दीवार थी. पेड़ पर पतंग का मांझा लटका हुआ था और मैं उस मांझे को पकड़ने के चक्कर में छत से नीचे गिर गया. मेरी कलाई टूट गई और एल्बो में भी चोटें आईं. इसके बाद मुझे पूरी तरह से ठीक होने में 2 साल का वक्त लगा. कलाई से मेरा हाथ ढीला हो गया था. मेरे पापा शिकारी थे और अधिकतर समय बाहर रहते थे. मुझे हकीम के पास दिखाने के लिए ले जाया करता था. मैं सपने में सोचता था कि कब मैं हकीम के पास जाऊंगा वो झट से मेरा हाथ झटकेगा और ये हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा. हालांकि वक्त के साथ उनका हाथ ठीक हो गया.

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थियेटर ने बदला जीवन

एक्टर को क्रिकेट का भी बहुत शौक था. वे पतंग उड़ाने के अलावा खूब क्रिकेट खेलते थे. मगर जैसे-जैसे वे बड़े हुए ये सारी चीजें छूटती गईं. एक्टर अपने आप में ही सिकुड़ते चले गए. इस समय उन्हें थियेटर का साथ मिला. इरफान कहते थे कि मैं जैसा हूं वैसा लोग मुझे समझ नहीं पाते थे. क्योंकि मैं ज्यादा बोलचाल करने वाला शख्स नहीं था. मगर थियेटर ने मुझे कॉम्युनिकेट करने का मौका दिया और मेरे जीवन को बदलने में इसका बहुत बड़ा हाथ है.

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