आनंद में राजेश खन्ना नहीं किशोर कुमार होते हीरो, गार्ड की गलती से गया रोल

आनंद बेशक ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म थी लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि राजेश खन्ना को फिल्म में साइन करने से पहले मेकर्स के दिमाग में किशोर कुमार का नाम था. उन दिनों किशोर कुमार ने एक बंगाली प्रोड्यूसर के साथ शो किया जो पैसे देने से आनाकानी कर रहा था.

Advertisement
राजेश खन्ना राजेश खन्ना

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

आनंद हिंदी सिनेमा में बनी उन फिल्मों में शुमार है जो दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गईं. फिल्म की ऑनस्क्रीन कहानी जितनी दमदार है उतनी ही दमदार हैं इस फिल्म से जुड़ी ऑफस्क्रीन कहानियां. राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का अब तक का सबसे बड़ा सुपरस्टार माना जाता है. साथ ही ये भी कहा जाता है कि उनसे उनका स्टारडम उन्हीं की फिल्म में सेकंड लीड रोल करने वाले अमिताभ बच्चन ने छीन लिया था. आनंद को बिग बी की पहली क्लीन हिट माना जाता है.

Advertisement

आनंद बेशक ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म थी लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि राजेश खन्ना को फिल्म में साइन करने से पहले मेकर्स के दिमाग में किशोर कुमार का नाम था. उन दिनों किशोर कुमार ने एक बंगाली प्रोड्यूसर के साथ शो किया जो पैसे देने से आनाकानी कर रहा था. इसी बात पर उस बंगाली प्रोड्यूसर से किशोर का झगड़ा हो गया था. गुस्से में घर लौटे किशोर ने अपने सिक्योरिटी गार्ड से कहा कि अगर कोई बंगाली प्रोड्यूसर मुझसे मिलने आए तो उसे भगा देना.

इसके कुछ ही वक्त बात ऋषिकेश मुखर्जी आनंद के बारे में डिसकस करने आ गए. गार्ड ने उन्हें ही वो बंगाली प्रोड्यूसर समझ कर वहां से खदेड़ दिया. इस बात से ऋषिकेश बहुत नाराज हुए और उन्होंने किशोर कुमार को फिल्म में साइन करने का इरादा भी छोड़ दिया. किशोर कुमार को जब ये बात पता चली तो उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्होंने उस गार्ड को भी नौकरी से निकाल दिया. इसके बाद ऋषिकेष ने आनंद के लिए राजेश खन्ना को फाइनल किया और उसके आगे जो कुछ हुआ वो इतिहास है.

Advertisement

मेगास्टार थे राजेश खन्ना

राजेश खन्ना ने साल 1969 से लेकर 1971 तक लगातार 17 ब्लॉकबस्टर हिट फिल्में देने का रिकॉर्ड बनाया था. फिल्म आनंद भी इसी का हिस्सा थी. राजेश खन्ना को सही मायने में सुपरस्टार गलत नहीं होगा क्योंकि वो उस दौर के मेगास्टार थे जब पॉपुलैरिटी के लिए सोशल मीडिया और स्मार्टफोन जैसी चीजें नहीं थीं. लोगों में जो दीवानापन होता था वो बस ढाई तीन घंटे की फिल्म देखकर ही होता था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement