पंजाबी फिल्मों और गानों की खपत से दूर रहने वाली जनता भी दिलजीत दोसांझ को जरूर पहचानती है. दिलजीत बिना शक इस समय पंजाबी फिल्म वर्ल्ड के सबसे पॉपुलर चेहरों में से एक हैं. उनकी लेटेस्ट पंजाबी फिल्म 'जोड़ी' ने इस रेपुटेशन को बरकरार रखा है और 2023 की दूसरी सबसे बड़ी पंजाबी हिट बन चुकी है.
दिलजीत दोसंज और निमरत खैरा स्टारर 'जोड़ी' 5 मई को थिएटर्स में रिलीज हुई थी. 15 दिन में फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 36 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है. रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया जा रहा है कि 'जोड़ी' इस साल की सबसे बड़ी पंजाबी फिल्म 'कली जोट्टा' से भी आगे निकल सकती है. सतिंदर सरताज, नीरू बाजवा और वामिका गब्बी स्टारर 'कली जोट्टा' फरवरी में रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 40 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई की थी. 'जोड़ी' और 'कली जोट्टा' पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के लिए साल के पहले 5 महीनों में दो बड़ी ब्लॉकबस्टर बनकर आई हैं. लेकिन अगर ओवरऑल पंजाबी इंडस्ट्री का हाल देखें तो लॉकडाउन के बाद से जूझ रही इंडस्ट्री को इस समय कुछ बड़ी फिल्मों की सख्त जरूरत है.
हाल ही में, रिलीज के लिए तैयार 3 पंजाबी फिल्मों की झलक जनता में काफी चर्चा बटोर रही है. इनके नाम हैं- मेडल, मौढ़ और मस्ताने. तीनों फिल्मों का टीजर-ट्रेलर और प्रमोशनल कंटेंट इशारा कर रहा है कि पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री भी भी अपना स्केल बढ़ा रही है.और अगर सब ठीक रहा तो ये फिल्में इस साल इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती हैं. पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री आज जहां है, उसके पीछे पचासों साल का बहुत कड़ा स्ट्रगल रहा है.
लॉकडाउन से पहले के सालों में ये इंडस्ट्री, इंडिया की टॉप फिल्म इंडस्ट्रीज में जगह बनाने के बहुत करीब आ गई थी. मगर फिर से इसकी रफ्तार में एक ब्रेक लग गया. आइए बताते हैं पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के स्ट्रगल की कहानी और उन 3 फिल्मों के बारे में जिनसे अब इंडस्ट्री को बहुत उम्मीदें हैं.
आजादी के बाद से स्ट्रगल कर रही इंडस्ट्री
पंजाबी फिल्मों का इतिहास आज के बॉलीवुड से भी शानदार रहा है. 1920 के दशक में इंडिया में अपनी पैठ बनाने के लिए स्ट्रगल करते सिनेमा के 3 बड़े गढ़ थे- कलकत्ता (अब कोलकाता), बंबई (अब मुंबई) और लाहौर, जो आज पाकिस्तान में है. 1947 में आजादी के साथ आए बंटवारे में पंजाब के भी दो हिस्से हो गए. इस बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से चले गए पंजाब से आने वाले कई बड़े एक्टर-फिल्ममेकर्स मुंबई आ गए और उस इंडस्ट्री की नींव रखी जिसे आज हम बॉलीवुड कहते हैं. इन लोगों में पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार से लेकर प्राण और बलराज साहनी जैसे लेजेंड्स के नाम शामिल हैं.
आजादी के बाद से ही पंजाबी सिनेमा लगातार अपनी एक अलग पहचान के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन 1960 के दशक में पंजाबी सिनेमा ने अपने पैर जमाने शुरू किए. 1964 में बलराज साहनी स्टारर 'सतलुज दे कंडे' रिलीज हुई, जिसे नेशनल अवार्ड मिला. 1969 में पृथ्वीराज कपूर स्टारर 'नानक नाम जहाज है' रिलीज हुई और ये दोनों फिल्में आजादी के बाद के भारत में सबसे कामयाब पंजाबी फिल्में बनीं.
80s में बढ़ी पॉपुलैरिटी
70-80 के दौर में कई बड़े हिंदी फिल्म एक्टर्स ने पंजाबी फिल्मों में दिलचस्पी दिखाई. पंजाब से आने वाले धर्मेंद्र ने 'कनकां दे ओहले' 'तेरी मेरी इक जिंदड़ी' जैसी कई हिट पंजाबी फिल्मों में काम किया. 'सत श्री अकाल' (1975) में सुनील दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा नजर आए, तो 'तिल तिल दा लेखा' (1979) में राजेश खन्ना ने काम किया. इस फिल्म को पंजाब सरकार से अवार्ड्स भी मिले. 80s में राज बब्बर और गुरदास मान पंजाबी सिनेमा के बड़े स्टार बने. 'ऊंचा दर बाबे नानक दा' ने मान साहब को स्टार बनाया तो 'लौंग दा लश्कारा' राज बब्बर की कल्ट क्लासिक फिल्म बन गई.
फ्लॉप फिल्मों के दौर के बाद, नई सदी का नया धमाका
90s में पंजाबी सिनेमा ने अपना वजूद बनाए रखने के लिए काफी स्ट्रगल किया और बहुत कम ही फिल्मों को वैसी कामयाबी मिली, जो एक इंडस्ट्री के तौर पर फंक्शन करने की हिम्मत दे सके. 1994 में गुरदास मान, योगराज सिंह की 'कचहरी' को नेशनल अवार्ड और बॉक्स ऑफिस सक्सेस दोनों मिली. लेकिन 1996 तक पंजाबी फिल्मों की कमाई चिंताजनक हो गई. इस दौर में नेशनल अवार्ड जीतने वाली 'मैं मां पंजाब दी' जैसी फिल्में तो आती रहीं, मगर पंजाबी इंडस्ट्री को आगे बढ़ने के लिए जरूरी बॉक्स ऑफिस कामयाबी नहीं मिल पा रही थी. 1999 में गुरदास मान और दिव्या दत्ता की 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' और राज बब्बर की 'शहीद उधम सिंह' ने अच्छी कमाई कर के इंडस्ट्री को थोड़ी राहत दी. मान साहब की फिल्म को एक बार फिर नेशनल अवार्ड मिला.
पंजाबी सिनेमा के लिए नई सदी में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी फिल्म 'जी आया नूं' (2002). हरभजन मान और प्रिया कौर की ये फिल्म अपने समय में पंजाबी इंडस्ट्री की सबसे बड़े बजट की फिल्म थी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि लगभग 2 करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने करीब 4.5 करोड़ से ज्यादा कलेक्शन किया था. इस फिल्म ने पंजाबी इंडस्ट्री को वो बड़ा मोमेंटम दिया, जहां से आज की इंडस्ट्री को शेप मिली.
आने वाले सालों में जहां गुरदास मान, हरभजन मान 'देस होया परदेस' और 'असा नूं मान वतनां दा' जैसी फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी बटोरते रहे. वहीं, जिम्मी शेरगिल की 'यारां नाल बहारां' 'तेरा मेरा कि रिश्ता' और 'मुंडे यूके दे' सबसे बड़ी पंजाबी हिट्स में शामिल हुईं.
नया दौर, नए तौर
पंजाबी फिल्मों में परदेस जाना, वतनपरस्ती, सिख गुरुओं की भक्ति और पंजाबियत पर गर्व की थीम बहुत ज्यादा इस्तेमाल हुई है. 2010 के करीब पंजाबी फिल्ममेकर्स ने अपनी कहानियों का दायरा बढ़ाया और रोमांस-एक्शन, कॉमेडी जैसे मसालों को थोड़ा खुलकर अपनाना शुरू किया. फिल्मों का बिजनेस भी बढ़ा और नए स्टार्स के आने से एक नई एनर्जी भी आई.
इसी दौर में पंजाबी फिल्ममेकर्स ने क्रिएटिविटी भी बढ़ाई और नई कहानियां पर्दे पर आईं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2010 में 16 पंजाबी फिल्में रिलीज हुईं और जिम्मी शेरगिल की 'मेल करादे रब्बा' इंडस्ट्री की सबसे बड़ी हिट बनी. फिल्म ने 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया.
इसी दौर में दिलजीत दोसांझ की 'द लायन ऑफ पंजाब' और 'जिने मेरा दिल लुटेया' जैसी फिल्मे बड़ी कामयाब रहीं. गिप्पी ग्रेवाल के साथ दिलजीत की 'जिने मेरा दिल लुटेया' तो 12 करोड़ से ज्यादा की कमाई के साथ, उस समय सबसे बड़ी पंजाबी फिल्म बनी. 2011 में गिप्पी ग्रेवाल और यो यो हनी सिंह की 'मिर्जा' सबसे महंगी पंजाबी फिल्म बनकर आई और इसने 9 करोड़ के बजट में 24 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया.
पंजाबी इंडस्ट्री की टॉप फिल्में
2014 में आई बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि उस साल तक पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री साल में 400-500 करोड़ तक का बिजनेस करने लगी थी. इस दौर में बॉलीवुड, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम के बाद अगली बड़ी इंडस्ट्री बनने की रेस में पंजाबी इंडस्ट्री सबसे आगे आई. अगले कुछ सालों में पंजाबी इंडस्ट्री का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड बंगाली और मराठी फिल्मों से कहीं बेहतर होने लगा. आज हाल ये है कि पंजाबी की टॉप 10 कमाऊ फिल्में 2014 या उसके बाद आई हैं. ये लिस्ट कुछ इस तरह है:
1. कैरी ऑन जट्टा 2 (2018)- 57.6 करोड़ रुपये
2. सौंकन सौंकने (2022)- 57.6 करोड़ रुपये
3. चल मेरा पुत्त 2 (2020)- 57.1 करोड़ रुपये
4. हौंसला रख (2021)- 54.6 करोड़ रुपये
5. शदा (2019)- 53.1 करोड़ रुपये
6. चार साहिबजादे (2014)- 46.3 करोड़ रुपये
7. छल्ला मुड़ के नहीं आया (2022)- 39.3 करोड़ रुपये
8. सरदारजी (2015)- 38.3 करोड़ रुपये
9. चल मेरा पुत्त 3 (2021)- 36 करोड़ रुपये
10. किस्मत 2 (2021)- 38 करोड़ रुपये
*2023 में आई 'कली जोट्टा' इस लिस्ट के हिसाब से 11वें नंबर पर आती है. इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 37 करोड़ से ज्यादा रहा. अब चांस है कि दिलजीत दोसांझ की 'जोड़ी' भी इसमें जगह बना सकती है, जो अबतक 15 दिन में 36 करोड़ से ज्यादा वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर चुकी है.
लॉकडाउन का असर
रिपोर्ट्स बताती हैं कि लॉकडाउन से पहले पंजाबी फिल्में सालाना 400 करोड़ तक का बिजनेस आराम से कर रही थीं और साल भर में लेकिन कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन ने तेजी से बढ़ रही पंजाबी इंडस्ट्री की स्पीड पर ब्रेक लगा दी. सबसे कमाऊ पंजाबी फिल्मों की लिस्ट देखने पर पता चलता है कि लॉकडाउन के बाद के सालों (2021 और आगे) में आईं 5 फिल्में इस लिस्ट का हिस्सा हैं. लेकिन जहां पहले साल में 3-4 फिल्में बड़ी हिट हो रही थीं, वहीं लॉकडाउन के बाद ये आंकड़ा घट गया है.
सैकनिल्क की रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के बाद वाले सालों 2021 और 2022 में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का कुल बिजनेस 200 करोड़ भी नहीं पहुंच पा रहा. जहां 2021 में बड़ी पंजाबी फिल्मों का टोटल बिजनेस 190 करोड़ के अंदर सिमट गया, वहीं 2022 में तो बिजनेस 120 करोड़ ही पहुंच सका.
2023 अभी तक पंजाबी इंडस्ट्री के लिए एक नई उम्मीद लेकर आ रहा है. साल के पहले 5 महीनों में जहां 'जोड़ी' और 'कली जोट्टा' जैसी दो बड़ी ब्लॉकबस्टर आ चुकी हैं, वहीं इंडस्ट्री का टोटल वर्ल्डवाइड बिजनेस 90 करोड़ के करीब पहुंच रहा है. इस बीच हाल ही में सामने आईं तीन नई पंजाबी फिल्मों की झलक देखने के बाद सिर्फ जनता में ही नहीं, इंडस्ट्री में भी बहुत एक्साइटमेंट है.
'पंजाबी KGF'
पंजाबी सिंगर-एक्टर जय रंधावा की अगली फिल्म 'मेडल' का ट्रेलर कुछ दिन पहले ही आया है. यूट्यूब पर इस ट्रेलर पर कमेन्ट करते हुए कई यूजर्स ने इसे 'पंजाब की KGF' भी कहा. लेकिन ऐसा लिखने की वजह ये नहीं है कि जय की फिल्म किसी भी तरह ऑरिजिनल KGF फिल्म की नक़ल कर रही है. 'मेडल' में एक एथलीट की कहानी है, जो अपनी शानदार परफॉरमेंस के बावजूद, स्पोर्ट्स की पॉलिटिक्स में फंस जाता है. कहानी ऐसे पलटती है कि वो रेस ट्रैक से जेल में पहुंच जाता है.
'मेडल' के ट्रेलर में असली धमाका तब फील होता है जब जेल से निकला लीड किरदार बदला पूरा करने और सम्मान पाने के लिए अपराध का रास्ता पकड़ लेता है. आधे से ज्यादा ट्रेलर में जिस तरह का एक्शन और इफेक्ट्स नजर आ रहे हैं. वो किसी भी अच्छी बॉलीवुड फिल्म को टक्कर दे सकते हैं. फिल्म बड़े स्केल और बजट के साथ बनाई हुई नजर आ रही है और इसमें भरपूर स्वैग दिख रहा है. ऊपर से फिल्म के डायलॉग्स बहुत पावरफुल हैं. 13 दिन में 'मेडल' को यूट्यूब पर 7 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. ये फिल्म 2 जून को थिएटर्स में रिलीज होगी. लोगों को 'मेडल' में क्या इम्प्रेस कर रहा है, आपको ये ट्रेलर देखकर समझ आ जाएगा:
दो पीरियड फिल्में
पंजाब का इतिहास वीरता की गाथाओं से भरा रहा है. इन कहानियों को आज की सिनेमेटिक तकनीक के साथ अगर अच्छे से स्क्रीन पर पेश किया जाए तो भला किसे पसंद नहीं आएगा. पाकिस्तान में बनी पंजाबी फिल्म 'द लेजेंड ऑफ मौला जट्ट' ने पिछले साल धमाकेदार कमाई की थी. वर्ल्डवाइड 400 करोड़ कमाने के बहुत करीब पहुंची ये फिल्म पाकिस्तान की सबसे बड़ी फिल्म है. इंडियन पंजाबी इंडस्ट्री भी अब महंगे बजट में बनने वाले पीरियड ड्रामा के लिए तैयार नजर आ रही है. इसका सबूत हैं 'मौढ़' और 'मस्ताने'.
जियोना जट्ट, पंजाबी लोककथाओं और गीतों के एक बेहद पॉपुलर किरदार का नाम है. बताया जाता है कि ये एक डाकू का नाम था जो अपने लूटे हुए माल से ग़रीबों का भला करता था. यानी उसे डाकू नहीं बागी का दर्जा दिया जाता है. कहानियां बताती हैं कि उसने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की आवाज उठाई थी. इसी जियोना जट्ट की कहानी पर बेस्ड है पंजाबी फिल्म 'मौढ़'.
एमी विर्क और देव खरौड स्टारर 'मौढ़' का टीजर आपके रोंगटे खड़े कर सकता है. ब्रिटिश राज वाले पंजाब की कहानी दिखाती इस फिल्म का टीजर, बैकग्राउंड स्कोर और प्रोडक्शन वैल्यू बहुत मजबूत नजर आ रहे हैं. टेक्निकली मजबूत और इमोशनली अपीलिंग नजर आ रही 'मौढ़' पंजाबी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी फिल्म हो सकती है. इसके स्टार एमी विर्क की दो फिल्में पंजाबी की टॉप 10 हिट्स में शामिल हैं और उनकी फॉलोइंग बहुत तगड़ी है. ऊपर से पंजाबी कल्चर में रची-बसी एक कहानी पर बनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कमाई करने का पूरा माद्दा रखती है. 'मौढ़' 9 जून को रिलीज हो रही है. देखिए टीजर:
पंजाबी इंडस्ट्री की जो फिल्म हाल ही में सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रही है, वो है 'मस्ताने'. इस फिल्म का फर्स्ट लुक चंद रोज पहले ही सामने आया है. ये एक झलक इतना बताने के लिए काफी है कि इस फिल्म को मेकर्स ने कितनी केयर के साथ बनाया है. तरसीम जस्सड़, गुरप्रीत घुग्गी, करमजीत अनमोल जैसे स्टार्स को लेकर आ रही इस कहानी से लोगों को एक शानदार पीरियड ड्रामा की बहुत उम्मीदें हैं.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 'मस्ताने' 18वीं सदी की कहानी है, जब नादिर शाह के जुल्म अपने चरम पर थे. लेकिन उसकी मजबूत सेना पर हमले करके सिख बागियों नाक में दम कर दिया था. नादिर शाह उनतक न पहुंच सके इसलिए पांच साधारण आदमियों को सिख बागियों का नाटक करने के लिए कहा जाता है. मगर इन पांचों को धीरे-धीरे समझ आने लगता है कि सिख योद्धा होने का मतलब और मकसद क्या होता है. ये प्लॉट अपने आप में बहुत दिलचस्प है. ऊपर से 'मस्ताने' टेक्निकली और स्केल के मामले में एक दमदार फिल्म लग रही है. इसे पहले 9 जून को रिलीज होना था, मगर अब इसकी रिलीज डेट थोड़ी आगे शिफ्ट हो सकती है. देखिए 'मस्ताने' का फर्स्ट लुक:
पंजाबी सिनेमा दशकों से जिस स्केल के लिए स्ट्रगल कर रहा है, वो लॉकडाउन से पहले मिलता नजर आने लगा था. लेकिन ऐसा नहीं है इस रफ़्तार पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है. बल्कि 'मेडल' 'मौढ़' और 'मस्ताने' को देखकर ऐसा लग रहा है कि 2023 पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ा साल होने वाला है.
सुबोध मिश्रा