'40 से 80 सिगरेट पीते थे विनोद खन्ना', आखिरी वक्त में कैसी थी हालत? पत्नी ने बताया

विनोद खन्ना के निधन ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था. ब्लैडर कैंसर के चलते उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. अब एक्टर की दूसरी पत्नी ने उनके आखिरी दिनों के बारे में कुछ खुलासे किए हैं.

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 जब कैंसर से जंग लड़ रहे थे विनोद खन्ना (Photo: Social Media) जब कैंसर से जंग लड़ रहे थे विनोद खन्ना (Photo: Social Media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

विनोद खन्ना बॉलीवुड इंडस्ट्री के दिग्गज दिवंगत एक्टर्स में से एक हैं. हिंदी सिनेमा में उनका शानदार योगदान रहा है. मगर अफसोस साल 2017 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था. विनोद खन्ना के निधन के सालों बाद अब उनकी दूसरी कविता खन्ना ने एक्टर की बीमारी से जुड़े कुछ बड़े खुलासे किए हैं. उन्होंने ये भी बताया कि आखिरी वक्त में एक्टर किस हाल में थे. 

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जब विनोद खन्ना को हुआ था कैंसर

दरअसल, विनोद खन्ना का 70 की उम्र में ब्लैडर कैंसर की वजह से निधन हुआ था. मगर अब कविना खन्ना ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर करके बताया कि विनोद खन्ना को ब्लैडर कैंसर से पहले साल 2001 में फेफड़ों को कैंसर हुआ था. हालांकि, उन्होंने इस बीमारी को सीक्रेट ही रखा था. 

विनोद खन्ना की इस बीमारी के बारे में बात करते हुए कविता ने कहा- साल 2001 की बात है जब विनोद को फेफड़ों के कैंसर का पता चला था. वो अपने एनुअल चेकअप के लिए गए थे. तब डॉक्टरों को उनके फेफड़ों में कुछ धब्बे दिखे थे. वो दिन में 40 से 80 सिगरेट पीते थे. यही उनके इस कैंसर का मुख्य कारण था. 

'हम मुंबई के लीडिंग MRI स्पेशलिस्ट के पास गए थे और उन सभी ने ये कंफर्म किया था कि उन्हें फेफड़ों का कैंसर ही है. डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि उनके आधे फेफड़ों को सर्जरी करके निकालना पड़ेगा.' 

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कविता ने बताया कि उन दोनों ने विनोद खन्ना की इस बीमारी को सीक्रेट रखने का फैसला किया था. एक्टर ने डॉक्टरों से बात करने से पहले आध्यात्मिक सलाह लेना जरूरी समझा था. कविता ने ये भी कहा कि उस वक्त एक्टर अपने आध्यात्मिक गुरु, श्री श्री रवि शंकर (प्यार से गुरुदेव कहते थे) के पास गए थे. उनकी सलाह पर, उन्होंने दिल्ली के AIIMS में सीनियर ऑन्कोलॉजी (कैंसर विभाग) से सलाह ली कि क्या उनकी सर्जरी को टाला जा सकता है. डॉक्टर्स की मंजूरी मिलने के बाद विनोद ने ऋषिकेश के आश्रम में कुछ समय बिताया था. 

कपल फिर जर्मनी चला गया था. कविता ने बताया कि यहां उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसपर यकीन करना भी मुश्किल था. उन्होंने कहा-बाद में जब हम जर्मनी गए तो एक शाम, विनोद को कंधे के पास बहुत तेज दर्द हुआ. वो दो दिन तक दर्द में तड़पते रहे थे. फिर गुरुदेव उनका हाल देखने आए और एक्स-रे कराने की सलाह दी. रिपोर्ट में कोई टूटी हुई हड्डी नहीं निकली, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि रिपोर्ट में कैंसर का कोई नामोनिशान नहीं था. इसपर यकीन करना मुश्किल था. कविता ने ये भी बताया कि विदेश के डॉक्टरों को भी इन रिपोर्टों पर यकीन नहीं हो रहा था. लेकिन उन्होंने बाद में ये कंफर्म कर दिया था कि कैंसर दोबारा से नहीं हुआ. 

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जब डॉक्टर्स ने तोड़ दी थीं उम्मीदें

कविता ने बताया- इसके लगभग एक दशक बाद साल 2010 में विनोद खन्ना को ब्लैडर कैंसर हो गया था. उस समय स्थिति बहुत गंभीर थी.डॉक्टरों का कहना था कि अगर वो एलोपैथी का सही से इलाज करवाते हैं, तो भी दो साल बाद उनके जिंदा रहने की संभावना केवल 25% थी. मगर इस सिचुएशन में विनोद ने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने तब गुरुदेव को फोन किया और कहा, 'मैंने खुलकर जिंदगी को जिया है और अगर मेरे जाने का समय आ गया है, तो मैं तैयार हूं, लेकिन मैं अपनी बॉडी को टॉर्चर नहीं करना चाहता. उन्होंने आश्रम में 'पंचकर्म थेरेपी' ली और दो साल के अंदर स्कैन में पता चला कि कैंसर गायब हो गया था. हमने अमेरिका में स्कैन करवाए थे और रिपोर्ट्स में कैंसर नहीं आया था. 

कविता ने बताया कि विनोद को शराब छोड़ने की सलाह दी गई थी. पहले वो हर रोज शाम में एक या दो गिलास शराब पीते थे. फिर धीरे-धीरे अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी थी. कविता ने कहा- उनकी हालत जब गिरनी शुरू हुई तो उससे पहले तक वो ठीक थे. मगर फिर आखिर में उनका निधन ब्लैडर कैंसर के कारण ही हुआ. 

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