Republic Day 2026: रिपब्लिक डे पर संजय लीला भंसाली ने पेश की 'भारत गाथा', कर्तव्य पथ पर दिखी बॉक्स ऑफिस की झलक

गणतंत्र दिवस के मौके पर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने भारतीय सिनेमा का जश्न मनाते हुए एक खास झांकी कर्तव्य पथ की परेड में पेश की. यह झांकी उनके फिल्मों की पहचान बन चुकी सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक भव्यता की एक झलक थी.

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कर्तव्य पथ पर बॉलीवुड की झांकी (Photo: X/@DDNewslive) कर्तव्य पथ पर बॉलीवुड की झांकी (Photo: X/@DDNewslive)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

77वें गणतंत्र दिवस परेड में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के साथ मिलकर 'भारत गाथा' थीम पर एक खास झांकी (tableau) पेश की. यह भारतीय सिनेमा के लिए राष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा और सबसे ऐतिहासिक पल रहा. वहीं झांकी के साथ ही श्रेया घोषाल की आवाज ने समां बांधने का काम किया.

26 जनवरी को जब यह झांकी कर्तव्य पथ से गुजरी तो इसने इतिहास रच दिया. यह पहली बार था जब किसी भारतीय फिल्म डायरेक्टर ने देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व किया. इस झांकी के जरिए सिनेमा को भारत की कहानी कहने की परंपरा का अहम हिस्सा बताया गया. जो हमारी सदियों पुरानी कहानियों को पूरी दुनिया तक पहुंचाने की ताकत रखता है.

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भारत गाथा झांकी में क्या दिखाया गया?
'भारत गाथा' के तहत बनाई गई इस झांकी में सिनेमा को सिर्फ कला या मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की पुरानी कहानी कहने की परंपरा का एक ताकतवर हिस्सा दिखाया गया है. ये परंपरा लोककथाओं और महाकाव्यों से शुरू होकर थिएटर, संगीत और आखिरकार सिनेमा की वैश्विक भाषा तक पहुंची है. भारत गाथा में सिनेमा को ऐसा माध्यम दिखाया गया है जो भारत की कहानियों, सोच और भावनाओं को पीढ़ियों और जगह-जगह तक पहुंचाता है.

संजय लीला भंसाली ने क्या कहा?
वहीं इस ऐतिहासिक अवसर पर डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने कहा, 'भारत गाथा थीम के तहत गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा और क्रिएटर कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ मिलकर इस झांकी को तैयार करना भारत की पुरानी कहानियों और उन्हें सिनेमा के जरिए दोबारा कहने की ताकत को सलाम है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को भी दिखाता है, जिसमें भारतीय कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने और सिनेमा को भारत की सबसे मजबूत सांस्कृतिक आवाज के रूप में पेश करने की बात है.' 

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वहीं संजय लीला भंसाली आज के दौर के उन चुनिंदा फिल्ममेकर्स में गिना जाता है जो राज कपूर, वी.शांताराम और महबूब खान जैसे दिग्गजों की विरासत को आगे बढ़ाते हैं. आज के सिनेमा में भंसाली ऐसे कहानीकार हैं, जिनकी फिल्मों में भव्यता भी होती है, जड़ों से जुड़ाव भी और गहरी सांस्कृतिक पहचान भी. 

भारत गाथा के जरिए गणतंत्र दिवस परेड ने फिर से दिखा दिया कि सिनेमा भारत की कहानी कहने की परंपरा में कितना अहम है. यह आधुनिक माध्यम भारत की सदियों पुरानी कहानियों की आत्मा को पूरी दुनिया तक पहुंचाता है.

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