'धुरंधर' से Border 2 तक... क्यों बॉलीवुड का फेवरेट है 1971 का भारत-PAK वॉर?

‘धुरंधर’ और ‘इक्कीस’ के बाद अब ‘बॉर्डर 2’ फिर से 1971 के भारत-पाक युद्ध को बड़े पर्दे पर ला रही है. ऑपरेशन चंगेज खान, तीनों सेनाओं का एक्शन और सनी देओल का भौकाल— सवाल बस यही है कि क्या ‘बॉर्डर 2’ 1997 वाला जादू फिर दोहरा पाएगी?

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बॉलीवुड का फेवरेट वॉर क्यों है 1971 का इंडिया-पाक युद्ध? (Photo: IMDB) बॉलीवुड का फेवरेट वॉर क्यों है 1971 का इंडिया-पाक युद्ध? (Photo: IMDB)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ शुक्रवार को रिलीज होने वाली है. इसके गानों को काफी पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है और ट्रेलर से भी माहौल बनने लगा है. फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बेस्ड है. ‘बॉर्डर 2’ के ट्रेलर में पाकिस्तान के ऑपरेशन चंगेज खान का जिक्र है, जिसे इस युद्ध की ऑफिशियल शुरुआत माना जाता है. और इस युद्ध की तरह ही भारत की तीनों सेनाएं भी एक्शन में नजर आती हैं.

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दिलचस्प ये है कि 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध पिछले करीब डेढ़ महीने में आईं दो बड़ी फिल्मों के प्लॉट का हिस्सा बन चुका है. भारत ने युद्ध और भी लड़े हैं, मगर 1971 का युद्ध फिल्मों का प्लॉट खूब बना है.

डेढ़ महीने में पर्दे पर तीसरी बार 1971 की याद
‘बॉर्डर 2’ हाल-फिलहाल आई पहली फिल्म नहीं होगी जिसमें 1971 का युद्ध प्लॉट का हिस्सा बना है. साल 2026 के पहले ही दिन ये युद्ध बड़े पर्दे पर आ चुका है. साल के पहले दिन रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘इक्कीस’ का प्लॉट भी इसी युद्ध पर बेस्ड था. इंडियन आर्मी के टैंक कमांडर सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में ही शहीद हुए थे.

इक्कीस की उम्र में शहीद हुए अरुण की बायोपिक थी ‘इक्कीस’. इससे भी पहले एक और इंडियन ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ में 1971 के युद्ध का जिक्र था. डायरेक्ट नहीं, लेकिन इनडायरेक्ट तरीके से ‘धुरंधर’ 1971 के युद्ध का रेफरेंस देती है. वैसे तो फिल्म का फोकस इंडिया के जासूस पर था, जो कराची (पाकिस्तान) की एक गैंग में घुसकर भारत के खिलाफ हो रही साजिशों की जानकारी जुटाता है.

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‘धुरंधर’ का बेसिक प्लॉट और नेगेटिव किरदार गैंगस्टरबाजी की देन थे. लेकिन ये गैंग जिस मेजर इकबाल के लिए हथियार जुटाते हैं, वो पाकिस्तान में एंटी-इंडिया ऑपरेशन्स का हेड था. अर्जुन रामपाल द्वारा निभाया गया मेजर इकबाल एक अहम सीन में बताता है कि 1971 के युद्ध के समय उसकी उम्र 6 साल थी. और उस युद्ध के बाद जिया-उल-हक को रेडियो पर सुनते हुए उसने भारत के लिए दुश्मनी मन में पाली थी.

‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी और ‘बॉर्डर 2’ 23 जनवरी 2026 को रिलीज होने जा रही है. यानी करीब डेढ़ महीने में तीसरी बार 1971 के भारत-पाक युद्ध का जिक्र इंडियन सिनेमा की स्क्रीन पर नजर आने वाला है.

क्यों फिल्मों का फेवरेट है 1971 का युद्ध?
भारत ने आजादी के बाद 5 युद्ध लड़े हैं, जिनमें से एक चीन के खिलाफ और 4 पाकिस्तान के खिलाफ. पाकिस्तान के खिलाफ चारों युद्धों में भारत का पलड़ा भारी रहा, मगर 1971 का युद्ध अभूतपूर्व शक्ति-प्रदर्शन का उदाहरण था. इस युद्ध में देश की राजनीतिक और सैन्य शक्ति ने एक कड़ा स्टैंड लिया था. अमेरिका जैसी महाशक्ति के दबाव को भी भारत ने ठुकरा दिया.

आर्मी ने हर मोर्चे पर डटकर लड़ाई लड़ी और अंत में पाकिस्तान ने 90 हजार सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया. एयरफोर्स ने मात्र 48 घंटों में पाकिस्तान की हवाई ताकत कमजोर कर दी थी. वहीं भारतीय नेवी ने समंदर में पाकिस्तान को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया.

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1971 के युद्ध में भारत, पाकिस्तान के मानवीय अत्याचारों से जनता को मुक्ति दिलाने वाली शक्ति बनकर उभरा. भारत ने न सिर्फ युद्ध जीता, बल्कि एशिया के नक्शे पर एक नया देश भी जोड़ा— बांग्लादेश. इस जीत ने भारत को एशिया की बड़ी सैन्य शक्तियों में खड़ा कर दिया. यही वजह है कि 1971 का युद्ध इंडियन प्राइड के लिए बेहद अहम है और फिल्मों के लिए एक पावरफुल प्लॉट बनता रहा है.

इन फिल्मों में हुआ है इस्तेमाल
1971 के युद्ध का बैकग्राउंड उसी दशक से फिल्मों में आने लगा था. ‘हिंदुस्तान की कसम’ (1973), ‘आक्रमण’ (1975) और ‘विजेता’ (1982) जैसी फिल्मों ने इस युद्ध को एंटरटेनमेंट के तौर पर पेश किया. लेकिन इनमें से ‘हिंदुस्तान की कसम’ ही ज्यादा पॉपुलर हो पाई.

कारगिल युद्ध से दो साल पहले आई ‘बॉर्डर’ (1997) में जे.पी. दत्ता ने जिस सिनेमैटिक स्केल पर 1971 के युद्ध को दिखाया, वो जनता के दिल में उतर गया. कारगिल के बाद इसके टीवी रन ने फिल्म को कल्ट बना दिया. मेजर कुलदीप के किरदार में सनी देओल का काम और उनके डायलॉग आज भी याद किए जाते हैं.

इसके बाद ‘1971’ (2007), ‘पिप्पा’ (2023) और ‘सैम बहादुर’ (2023) जैसी फिल्मों ने भी इस युद्ध को अलग-अलग नजरियों से दिखाया. कुछ बॉक्स ऑफिस पर चलीं, कुछ को क्रिटिक्स ने सराहा.

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अब 1971 की उसी ऐतिहासिक जीत का गर्व ‘बॉर्डर 2’ में उतर रहा है. सनी देओल का वही ‘बॉर्डर’ वाला भौकाल फिल्म में फिर से नजर आ रहा है. अब देखना है कि ‘बॉर्डर 2’ क्या कमाल करती है.

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