एक्ट्रेस अदिति गोवित्रीकर 2001 में मिसेज वर्ल्ड का खिताब जीतने वालीं पहली भारतीय महिला बनी थीं. हाल ही में उन्होंने अपने बचपन के दर्दनाक अनुभवों के बारे में खुलकर बात की. अदिति ने अपनी सिक्योरिटी, बचपन के ट्रॉमा और उन घटनाओं का उनकी जिंदगी पर पड़े असर के बारे में बताया. वो 6 साल की उम्र से ही बुरे व्यवहार झेल रही हैं.
पिता के दोस्त ने की गंदी हरकत
अदिति ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करने वाले अनुभव मुंबई में नहीं बल्कि पनवेल में हुए. 51 साल की अदिति ने हॉटरफ्लाई से बात करते हुए कहा- सच कहूं तो सेफ्टी के मामले में मुझे पनवेल में ज्यादा बुरे अनुभव हुए. वहां मेरे साथ कुछ गलत घटनाएं हुईं, जिन्हें समझने में ही मुझे बहुत साल लग गए.
उन्होंने बताया कि उस समय वो सिर्फ 6–7 साल की थीं और उन्होंने इस बारे में बडे़ होने के बाद ही किसी से बात की. अदिति ने बताया कि एक घटना में उनके पिता का दोस्त शामिल था, जबकि दूसरी बार एक अनजान आदमी ने उनके साथ बदतमीजी की.
अदिति ने कहा कि भले ही पनवेल को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता हो, लेकिन वो घटनाएं उनके दिल-दिमाग में हमेशा रहीं. बाद में जब वो पढ़ाई के लिए मुंबई आने लगीं, तब भी सेफ्टी उनके लिए बड़ी चिंता थी. वो बोलीं- 12वीं में मैं दादर के अग्रवाल क्लासेस जाती थी. उस वक्त लोकल ट्रेन मेरे लिए ऑप्शन नहीं थी, तो मैं बस से जाती थी. मैंने सब कुछ झेला है- पब्लिक ट्रांसपोर्ट आपको सर्वाइवल सिखा देता है.
अदिति ने कैसे किया खुद का बचाव?
अदिति ने बताया कि कम उम्र में ही उन्होंने खुद को बचाने के तरीके सीख लिए थे. वो कहती हैं- मैं दोनों तरफ बहुत बड़े बैग रखती थी. उनके अंदर हार्ड कवर वाली किताबें डालती थी और उन्हें ढाल की तरह पकड़ती थी. अगर सीट मिल जाती थी, तो एक बैग इधर और एक उधर रखती थी, ताकि कोई मुझे छू न सके.
अदिति ने माना कि अक्सर गलत हरकतें जान-पहचान वालों से ही होती हैं. मेरे केस में भी एक घटना परिवार के जानने वाले के साथ हुई थी. बस ऐसा लगता है जैसे कोई आपकी हद पार कर गया हो. वो एहसास बहुत भयानक होता है और वो कभी ठीक नहीं होता.
अदिति ने बताया कि उन्हें करीब 15 साल लगे इन बातों पर खुलकर बोलने में. ये बातचीत तब शुरू हुई जब दोस्तों ने अपनी-अपनी कहानियां शेयर कीं. अदिति बोलीं- वो पहली बार था जब हम सबने खुलकर इस बारे में बात की.
इन घटनाओं से रिबेल हुईं अदिति
अदिति ने कहा कि उन अनुभवों का असर आज भी उनके अंदर है. एक तरह का PTSD रहता ही है. आज भी अगर कोई पब्लिक जगह पर बहुत पास आ जाए, तो मेरा शरीर अपने आप रिएक्ट करता है. मैं तुरंत खुद को बचाने के लिए तैयार हो जाती हूं. अब मैं कुछ भी बर्दाश्त नहीं करती.
सेल्फ-डिफेंस पर बोलते हुए अदिति ने कहा- हर लड़की को अपनी कोहनी का इस्तेमाल करना आना चाहिए और भरोसा मानिए, मजबूत कोहनी बहुत दर्द देती है. उन्होंने ये भी बताया कि कई बार सिक्योरिटी गार्ड्स तक गलत व्यवहार कर देते हैं. फिर कहते हैं, ‘अरे गलती हो गई.’ ये बिल्कुल भी मंजूर नहीं है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी उन्हें एडजस्ट करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा कि किसी ने सीधे तो नहीं कहा, लेकिन उन्होंने ये सब अपनी मां को देखते हुए सीखा.
अदिति ने कहा- मैंने अपनी मां को देखा, कैसे वो एडजस्ट करती थीं, हालात संभालती थीं. आप देखकर ही सीखते हैं. उन्होंने कहा कि कभी-कभी उन्होंने विद्रोह भी किया, लेकिन अब मैं अपनी बात पर अड़ी रहती हूं.
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