बॉलीवुड की सबसे पुरानी फैमिली की अगर बात करें, तो उसमें कपूर खानदान का नाम भी शामिल होता है. पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुआ ये सिलसिला, आज रणबीर कपूर-करीना कपूर तक जारी है. कपूर खानदान की पिछली चार पीढ़ियों ने हिंदी सिनेमा पर राज किया है. लेकिन हर कपूर खानदान का चिराग सक्सेसफुल नहीं हो पाया है.
असफल रहे पृथ्वीराज कपूर के कजिन
पृथ्वीराज कपूर के कजिन रविंद्र कपूर, इस फैमिली में सबसे असफल एक्टर माने जाते हैं. उन्होंने कई फिल्मों में साइड रोल्स किए, मगर उन्हें कभी वैसी सफलता नहीं मिली जैसी उनके भतीजों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर को मिली. उनके सगे भाई कमल कपूर इंडस्ट्री में काफी जाने-माने कैरेक्टर आर्टिस्ट रहे.
रविंद्र कपूर ने 50 के दशक में कई फिल्मों के अंदर छोटे रोल्स किए. जब हिंदी सिनेमा में उन्हें सफलता नहीं मिली, तो वो पंजाबी सिनेमा की तरफ गए. वहां उनके काम को सराहना मिली. रविंद्र कपूर की फिल्म चंबे दी कली हिट हुई. पंजाबी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने हिंदी सिनेमा में साइड रोल्स करना जारी रखा.
साइड रोल्स करके गुजारी जिंदगी
एक्टर ने 70-80 के दशक में यादों की बारात, कारवां, आया सावन झूम के, कयामत से कयामत तक, मंजिल मंजिल, द बर्निंग ट्रेन जैसी दमदार फिल्मों में साइड रोल्स किए. इनमें से कुछ फिल्मों के अंदर तो उनके किरदार का कोई नाम नहीं होता था. लेकिन तब भी रविंद्र कपूर ने हार नहीं मानी. हिंदी सिनेमा ना सही, पंजाबी सिनेमा में उन्होंने नाम कमाना जारी रखा. उन्होंने टीवी के भी कुछ आइकॉनिक सीरियल्स में काम किया.
रविंद्र कपूर के जीवन में सबसे दिलचस्प बात ये रही कि उन्हें कभी राज कपूर ने अपनी फिल्मों में कास्ट नहीं किया. जबकि उनके भाई कमल कपूर, आरके फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्मों में नजर आए. राज कपूर अपने जमाने के सबसे आइकॉनिक फिल्ममेकर थे, लेकिन उन्होंने ना जाने क्यों कभी अपने चाचा रविंद्र कपूर को फिल्मों में नहीं लिया. इसे लेकर कभी उनके परिवार ने भी कोई बयान नहीं दिया.
रविंद्र कपूर आखिरी बार 1991 में आई अनिल कपूर की फिल्म बेनाम बादशाह में नजर आए थे. उन्होंने अपने करियर में 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिसमें से उनका सबसे यादगार रोल जितेंद्र कपूर की फिल्म कारवां में आया.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क