Uttarakhand Election Result 2022: जिस तरह से यूपी के नोएडा के लिए कहा जाता है कि वहां जाना यूपी के सीएम के लिए अशुभ है, उसी तरह यह भी माना जाता है कि देहरादून में मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री के लिए अशुभ है, क्योंकि इसमें रहने वाला मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता. ये मिथक पुष्कर सिंह धामी के खटीमा से चुनाव हारने के बाद एक बार फिर पुख़्ता हो गया. हालांकि, योगी आदित्यनाथ नोएडा जाकर भी चुनाव जीत चुके हैं.
हरीश रावत अपने ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल में इस आवास में रहने के लिए कभी नहीं गए. रावत से पहले मुख्यमंत्री बने विजय बहुगुणा इसमें रहने गए थे, लेकिन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. इसी आवास में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे. उनके बाद सितंबर, 2011 में दोबारा मुख्यमंत्री बने भुवन चंद्र खंडूरी इस आवास में गए ही नहीं.
दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री आवास में रहने से परहेज करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और तीरथ सिंह रावत भी लंबे समय तक पद पर नहीं बने रह पाए. हरीश रावत 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में हारकर सत्ता से बाहर हो गए. इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में रहने की बजाए उसे कोविड केयर सेंटर के रूप में तैयार करने की घोषणा की. लेकिन उसके पूरा होने से पहले ही चार महीने से भी कम समय तक पद पर रहने के बाद उनकी भी विदाई हो गई.
देहरादून में मुख्यमंत्री का आवास बेहद शानदार क्षेत्र में बना हुआ है. घर में दो बड़े दरवाजे हैं, जिसे पहाड़ी शैली से बनाया गया है. मुख्य दरवाजे के अंदर दाखिल होते हुए बड़ा सा बगीचा है, जिसमें तरह-तरह के महंगे पेड़-पौधे और पाम के पेड़ लगे हुए हैं. मुख्य दरवाजे के बाद मुख्य बिल्डिंग बनी हुई है. महंगी लकड़ियों से खिड़की और दरवाजे बनाए गए हैं. अंदर दाखिल होते हुए चमचमाती टहल और राजस्थानी पत्थरों से किए गए काम नजर आते हैं. मुख्यमंत्री के दफ्तर को बेहद शानदार तरीके से बनाया गया है. दफ्तर के अलावा मुख्यमंत्री के घर में दो बड़े-बड़े ऑफिस भी हैं. यहां पर बैठकर मुख्यमंत्री अपने काम देखते हैं. पब्लिक के लिए एक बड़ा हॉल है, जहां पर सोफे और कुर्सियां रखी हुई हैं. घर के बैक साइड में ही मुख्यमंत्री का दफ्तर है.
#Dehradun का मुख्यमंत्री आवास मुख्यमंत्री के लिये अशुभ है और इसमें रहने वाला मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता। ये मिथक पुष्कर सिंह धामी के खटीमा से चुनाव हारने के बाद एक बार फिर पुख़्ता हो गया। मनजीत नेगी की ख़ास रिपोर्ट#ReporterDiary (@manjeetnegilive ) pic.twitter.com/LYI2V2jfNz
— AajTak (@aajtak) March 10, 2022देहरादून में गढ़ी कैंट में राजभवन के बराबर में बने मुख्यमंत्री आवास का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार में हुआ था. हालांकि, जबतक मुख्यमंत्री आवास का निर्माण कार्य पूरा होता, उसके पहले ही उनका पांच साल का कार्यकाल पूरा हो गया. इसके बाद 2007 में बीजेपी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदेश की कमान बीसी खंडूड़ी को मिली. इस अधूरे बंगले को खंडूड़ी ने तैयार कराया. मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने ही इस बंगले का उद्धाटन किया, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. ढाई साल बाद ही उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई.
मंजीत नेगी