उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की एक विधानसभा सीट है पुरोला विधानसभा सीट. पुरोला विधानसभा सीट हिमाचल प्रदेश की सीमा पर पड़ती है. हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे आराकोट, मोरी और देहरादून की सीमा इस विधानसभा क्षेत्र से लगती है. इस विधानसभा क्षेत्र मे रंवाई, बंगानी और पर्वतीय भाषा बोली जाती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पुरोला विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उत्तराखंड राज्य गठन के बाद साल 2002 में इस सीट के लिए पहली दफे चुनाव हुए थे. 2002 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से आठ उम्मीदवार मैदान में थे. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर मैदान में उतरे मालचंद विजयी रहे थे. 2007 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर 2002 की उपविजेता शांति देवी के पुत्र राजेश जुवाठा विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए. 2012 के चुनाव में बीजेपी के मालचंद ने ये सीट कांग्रेस से छीन ली थी.
2017 का जनादेश
पुरोला विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपने निवर्तमान विधायक मालचंद को उम्मीदवार बनाया था. बीजेपी के मालचंद के मुकाबले कांग्रेस ने राजकुमार को चुनाव मैदान में उतारा. कांग्रेस के राजकुमार ने बीजेपी के मालचंद को मात दे दी. करीबी मुकाबले में कांग्रेस के राजकुमार करीब एक हजार वोट के अंतर से चुनाव जीते.
सामाजिक ताना-बाना
पुरोला विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में हर जाति-वर्ग के लोग निवास करते हैं. इस विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यहां सामान्य वर्ग के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
पुरोला विधानसभा सीट से विधायक कांग्रेस के राजकुमार का दावा है कि उनके कार्यकाल में काफी विकास कार्य हुए हैं. विधायक निधि और शासन के सहयोग से इलाके में बुनियादी ढांचे के विकास पर हमारा जोर रहा है. सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देकर हमने विकास कार्य कराए हैं. विपक्षी दलों के नेता विधायक के दावे को हवा-हवाई बता रहे हैं.
ओंकार बहुगुणा