कांग्रेस पार्टी में ज़िम्मेदारियों का ट्रांसफर तेज़ हो चला है. राहुल अध्यक्ष की भूमिका की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे हैं, तो सोनिया गांधी पार्टी में संरक्षक की कुर्सी पर विराजमान होती दिख रही हैं. ऐसे में कांग्रेसियों का तुरुप का इक्का प्रियंका गांधी भी सियासत में अपना दायरा बढ़ा रहीं हैं. कभी रायबरेली-अमेठी यानी मां और भाई के चुनाव क्षेत्र तक सीमित रहीं प्रियंका अब परदे के पीछे से बड़ी भूमिका निभा रहीं हैं.
हाल में प्रियंका का बढ़ता सियासी दायरा
1. नोटबंदी पर पार्टी की रणनीति तैयार करना.
2. राहुल के दौरे पर होने के दौरान पार्टी के बड़े नेताओं के साथ मीटिंग करना.
3. रायबरेली अमेठी के बाहर प्रियंका के पोस्टर लगाने की कार्यकर्ताओं को छूट मिलना.
4. हाल में टूट की कगार पर पहुंचे सपा-कांग्रेस गठजोड़ को सीधे अखिलेश यादव से बात कर पक्का करना.
5. प्रियंका का लगातार अखिलेश की सांसद पत्नी डिंपल यादव के साथ मिलकर गठजोड़ का खाका तैयार करना.
ऐसा पहली बार हुआ है जब खुलकर कांग्रेसी नेता प्रियंका के सक्रिय होने की खबर भी देने लगे हैं. कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने पहली बार आधिकारिक तौर पर बताया था कि, यूपी को लेकर हुई पार्टी की बैठक में प्रियंका ने हिस्सा लिया. गठजोड़ की डील पक्की होने के बाद टीम सोनिया के दिग्गजों ने प्रियंका की भूमिका और कामयाबी का ज़िक्र किया.
सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल ने कहा था कि 'सपा के साथ बातचीत में कोई छोटा नेता भूमिका नहीं निभा रहा है, ये खबरें भ्रामक हैं. अखिलेश यादव से यूपी के प्रभारी ग़ुलाम नबी आजाद और प्रियंका गांधी बात कर रहे हैं.'
लेकिन इतना सब होने के बाद प्रियंका खुलकर राजनीति में कब आएंगी? रायबरेली अमेठी के बाहर प्रचार कब और कितना करेंगी? इस सवाल का इंतज़ार सबको है. अब तो सपा से तालमेल के बाद प्रियंका और डिंपल की साझा कार्यक्रम का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. लेकिन उसके पहले गठबंधन में अमेठी रायबरेली का फंसा पेंच सुलझना बाकी है. हालांकि इस सवाल पर राजीव शुक्ला कहते हैं कि प्रियंका जी राजनीती में कब आएंगी, ये फैसला वो खुद और गांधी परिवार मिलकर करेगा. हां, मेरे जैसे पार्टी के सभी कार्यकर्ता चाहते हैं कि, वो राजनीति में खुलकर आएं.
कुमार विक्रांत