पढ़ें: दिल्ली उपचुनाव में BJP की जीत और AAP की हार के मायने

बीजेपी के तमाम शीर्ष नेतृत्व इस जीत से काफी उत्साहित है. उनको लगता है कि इस सीट के जीतने से दिल्ली में एक माहौल बनेगा बीजेपी के पक्ष में. जिसका फायदा उन्हें एमसीडी के चुनाव में तो होगा ही.

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अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी अकाली दल ने आम आदमी पार्टी से सीट छीनकर एक मैसेज देने की कोशिश की है कि अब आम आदमी पार्टी से लोग उबने लगे हैं. इसी वजह से आम आदमी पार्टी उप चुनाव हार गई है.

बीजेपी के तमाम शीर्ष नेतृत्व इस जीत से काफी उत्साहित है. उनको लगता है कि इस सीट के जीतने से दिल्ली में एक माहौल बनेगा बीजेपी के पक्ष में. जिसका फायदा उन्हें एमसीडी के चुनाव में तो होगा ही. आगे भी इसको भुनाने की कोशिश करेंगे. बीजेपी के नेता इस जीत को आम आदमी पार्टी की नाकामी और उनसे जनता का मोह भंग के तौर पर प्रचारित करने में लगे हैं. ताकि इस जीत से दिल्ली में ऐसा माहौल बनाया जा सके कि अब आम आदमी पार्टी के दिन लद गए हैं.

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और दूसरे तमाम नेता इस जीत को केजरीवाल सरकार पर रेफरेंडम बता रहे हैं. इनका कहना है कि अगर आज विधानसभा के चुनाव हो जाए तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ हो जाएगा. जनता उन को नकार चुकी है. इस जीत से ये बात साबित हो चुकी है.

बीजेपी को ये भी लगता है कि 23 अप्रैल को होने वाले एमसीडी के चुनाव में भी इस जीत का फायदा उन्हें मिलेगा और बीजेपी ने ये रणनीति बनाई है कि इस जीत की सेलिब्रेशन को वो दिल्ली के इन तमाम वार्ड में मनाएगी ताकि जीत का सिलसिला एमसीडी के चुनाव से होते हुए दिल्ली के विधानसभा के चुनावों तक जारी रहे.

उधर का कहना है कि वह सीट हारे जरूर है. लेकिन उस इलाके में लोगों की नाराजगी के चलते ऐसा हुआ है क्योंकि वहां के विधायक रहे जरनैल सिंह पंजाब में चुनाव लड़ने चले गए थे. जिससे लोग नाराज हुए थे. आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि अभी भी दिल्ली में जनता उनके साथ है. जो भी कमियां होगी वो लोगों के बीच जाकर दूर कर देंगे. लोगों को समझाएंगे उनकी नाराजगी दूर करेंगे. लेकिन इस हार के बावजूद भी एमसीडी के चुनाव में आम आदमी पार्टी ही जीतेगी.

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आम आदमी पार्टी बेशक इस हार को ऊपरी तौर पर ढांपने की कोशिश कर रही हो अलग-अलग तर्क दे करके. लेकिन राजनीतिक विश्लेषक ये मानते हैं कि ये हार आम आदमी पार्टी के लिए एक झटका है. उनका मानना है कि आम आदमी पार्टी के लिए एमसीडी के चुनाव हो और फिर उसके बाद विधानसभा के चुनाव. इतने आसान नहीं होंगे जितने 2015 के विधानसभा चुनाव थे.

अब के लिए खास महत्व रखते हैं क्योंकि इस हार के झटके से आम आदमी पार्टी तभी उभर सकती है जब एमसीडी के चुनाव में वो जीते. राजनीतिक विश्लेषक ये भी मानते हैं कि अगर आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन एमसीडी के चुनाव में अच्छा नहीं रहा तो आम आदमी पार्टी के लिए आने वाले समय में काफी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं राजनीतिक तौर से.

उधर बीजेपी की कोशिश यही है कि इस जीत के बाद बने माहौल को एमसीडी के चुनाव से होते हुए विधानसभा तक बनाए रखा जाए. बीजेपी के लिए भी एमसीडी के चुनाव जीतना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर सीट जीतने के बाद बीजेपी एमसीडी में हार गई तो आम आदमी पार्टी को तो राजौरी गार्डन की हार से उभरने का मौका मिलेगा. लेकिन, बीजेपी के लिए बड़ा झटका साबित होगा और जो माहौल इस जीत से बीजेपी बनाना चाहती है विधानसभा के चुनाव तक. उस में बीजेपी को फिर से चुनौती होगी.

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