VVPAT पर हलफनामे के लिए चुनाव आयोग ने मांगा समय, SC ने दी इजाजत

चुनाव आयोग की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन मामले में हलफनामा दाखिल करने की समय सीमा शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दी है. चुनाव आयोग के हलफनामे के बाद शीर्ष अदालत एक अप्रैल को मामले की सुनवाई करेगी. इस संबंध में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने याचिका दाखिल की है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन यानी वीवीपैट पेपर ट्रेल के फिजिकल वेरिफिकेशन मामले पर हलफनामा दाखिल करने के लिए चुनाव आयोग को शुक्रवार तक का समय दे दिया है. शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग की अपील पर यह समय बढ़ाया है. इससे पहले शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को इस बाबत 28 मार्च को शाम चार बजे तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था.

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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन की प्रक्रिया को बढ़ाने पर जोर देते हुए चुनाव आयोग से कहा था कि किसी भी संस्था को खुद को सुधार से अलग नहीं रखना चाहिए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने विपक्षी दलों की याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को यह बताने का निर्देश दिया था कि क्या वह लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए हर क्षेत्र में वीवीपैट के एक-एक नमूना सर्वेक्षण की जगह यह संख्या बढ़ा सकता है?

इसके साथ ही कोर्ट ने यह पूछा था कि चुनाव आयोग यह भी बताए कि क्या नमूना सर्वेक्षण को एक हाई लेवल पर बढ़ाया जा है? ये याचिका आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने दाखिल की है. इसमें शीर्ष अदालत से लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी वीवीपैट की पर्चियों की क्रमरहित जांच का निर्देश देने की मांग की गई है.

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शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा था कि यह आरोप लगाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह वोटरों की संतुष्टि का मामला है. अब चुनाव आयोग को इस पर शुक्रवार तक सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा. इसके बाद विपक्षी दलों के नेताओं की इस याचिका पर एक अप्रैल को आगे की सुनवाई होगी.

सोमवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही अदालत ने चुनाव उपायुक्त सुदीप जैन से सवाल किया था कि क्या आयोग वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन की संख्या बढ़ा सकता है. फिलहाल चुनाव आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सिर्फ एक मतदान केन्द्र में वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन की व्यवस्था की है.

इस पर जैन का जवाब था कि चुनाव आयोग के पास यह विश्वास करने की पर्याप्त वजह हैं कि वीवीपैट की पर्चियों के सत्यापन की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता नहीं है. पीठ ने इस पर जैन से कहा था कि यह वोटर की संतुष्टि का सवाल है. इसमें आरोप का कोई सवाल नहीं है. आप हमें बताएं कि क्या आप इनकी संख्या बढ़ा सकते हैं? अगर आप ऐसा कर सकते हैं, तो कीजिए, वरना हमको इसकी वजह बताइए.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर 15 मार्च को निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था और इस मामले में मदद करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया था. याचिका दायर करने वालों में 6 राष्ट्रीय और 15 क्षेत्रीय दलों के नेताओं का दावा है कि वो देश की 70 से 75 फीसदी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन दलों में कांग्रेस, राकांपा, आम आदमी पार्टी, माकपा, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, लोकतांत्रिक जनता दल और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम शामिल हैं.

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इन दलों ने फरवरी में चुनाव आयोग के साथ बैठक में भी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर आशंकाएं व्यक्त की थीं, लेकिन आयोग ने इन मशीनों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ के आरोपों से इंकार कर दिया था. इसके बाद आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए कहा था कि प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के एक विधानसभा क्षेत्र के आधार पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी.

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