जातीय समीकरण साधने में लगे हैं राज्यवर्धन सिंह, कृष्णा पूनिया के नाम पर चुप

जयपुर ग्रामीण में राजपूत बनाम जाट का मुकाबला होता देख राठौर अनुसूचित जाति, जनजाति और गुर्जरों के साथ कर रहे अलग-अलग मीटिंग. लेकिन कृष्णा पूनिया का नाम न लेकर कांग्रेस को बना रहे निशाना.

Advertisement
राज्यवर्धन सिंह(फोटो-ट्विटर) राज्यवर्धन सिंह(फोटो-ट्विटर)

अमित राय

  • जयपुर,
  • 04 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

जयपुर ग्रामीण संसदीय सीट पर बीजेपी के राज्यवर्धन सिंह राठौर और कांग्रेस की कृष्णा पूनिया के बीच लड़ाई रोचक हो गई है. दोनों खिलाड़ी रहे हैं और कृष्णा पूनिया राठौर पर जोरदार हमले कर रही हैं. तो राठौर भी पीछे नहीं हट रहे हैं. लेकिन वो पूनिया को नहीं कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं. वह कांग्रेस के घोषणा पत्र को निशाना बना रहे हैं.

Advertisement

जयपुर ग्रामीण से बीजेपी के उम्मीदवार राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा है कि कांग्रेस राज्य को कमजोर करने के लिए चुनाव मैदान में आई है. उस पार्टी को लोग वोट नहीं देंगे, जो धारा 370 को बरकरार रखने की बात करती है. कश्मीर में सेना को हटाने की बात करती है और राज्यों में जारी सेना के स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स एक्ट को खत्म करने की बात करती है. राठौर कहते हैं कि हम लोगों के बीच जाएंगे और बताएंगे कि कांग्रेस अगर आ गई तो किस तरह के हालात देश में पैदा होंगे.

राठौर का आरोप है कि यहां तक उसमें यह भी कहा गया है कि मीडिया के ऊपर भी कानून बनाया जाएगा. अगर कांग्रेस सत्ता में आ जाती है तो मीडिया को ही बोलने की आजादी नहीं होगी.

राज्यवर्धन राठौर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. जबकि उनके सामने कांग्रेस ने कृष्णा पूनिया को मैदान में उतारा है राठौर मोदी के नाम के भरोसे चुनाव मैदान में रहने के बजाय जातीय समीकरण भी साधने में लगे हैं. जयपुर ग्रामीण में राजपूत बनाम जाट का मुकाबला होता देख राठौर कांग्रेस के वोट बैंक अनुसूचित जाति, जनजाति और गुर्जरों को अलग से मीटिंग कर समझाने में लगे हैं कि बीजेपी उनकी असली हितैषी पार्टी है.

Advertisement

राज्यवर्धन सिंह राठौर ने दोनों ही जातियों के समाज के लोगों को उनके मंदिरों में बुलाकर समझाने की कोशिश की कि वे कांग्रेस के साथ ना रह कर बीजेपी का साथ दें. हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार कृष्णा पूनिया के बारे में बार-बार पूछने पर भी राज्यवर्धन राठौर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं होते हैं. दरअसल राठौर की रणनीति है कि वह पूरे चुनाव प्रचार में कृष्णा पूनिया का नाम नहीं लेंगे. यही कांग्रेस की ताकत भी है क्योंकि कृष्णा पूनिया एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, लिहाजा राठौर के मुकाबले खड़ी हो सकती हैं. राजनीति में नई हैं तो उनके ऊपर कोई आरोप भी नहीं है.

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement