बीते कुछ सालों से नौकरियों को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. विपक्षी नेताओं की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार ने वादे के मुताबिक लोगों को हर साल 2 करोड़ नौकरियां नहीं दी हैं. वहीं आम लोगों को भी लग रहा है कि मोदी सरकार नौकरियां देने में नाकाम है. वहीं महंगाई और नोटबंदी को भी मोदी सरकार की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है.
किन मुद्दों पर कितने फीसदी लोग
दरअसल, आजतक-कार्वी इनसाइट्स के ताजा सर्वे में ये बातें सामने आई हैं. सर्वे में उन मुद्दों के बारे में सवाल पूछे गए जिनमें मोदी सरकार नाकाम रही. इसमें लोगों ने जो जवाब दिए वो हैरान करने वाले थे. सर्वे के मुताबिक 34 फीसदी लोगों ने माना कि मोदी सरकार नौकरी का वादा पूरा करने में नाकाम रही तो वहीं 20 फीसदी लोगों को लगता है कि यह सरकार महंगाई को काबू नहीं कर सकी. सर्वे में नोटबंदी के फैसले को भी मोदी सरकार की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा गया है. सर्वे के मुताबिक 14 फीसदी लोग मानते हैं कि नोटबंदी एक नाकाम कोशिश थी.
किसानों की खुदकुशी रोकने में नाकाम
मोदी सरकार की ओर से किसानों के पक्ष में कई फैसले लेने के दावे किए गए हैं. लेकिन सर्वे में 7 फीसदी लोगों का कहना है कि यह सरकार किसानों की आत्महत्या रोकने में नाकाम है. जबकि 7 फीसदी लोगों का मानना है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स में दिक्कतों की वजह से यह भी एक नाकाम पहल रही. सरकार की सीबीआई और आरबीआई से टकराव ने भी लोगों को नाराज किया है. करीब 2 फीसदी लोगों का मानना है कि इन दोनो संस्थाओं के साथ टकराव, सरकार की नाकामी है.
नौकरी के मोर्चे पर देश के अलग-अलग हिस्सों का मूड
अगर देश के अलग-अलग हिस्सों में बात करें तो उत्तर भारत में 40 फीसदी लोग मानते हैं कि नौकरियों के मुद्दे पर मोदी सरकार नाकाम है. वहीं पूर्वी भारत के 44 फीसदी लोगों की नजर में बेरोजगारी एक अहम मुद्दा है जिसे दूर करने के प्रयास में सरकार नाकाम रही है. जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में क्रमश : 20 फीसदी और 28 फीसदी लोगों ने यह माना है कि नौकरी के मोर्चे पर मोदी सरकार नाकाम है.
नौकरी के मुद्दे को लेकर बेरोजगार लोगों में काफी नाराजगी है. करीब 46 फीसदी लोगों का मानना है कि सरकार इस मोर्चे पर नाकाम है. वहीं 30 फीसदी किसानों को लगता है कि सरकार ने नौकरी के लिए ठोस प्रयास नहीं किए.
नोटबंदी भी नाकाम कोशिश
जिस नोटबंदी को मोदी सरकार ब्लैकमनी के खिलाफ मास्टरस्ट्रोक बताती है उसी फैसले को लोग एक नाकाम प्रयास के रूप में देखते हैं. उत्तर भारत क्षेत्र के 14 फीसदी और दक्षिण भारत के 16 फीसदी लोगों का मानना है कि नोटबंदी एक असफल कोशिश थी. बता दें कि इस सर्वे में 12,166 लोगों से सवाल पूछे गए. इसमें 69 फीसदी ग्रामीण और 31 फीसदी शहरी लोग शामिल थे. इसका दायरा 97 लोकसभा क्षेत्रों और 194 विधानसभा सीटों तक फैला था. सर्वे में 19 राज्यों को शामिल किया गया.
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