Exit Poll: नवीन पटनायक, केसीआर और जगन मोहन बनेंगे किंगमेकर?

तीनों पार्टियां अपने-अपने राज्यों की मुख्य पार्टियां हैं. सबसे खास बात है कि इनमें से कोई भी पार्टी एनडीए गठबंधन में नहीं है. राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो ये तीनों पार्टियां सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी और मौका आने पर एनडीए के साथ जा सकती हैं

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क्षेत्रीय पार्टियां होंगी अहम क्षेत्रीय पार्टियां होंगी अहम

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2019,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

देश में लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं. सात चरणों में हुए आम चुनावों का पहला चरण 11 अप्रैल को हुआ था. 543 लोकसभा सीटों के नतीजे 23 मई को घोषित होंगे. इन चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस मुख्य पार्टियां थीं, लेकिन कुछ क्षेत्रीय पार्टियां भी हैं जो सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं. आज बात करेंगे कुछ ऐसी ही राज्य पार्टियों की जो हर बार सरकार बनाने के लिए अहम मानी जाती हैं. इसमें ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर (कांग्रेस) का नाम शामिल है.

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ये तीनों पार्टियां अपने-अपने राज्यों की मुख्य पार्टियां हैं. सबसे खास बात है कि इनमें से कोई भी पार्टी एनडीए गठबंधन में नहीं है. राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो ये तीनों पार्टियां सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी और मौका आने पर एनडीए के साथ जा सकती हैं. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने चक्रवात फानी में केंद्र सरकार को मदद करने के लिए पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ भी की थी. इस चक्रवात से राज्य में करीब 64 लोगों की मौत हो गई थी. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भी जब राज्य का दौरा किया था तो नवीन पटनायक की तारीफ की थी. पटनायक की मोदी सरकार की तारीफ करना अपने आप में एक बड़ी बात है क्योंकि दोनों नेता एक दूसरे कड़े विरोधी रहे हैं. अभी तक पटनायक द्वारा ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन समय के साथ आगे क्या रहता है ये तो आगे ही पता चलेगा.

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चंद्रशेखर राव तेलंगाना के मुख्यमंत्री हैं और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष हैं. जब भी राज्य में अग्निपरीक्षा की बात हुई है तो चंद्रशेखर ने खुद को साबित किया है. हैदराबाद से अलग होकर बने तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की अच्छी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब से यह राज्य बना है तब से यहां केसीआर की सरकार है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने कांग्रेस, तेलुगु देशम पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति के महागठबंधन को बहुत पीछे छोड़ते हुए 47 प्रतिशत मत-भागीदारी के साथ कुल 120 में 88 सीटें हासिल की थीं. भारतीय जनता पार्टी ने अपने बूते चुनाव लड़ा था. सफलता के इस रथ पर सवार केसीआर अब नई दिल्ली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का अनुमान लगा रहे हैं. उन्होंने 17 मार्च को करीमनगर में कहा, 'आप मुझे 16 सांसद दे दें, मैं देश का चेहरा बदल दूंगा.'

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जगनमोहन रेड्डडी आंध्र प्रदेश की राजनीति में मुख्य चेहरा है और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं. राज्य में 3,500 किलोमीटर  से ज्यादा की पदयात्रा करने से लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर हर फैसले के खिलाफ हमला बोल रहे हैं. आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू सत्ता विरोधी रुझान से जूझ रहे हैं, ऐसे में इसका पूरा फायदा उठाने की कोई कोर कसर जगनमोहन नहीं चोड़ना चाहते. अपने  पिता की मौत के साथ ही जगनमोहन उनके विचारों को जनता के बीच लेकर जा रहे हैं. हालांकि 2014 में वह नायडू तीडीपी से वह हार गए थे. अब एक बार फिर वह जीत के कयास लगाए बैठे हैं.

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इंडिया टुडे के एक्सिस माई इंडिया सर्वे के मुताबिक, इस बार आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर बाजी मार लेगी. आंध्र प्रदेश की कुल 25 सीटों में से जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. वाईएसआर को 18 से 20 सीटें मिल सकती हैं. वहीं सत्तारूढ़ चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को इन चुनावों में 4-6 सीटें मिलेंगी. वहीं पवन कल्याण की जनसेना पार्टी को 1 सीट मिलेगी. वहीं बीजेपी और कांग्रेस को आम चुनावों में आंध्र प्रदेश से एक भी सीट नहीं मिलेगी.

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