राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को चौथे चरण में वोटिंग हुई. इस सीट पर कुल मतदान 60.87 फीसदी रिकॉर्ड किया गया, जबकि इस चरण में राजस्थान में 68.09 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. इस चरण में 9 राज्यों की 71 सीटों पर वोट डाले गए. इस चरण में मतदान का कुल प्रतिशत 64.85 रहा.
टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर सुखबीर जौनपुरिया को चुनाव मैदान में उतारा है. पिछली बार यहां से जौनपुरिया ने जीत दर्ज की थी. जौनपुरिया के पक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित कई बड़े नेता प्रचार मैदान में उतरे थे.
वहीं, कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा को टिकट दिया है. मीणा के पक्ष में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित अन्य दिग्गज कांग्रेसी नेता चुनावी रैली में उतरे थे.
लोकसभा चुनाव से पहले यहां गुर्जरों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था. इसके बाद राज्य की नवगठित कांग्रेस सरकार को उनकी मांगें माननी पड़ी थी. राज्य का टोंक और सवाई माधोपुर जिला शुरू से ही गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है. टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई.
यह संसदीय क्षेत्र टोंक जिले की 4 विधानसभा और सवाईमाधोपुर जिले की 4 विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है. यहां से वर्तमान में बीजेपी के सुखबीर सिंह जौनपुरिया सांसद हैं. इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद साल 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए. कांग्रेस के नमो नारायण मीणा और गुर्जर समाज के बड़े नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच मुकाबला देखने को मिला. हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस के नमो नारायण मीणा ने जीत दर्ज की.
साल 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस इस सीट को बचाने में नाकाम रही. टोंक-सवाई माधोपुर में हुए दूसरे लोकसभा में कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारक और यूपी से सांसद रहे पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन को मैदान में उतारा था, तो बीजेपी ने भी चेहरा बदलते हुए गुर्जर उम्मीदवार के तौर पर सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर दांव खेला था. पिछले लोकसभा चुनाव में जौनपुरिया ने अजहरुद्दीन को पटखनी दी थी और किरोणी लाल मीणा तीसरे स्थान पर रहे.
टोंक-सावाई माधोपुर की पहचान ऐतिहासिक नजरिए से सवाई माधोपुर के चलते अहम है. सवाई माधोपुर का इतिहास यहां के रणथम्भौर दुर्ग के ईर्द गिर्द ही घूमता है. तो वहीं रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान भी इसी क्षेत्र में आता है, जो पूरे भारत में अपने बाघों के लिए जाना जाता है. सवाई माधोपुर की स्थापना जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह ने की थी. जयपुर राजघराने की राजकुमारी दियाकुमारी सवाई माधोपुर से विधायक भी रहीं.
साल 2011 की जनसंख्या के मुताबिक यहां की आबादी 27 लाख 56 हजार 877 है, जिसका 78.81 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 21.19 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. इसके साथ ही कुल आबादी का 20.56 फीसदी अनुसूचित जाति और 16.83 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर मुस्लिम, गुर्जर और मीणा समाज का अच्छा खासा प्रभाव है. इसके अलावा एससी, ब्राह्मण, माली और राजपूत समाज का भी अलग-अलग इलाकों में अपना प्रभाव है.
टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले की गंगापुर, बामनवास, सवाई माधोपुर, खंडर और टोंक जिले की मालपुरा, निवाई, टोंक और देवली-उनियारा विधानसभा शामिल हैं. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां की 8 सीटों में से 6 सीट पर जीत का परचम लहराया था, जबकि गंगापुर सीट पर निर्दलीय और मालपुरा सीट पर बीजेपी की जीत हुई थी.
साल 2014 लोकसभा चुनाव में टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर कुल 61 फीसदी मतदान हुआ था और कुल मिलाकर 22 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. इसमें से बीजेपी को 52.6 फीसदी और कांग्रेस को 39.6 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी से सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कांग्रेस से मोहम्मद अजहरुद्दीन को 1 लाख 35 हजार 311 मतों से पराजित किया था. इस चुनाव में जौनपुरिया को 5 लाख 48 हजार 179 और अजहरुद्दीन को 4 लाख 12 हजार 868 वोट मिले थे.
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वरुण शैलेश