झारखंड में भी सहयोगी से बीजेपी का टकराव, सीट शेयरिंग पर आजसू ने दिखाए तेवर

2014 के विधानसभा चुनाव में आजसू के साथ बीजेपी का प्रीपोल अलायंस हुआ था. आजसू ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पांच पर जीत हासिल की थी. बीजेपी ने आजसू से उसकी दो सीटें मांगी हैं. ये सीटें लोहरदगा और चंदनकियारी हैं, जो आजसू की परंपरागत सीटें हैं.

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास (फोटो- फेसबुक)
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 06 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

  • झारखंड में सहयोगी आजसू से बीजेपी का टकराव
  • सीट शेयरिंग पर नहीं बन रही बीजेपी-आजसू की बात
  • 2014 चुनाव से ज्यादा सीटें चाहती है आजसू

झारखंड में पहले चरण के विधानसभा चुनाव के लिए आज से नामांकन शुरू हो गया है, लेकिन सत्ताधारी बीजेपी और आजसू के बीच सीटों को लेकर बात फाइनल नहीं पाई है. 2014 में साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी और आजसू (AJSU) मौजूदा चुनाव में अलग राह पर जाती हुई नजर आ रही हैं. दोनों के बीच सीटों को लेकर पेच फंस गया है.

आजसू ने 2014 की तर्ज पर 8 सीटों पर चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है. साथ ही वह अपनी परंपरागत सीटें छोड़ने को भी तैयार नहीं है. पार्टी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है. जबकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने आजसू को 8 सीटें देने की बात कही है. साथ ही यह भी कहा है कि सीट शेयरिंग का फॉर्मूला जल्द तय हो जाएगा.

लोहरदगा में सुखदेव भगत बने टकराव की वजह

बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में आजसू के साथ बीजेपी का प्रीपोल अलायंस हुआ था. आजसू ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पांच पर जीत हासिल की थी. बीजेपी ने आजसू से उसकी दो सीटें मांगी हैं. ये सीटें लोहरदगा और चंदनकियारी हैं, जो आजसू की परंपरागत सीटें हैं.

समस्या ये है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं. सुखदेव भगत लोहरदगा सीट से ही विधायक हैं. इस सीट पर एक बार उपचुनाव और तीन बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 2005 के पहले चुनाव में कांग्रसे के टिकट पर सुखदेव भगत जीते थे. इसके बाद 2009 और 2014 में आजसू के कमल किशोर भगत ने बाजी मारी थी. हालांकि, 2015 में हुए उपचुनाव में सुखदेव भगत फिर से जीतकर आए थे.

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लिहाजा, अब बीजेपी से टिकट की दावेदारी सुखदेव भगत की बन रही है. जबकि आजसू नेता कमल किशोर भगत इस बार अपनी पत्नी के लिए दावेदारी ठोक  रहे हैं. दरअसल, कमल किशोर भगत को कोर्ट ने मारपीट के एक केस में दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया था.

चंदनकियारी सीट पर भी खींचतान

चंदनकियारी भी हॉट सीट मानी जा रही है. इस सीट पर पिछली बार झारखंड विकास मोर्चा के अमर बाउरी ने जीत हासिल की थी. बाद में बाउरी पाला बदल कर बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया. इधर, आजसू ने कहा है कि यह सीट आजसू की है. पूर्व मंत्री उमाकांत रजक प्रमुख दावेदार हैं.

हुसैनाबाद सीट के समीकरण भी बदले

हाल ही में बीएसपी के एकमात्र विधायक शिवपूजन मेहता आजसू में शामिल हो गए हैं. शिवपूजन पलामू की हुसैनाबाद सीट से विधायक हैं. इस सीट पर भी बीजेपी अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है. ऐसे में यहां भी टकराव की स्थिति पैदा होती दिखाई दे रही है.

बहरहाल, अभी तक दोनों दलों में शीट शेयरिंग पर स्थिति स्पष्ट नजर नहीं आ रही है.

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