गुजरात में पहली चुनावी अग्निपरीक्षा... जानिए 89 सीटों का पूरा लेखा-जोखा, किसका क्या दांव पर?

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 89 सीटों के लिए गुरुवार को मतदान है. पहले दौर में सौराष्ट्र-कच्छ और दक्षिण गुजरात की सीटों पर वोटिंग होनी है. 2017 के चुनाव में बीजेपी को सौराष्ट्र में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और कांग्रेस का पल्ला भारी रहा था जबकि दक्षिण गुजरात में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए पहले चरण का चुनाव अहम है?

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नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल

कुबूल अहमद / गोपी घांघर

  • नई दिल्ली/अहमदाबाद,
  • 29 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मंगलवार शाम प्रचार का शोर थम गया. पहले चरण की 89 विधानसभा सीटों पर गुरुवार को मतदान होना है, जिसके लिए 788 प्रत्याशी मैदान किस्मत आजमा रहे हैं. पांच साल पहले इन सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हुई थी, लेकिन इस बार सियासी हालात बदले हुए हैं. कांग्रेस और बीजेपी के अलावा आम आदमी पार्टी भी मैदान में है और मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी और कांग्रेस क्या अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा पाती हैं? 

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पहले चरण में कांग्रेस-बीजेपी-AAP
गुजरात चुनाव के पहले चरण की 89 सीटों पर कुल 788 उम्मीदवार मैदान में हैं. 70 महिलाएं उम्मीदवार और 339 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी और कांग्रेस ने सभी 89 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं जबकि आम आदमी पार्टी ने 88, बसपा ने 57 और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) से 6 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसके अलावा सपा यहां एक सीट पर निर्दलीय कैंडिडिट को समर्थन कर रही है तो बीटीपी ने भी अपने प्रत्याशी उतार रखे हैं. 

19 जिलों की 89 सीटों पर वोटिंग
पहले चरण में गुजरात के 19 जिलों की 89 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जिसमें सौराष्ट्र-कच्छ और दक्षिण गुजरात के इलाके की सीटें हैं. दक्षिण गुजरात के सात जिले की 35 सीटें हैं तो सौराष्ट्र-कच्छ के 12 जिले की 54 सीटों हैं. राजकोट, सुरेंद्रनगर, कच्छ, मोरबी, जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, बोटाद, नर्मदा, भरूच, सूरत, तापी, डांग्स, नवसारी, और वलसाड जिले की सीटों पर एक दिसंबर को वोट डाले जाएंगे? 2017 के चुनाव में इन सीटों पर 68 फीसदी वोटिंग हुई थी.  

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किस पार्टी का क्या दांव पर लगा?
गुजरात में सौराष्ट्र-कच्छ के इलाके में ही बीजेपी पर कांग्रेस भारी पड़ी थी जबकि दक्षिण गुजरात में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था. पहले चरण की जिन 89 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, 2017 के चुनावी नतीजे को देखें तो बीजेपी ने 48 सीटें जीती थीं तो कांग्रेस को 39, बीटीपी को 2 और एनसीपी को एक सीट मिली थी. इस तरह से बीजेपी और कांग्रेस दोनो ही दलों के लिए अपनी-अपनी सीटें बचाए रखनी चुनौती है जबकि आम आदमी पार्टी को खोने के लिए कुछ नहीं है. 

वहीं, क्षेत्रीय आधार पर देखते हैं तो सौराष्ट्र-कच्छ इलाके में 54 सीटें आती है, जहां पर 65 फीसदी वोटिंग हुई थी. कांग्रेस को 28 सीटें मिली थी तो बीजेपी को 20 और अन्य दलों को तीन सीटें मिली थी. दक्षिण गुजरात इलाके में 35 सीटें आती हैं, जहां पर 2017 में 70 फीसदी वोटिंग हुई थी. दक्षिण गुजरात में बीजेपी को 27 सीटें मिली थी तो कांग्रेस को आठ सीटों से संतोष करना पड़ा था. 

बीजेपी का सबसे खराब प्रदर्शन
पिछले चुनाव में बीजेपी का सबसे खराब प्रदर्शन सौराष्ट्र के इलाके में रहा था. पहले चरण की 19 जिलों में से बीजेपी 7 जिलों में खाता नहीं खोल सकी थी. अमरेली, नर्मदा, डांग्स, तापी, अरावली, मोरबी और गिर सोमनाथ जिले में बीजेपी को एक सीट नहीं मिली थी. अमरेली में कुल पांच, गिर सोमनाथ में चार, अरावली और मोरबी में तीन-तीन, नर्मदा और तापी में दो-दो और डांग्स में एक सीट है. इन सभी जगह कांग्रेस को जीत मिली थी. सुरेंद्रनगर, जूनागढ़ और जामनगर में कांग्रेस ने बीजेपी से ज्यादा सीटें जीती थी. सुरेंद्रनगर जिले की पांच में से चार, जूनागढ़ जिले की पांच से चार और जामनगर जिले की पांच में से तीन सीटें कांग्रेस जीती थी. 

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कांग्रेस का कहां रहा खराब प्रदर्शन
पहले चरण में पोरबंदर एकलौता जिला था, जहां पर कांग्रेस का खाता नहीं खुला था. बीजेपी यहां की दोनों ही सीटें जीतने में कामयाब रही थी. कच्छ, राजकोट, भावनगर, भरूच, सूरत, नवसारी और बलसाड़ में बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी. सूरत की 16 में से बीजेपी 15 सीटें जीती थी और कांग्रेस को महज एक सीट मिली थी. बीजेपी की सत्ता में वापसी में सूरत का सबसे अहम योगदान रहा था. कांग्रेस इस इलाके में अगर अच्छा प्रदर्शन किए रहती तो गुजरात में सत्ता का वनवास खत्म हो गया होता. 

गुजरात में त्रिकोणीय मुकाबला
गुजरात चुनाव के सियासी समीकरण हर पल बदल रहे हैं. कांग्रेस और बीजेपी के बीच सौराष्ट्र-कच्छ की कुछ सीटों पर सीधा मुकाबला है तो कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है. गुजरात के सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के इलाके में पाटीदार समुदाय अहम है. किसी भी उम्मीदवार की जीत और हार का फैसला इन्हीं वोटर्स के हाथ में होता है. इसके अलावा ओबीसी वर्ग की संख्या भी काफी अधिक है. पिछले चुनाव में कांग्रेस को यहां बढ़त मिली थी.

बीजेपी दलबदलुओं के सहारे
2017 के विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र-कच्छ इलाके से जीते हुई कांग्रेस के कई विधायकों ने बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. मोरबी से बृजेश मेरजा, लिंबडी से सोमा पटेल, विसावदार से हर्षद रिबदिया, ध्रांगधरा से परसोतम सबरिया, जसदान से कुंवरजी बावलिया, जामनगर से वल्लभ धाराविया, मानवदार से जवाहर चावड़ा, तलाला से भगवान बरद, धारी से जेवी काकड़िया और गढ़डा से प्रवीण मारू शामिल हैं. ऐसे में देखना है कि दलबदलुओं के सहारे बीजेपी क्या कांग्रेस को सौराष्ट्र में चुनौती दे पाएगी? 

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पहले चरण में दो करोड़ 39 लाख वोटर्स
गुजरात के पहले चरण में 19 जिलों की 89 विधानसभा सीटों पर मतदान के लिए 25393 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं. पहले चरण के लिए कुल मतदाता 2,39,56,817 हैं, जिसमें 1,24,22,518 पुरुष और 1,15,33,797 महिलाएं हैं. इसके अलावा 503 मतदाता थर्ड जेंडर के भी है. यही मतदाता गुरुवार को 788 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. देखना है कि वोटर्स की पहली पसंद कौन बनता है. 


 

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