अहमदाबाद शहर के घाटलोडिया विधानसभा क्षेत्र को पाटीदार बहुल इलाके के तौर पर जाना जाता है. इस सीट पर करीबन 2.50 लाख वोटर है. 2012 में सरखेज विधानसभा सीट के डिलीमीटेशन के बाद घाटलोडिया सीट बनी, जहां पिछले दो बार से बीजेपी का दबदबा है और दोनों ही बार ये सीट सीएम सीट के तौर पर भी जानी गयी है.
घाटलोडिया सीट पर पाटीदार और रबारी दोनों जातियों का प्रभुत्व है. 2012 में आनंदीबेन पटेल यहां से चुनावी मैदान में उतरी थी. आनंदीबेन पटेल 1 लाख 54 हजार वोटों के साथ चुनाव जीती थीं. जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ कर प्रधानमंत्री बने तो आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया.
आनंदीबेन पटेल 2016 तक इस सीट से विधायक रही, लेकिन 2017 चुनाव से पहले आनंदीबेन पटेल को बतौर मुख्यमंत्री हटाया गया और आनंदीबेन पटेल को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बना दिया गया.
2017 के चुनाव से पहले जब गुजरात में पाटीदार आंदोलन हुआ तो पाटीदार आंदोलन का सब से ज्यादा असर इसी इलाके में देखने को मिला था, लेकिन यहां पर पाटीदार बीजेपी के विरोधी नहीं थे. यहीं वजह है की 2017 में आनंदीबेन पटेल के उत्तरप्रदेश के गवर्नर बनने के बाद आनंदीबेन के करीबी भूपेंद्र पटेल को यहां से टिकट दिया था. भूपेन्द्र पटेल यहां से 2017 में 1 लाख 75 हजार वोट के साथ चुनाव जीते थे.
घाटलोडिया सीट अहमदाबाद के शहरी इलाके की सीट है. इस सीट का सीमांकन ही कुछ इस तरह का है कि इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता नहीं हैं. इस सीट को लेकर माना जाता है की यह सीट बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है. माना जाता है कि बीजेपी यहां से जिसको टिकट दे देती है उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है.
इस सीट पर अब तक 2 विधानसभा चुनाव हुए हैं और दोनों ही बार यहां से बीजेपी उम्मीदवारों को ही जीत मिली है. इस सीट से भूपेंद्र पटेल ने पहली बार चुनाव लड़ा और वो जीत कर गुजरात के मुख्यमंत्री बने. भूपेन्द्र पटेल खुद पाटिदार समाज से आते हैं. 1982 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले भूपेन्द्र पटेल ने नगरपालिका चुनाव से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी.
2021 में जब बीजेपी ने विजय रुपानी को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तो अचानक ही भूपेन्द्र पटेल को मुख्यमंत्री बना दिया गया. भूपेन्द्र पटेल को गुजरात में दादा के नाम से जाना जाता और वो दादा भगवान के अनुयायी हैं.
इस सीट पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है, दरअसल 2012 के चुनाव में आनंदीबेन पटेल के सामने चुनाव लड़ने वाले रमेशभाई पटेल को 44 हजार वोट ही मिले थे, जब की आनंदीबेन पटेल को 1 लाख 54 हजार वोट मिले थे. (घाटलोडिया से गोपी घांघर की रिपोर्ट)
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गोपी घांघर