LIVE: गुजरात में अंतिम चरण की वोटिंग आज, मोदी-राहुल ने मतदाताओं से की ये अपील

गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 89 सीटों पर 9 दिसंबर को मतदान हो चुके हैं. बाकी बची 93 सीटों पर सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होंगे. इसके लिए 25,558 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इन 93 सीटों पर 851 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें 782 पुरुष और 69 महिला उम्मीदवार हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अंकुर कुमार

  • अहमदाबाद ,
  • 14 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 7:31 AM IST

गुजरात चुनाव का गुरुवार को आखिरी चरण है. 93 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. मध्य और उत्तर गुजरात की ज्यादातर सीटों पर विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की किस्मत तय होगी.

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- कुछ देर में ही शुरू होगा मतदान. पोलिंग बूथ पर तैयारियां पूरी.

पीएम मोदी ने की अधिक से अधिक वोटिंग की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर गुजरात की जनता से वोटिंग का रिकॉर्ड बनाने की अपील की है. पीएम ने लिखा कि लोकतंत्र के इस पर्व को मतदान करके समृद्ध बनाएं.

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राहुल ने कहा- गुजरात में नवसर्जन की शुरुआत

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर कहा कि गुजरात में नवसर्जन की शुरुआत हो चुकी है. एक-एक वोट लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ और सशक्त बनाएगा. राहुल ने जनता से अपील की है कि गुजरात के उज्जवल भविष्य के लिए वे अधिक से अधिक वोट करें.

93 सीटों पर 851 उम्मीदवार

गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 89 सीटों पर 9 दिसंबर को मतदान हो चुके हैं. बाकी बची 93 सीटों पर सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होंगे. इसके लिए 25,558 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इन 93 सीटों पर 851 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें 782 पुरुष और 69 महिला उम्मीदवार हैं. इस चरण में नितिन पटेल, मेहसाना से, राधनपुर के अल्पेश ठाकोर, वडगामा से जिग्नेश मेवाणी और दबोई से कांग्रेस सिद्धार्थ पटेल मैदान में हैं.

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इन जिलों में होंगे मतदान

मध्य गुजरात में अहमदाबाद, दाहोद, खेड़ा, आणंद, पंचमहल, वडोदरा, जिले आते हैं. जबकि उत्तर गुजरात में गांधीनगर, बनासकांठा, साबरकांठा, अरवली, मेहसाना, छोटा उदयपुर अलवल्ली और पाटन जिले आते हैं.

इंटरव्यू पर मचा बवाल

9 दिसंबर को राज्य में पहले चरण के मतदान में 89 सीटों के लिए 66.75 फीसदी मतदान हुआ जो 2012 की तुलना में 4.75 फीसदी कम रहा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अब दूसरे चरण के मतदान के लिए कमर कस ली है. गुजरात में दूसरे और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार अभियान का मंगलवार को आखिरी दिन था. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन दोनों ही दिग्‍गज पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी ने मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी जान लगा दी.  बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का गुजराती चैनल को दिया गया इंटरव्यू प्रसारित हुआ. इस पर भारतीय जनता पार्टी ने आपत्ति जताई है. गुजरात बीजेपी ने चुनाव आयोग में इंटरव्यू प्रसारित होने को आचार संहिता का उल्लंघन बताया है.

आपको बता दें कि राहुल गांधी का गुजराती चैनल को दिए इंटरव्यू में भारतीय जनता पार्टी पर जमकर हमला बोला था. इंटरव्यू में राहुल ने कहा कि गुजरात का चुनाव एक तरफा होने वाला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने मुझे गुजरात में ज्यादा कैंपेन करने को मना किया था लेकिन मुझे काम में इंट्रेस्ट है, रिजल्ट में नहीं. गीताजी में लिखा है- काम करो फल की चिंता मत करो. मैं उसी को मानता हूं.

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त्रिमूर्ति की असल परीक्षा

आंदोलन से सियासी राह पकड़ने वाले गुजरात के युवा त्रिमूर्ति की असल परीक्षा इस चरण में होगी. कांग्रेस का दामन थामने वाले ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर और उनके 7 समर्थकों को पार्टी ने मैदान में उतारा है. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी वडगाम सीट से निर्दलीय मैदान में हैं. कांग्रेस का उन्हें समर्थन हासिल है.

ये गुजरात चुनाव का आखिरी चरण है. इसमें मध्य गुजरात और उत्तर गुजरात के क्षेत्र शामिल हैं. कांग्रेस के समर्थन का ऐलान करने वाले गुजरात के युवा त्रिमूर्ति हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर के लिए ये चरण असल परीक्षा है. मध्य गुजरात में अहमदाबाद, दाहोद, खेड़ा, आणंद, पंचमहल, वडोदरा, जिले आते हैं. जबकि उत्तर गुजरात में गांधीनगर, बनासकांठा, साबरकांठा, अरवली, मेहसाना, छोटा उदयपुर अलवल्ली और पाटन जिले आते हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे दौर में मध्य गुजरात-उत्तर गुजरात बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए काफी अहम माना जाता है. दूसरे दौर की 93 सीटों में से 54 सीटें ग्रामीण क्षेत्र की हैं, तो वहीं 39 सीटें शहरी है. अहमदाबाद और वडोदरा सहित शहरी इलाकों में बीजेपी की अग्निपरिक्षा है. उत्तर गुजरात कांग्रेस का परंपरागत गढ़ है और ओबीसी बाहुल्य इलाका है. ऐसे में कांग्रेस को फिर अपना दम दिखाना होगा.

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आसान नहीं बीजेपी की राह

ये तय है कि बीजेपी को गुजरात के इस विधानसभा चुनाव में राज्य के पिछले कई विधानसभा चुनावों की तुलना में अधिक मेहनत करनी पड़ी है. इसकी दो बड़ी वजह हैं- एक तो 22 साल से राज्य की सत्ता में बीजेपी के होने की वजह से एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर और दूसरा राज्य में मुख्यमंत्री के लिए पार्टी की ओर से वैसा कोई मजबूत चेहरा नहीं होना जैसे कि राज्य में पिछले तीन विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी थे.

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