कांग्रेस के 600 यूनिट तक फ्री बिजली के वादे पर पावर एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल

पावर एक्सपर्ट सौरभ गांधी कहते हैं कि यह सरकार की मर्जी है कि वह कितनी यूनिटी फ्री देना चाहती है. लेकिन सरकार को यह पैसा बिजली कंपनियों को सब्सिडी ना देकर बल्कि बिजली कंपनियों पर दबाव बनाकर जनता को लाभ देना चाहिए.

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(प्रतीकात्मक तस्वीर) (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अंकित यादव

  • नई दिल्ली,
  • 27 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 4:50 AM IST

  • कांग्रेस के फ्री बिजली वाले वादे पर उठे अहम सवाल
  • पावर एक्सपर्ट्स ने कांग्रेस के वादे पर रखी अपनी राय

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के 200 यूनिट तक बिजली के तोहफे के बाद अब कांग्रेस ने अपनी सरकार आने पर 600 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा कर दी है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने जनसभा में इस तोहफे का ऐलान किया था. लेकिन बिजली मामलों के जानकार कांग्रेस की इस घोषणा पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

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जनता का ही पैसा बिजली कंपनियों को न दे सरकार

पावर एक्सपर्ट सौरभ गांधी कहते हैं कि यह सरकार की मर्जी है कि वह कितनी यूनिटी फ्री देना चाहती है. लेकिन सरकार को यह पैसा बिजली कंपनियों को सब्सिडी ना देकर बल्कि बिजली कंपनियों पर दबाव बनाकर जनता को लाभ देना चाहिए.

सौरभ गांधी ने कहा, "कंजूमर के तौर पर मैं फ्री बिजली का स्वागत करता हूं. मैं तो चाहूंगा मेरी पूरी बिजली फ्री हो जाए. लेकिन सवाल यह है कि आप फ्री कहां से दे रहे हैं. क्या आप जनता का ही पैसा बिजली कंपनियों के जेब में डाल रहे हैं. या फिर आप बिजली कंपनियों पर दबाव बनाकर उनके द्वारा जनता को फायदा देने की कोशिश कर रहे हैं".

आपको बता दें कि फिलहाल आम आदमी पार्टी 200 यूनिट तक दिल्ली की जनता को मुफ्त बिजली दे रही है तो वहीं 200 से 400 यूनिट तक बिजली के टैरिफ आधे दर पर हैं.

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नहीं बढ़ना चाहिए फिक्स चार्ज और टैरिफ

एक अन्य पावर एक्सपर्ट और मॉडल टाउन आरडब्लूए के अध्यक्ष संजय गुप्ता कहते हैं कि बिजली की छूट मिलना तो पब्लिक के लिए राहत की बात है. लेकिन चुनाव से पहले तीनों ही दिनों से मांग होनी चाहिए कि एफिडेविट दें कि चुनाव जीतने के बाद बिजली कंपनियों को टैरिफ नहीं बढ़ाने देंगे और साथ ही फिक्स चार्ज भी नहीं बढ़ना चाहिए.

संजय गुप्ता बोलते हैं, "चुनाव से पहले किए गए वादों पर ज्यादा यकीन तो नहीं है पर सवाल यह है कि चुनाव जीतने के बाद कहीं ऐसा तो नहीं है कि पावर टैरिफ बढ़ा दिया जाए या फिर फिक्स चार्ज जैसे खर्चों को बढ़ाकर पिछले दरवाजे से जनता पर बोझ डाल दिया जाए."

4000 करोड़ के पार हो सकता है आंकड़ा

दिल्ली में बिजली के तकरीबन 53 लाख कनेक्शन हैं . माना जा सकता है कि अगर 600 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी गई तो 35 से 40 लाख लोग इस दायरे में आ जाएंगे. अभी दिल्ली सरकार तकरीबन 22 सौ करोड़ रुपए की सब्सिडी बिजली कंपनियों को हर साल दे रही है. बिजली एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर सब्सिडी 600 यूनिट तक देनी है तो आंकड़ा 4000 करोड़ के पार हो जाएगा.

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आप की राहत, विपक्षी दलों के लिए बनी आफत

हालांकि दिल्ली कांग्रेस इस आंकड़े को नहीं मानती है. बीते दिनों सुभाष चोपड़ा ने वजीरपुर की रैली में कहा था कि मात्र 500 करोड़ रुपए अतिरिक्त लगाकर और बिजली कंपनियों पर दबाव बनाकर हम 600 यूनिट तक की राहत जनता को दे देंगे. बहरहाल केजरीवाल सरकार द्वारा बिजली में जनता को दी जा रही राहत से विपक्षी पार्टियों पर अपने घोषणापत्र में ऐसी ही छूट जारी रखने या इसे और बढ़ाने का दबाव बन गया है.

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