दिल्ली का चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी को देखना है कि क्या राष्ट्रवाद का मुद्दा राज्य में भुनाया जा सकता है. वहीं आम आदमी पार्टी को तय करना है कि उसके विकास का मुद्दा दिल्ली में चल पाया कि नहीं. वहीं RJD समेत कई अन्य पार्टी इसे युद्धाभ्यास के तौर पर देख रही है. चुनाव पूर्व सर्वे की बात करें तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है. ऐसे में सभी अपने-अपने आप को झोंक कर एक अदद प्रयास करने में जुटी हुई है.
आरजेडी के लिए दिल्ली चुनाव कितना महत्वपूर्ण है इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि महज चार सीटों के लिए पार्टी ने राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और तेज प्रताप यादव जैसे 36 स्टार प्रचारकों को चुनावी मैदान में उतारा है. पार्टी, इसे अक्टूबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर प्रचार के लिए उतरने वाली है.
बिहार की प्रमुख राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, पार्टी प्रमुख लालू यादव के चारा घोटाला मामले में जेल जाने के बाद से काफी सुस्त हो गई है. हालांकि बीच-बीच में लालू यादव के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप, जनसभा या विरोध प्रदर्शन के दौरान दिख तो जाते हैं लेकिन प्रमुखता के साथ सरकार का विरोध नहीं कर पा रहे हैं.
बैकफुट पर आरजेडी
यानी कि बिहार में नीतीश कुमार की एनडीए गठबंधन में वापसी के बाद से आरजेडी बहुत प्रभावी तरीके से जनता के बीच नहीं दिख रही है. इस बीच लालू परिवार के बीच भी कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई, जो पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ.
ऐसे में आरजेडी दिल्ली चुनाव के बहाने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में लिए गए बड़े फैसले के बाद लोगों के बीच जन्मे गुस्से को भांपने की फिराक में है. साथ ही अपनी पार्टी की ताकत को राष्ट्रीय मजबूती देने की कोशिश भी कर रही है.
बिहार चुनाव का सेमीफाइनल
दरअसल आरजेडी, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ये सीटें हैं- किराड़ी, बुराड़ी, उत्तम नगर और पालम. ये सभी वैसी सीटे हैं जहां पर बिहार के लोगों की आबादी सबसे अधिक है. ऐसे में आरजेडी देखना चाहती है कि अगर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा जाए तो परिणाम क्या होगा?
दिल्ली चुनाव तय करेगी बिहार की राजनीतिक दिशा
इस चुनाव के जरिए दरअसल आरजेडी यह रणनीति तय करेगी कि बिहार चुनाव में बीजेपी और नीतीश सरकार के खिलाफ कैसे हमलावर होना है. बता दें इन चार क्षेत्रों में बिहार की बहुत बड़ी आबादी रहती है. जो बिहार की राजनीति पर भी प्रभाव डालते हैं.
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अगर ऐसे में यहां आरजेडी का पत्ता चल पाया तो ठीक, नहीं तो कम से कम इसी बहाने कार्यकर्ताओं का एक युद्धाभ्यास हो जाएगा और पार्टी एक बार फिर से पटरी पर आकर सही दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर देगी.
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