मोती नगर विधानसभा सीटः AAP ने 2015 में तोड़ा BJP के लगातार 6 जीत का रिकॉर्ड

2015 में हुए विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो मोती नगर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के शिव चरण गोयल ने जीत हासिल की थी. उन्होंने चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार सुभाष सचदेवा को 15,221 मतों के अंतर से हराया था.

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AAP ने 2015 के चुनाव में तोड़ी बीजेपी की बादशाहत (फोटो-ट्विटर) AAP ने 2015 के चुनाव में तोड़ी बीजेपी की बादशाहत (फोटो-ट्विटर)

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

  • AAP के शिव चरण गोयल 2015 के चुनाव में जीते थे
  • 1993 में मदन लाल खुराना जीते, और मुख्यमंत्री बने

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से एक मोती नगर विधानसभा सीट भी है जो सेंट्रल दिल्ली जिले में पड़ती है. 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में 1,62,919 वोटर्स थे जिसमें से 92,424 पुरुष और 70,486 महिला वोटर्स शामिल थे. इनके अलावा 9 वोटर्स थर्ड जेंडर के भी थे. 1,62,919 में से 1,13,360 वोटर्स ने वोट डाले. जबकि नोटा के पक्ष में 471 वोट पड़े थे.

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2015 में हुए विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो इस विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (AAP) के शिव चरण गोयल ने जीत हासिल की थी. उन्होंने चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार सुभाष सचदेवा को 15,221 मतों के अंतर से हराया था.

मैदान में थे 6 उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव में शिव चरण गोयल 60,223 यानी 53.1% मत तो सुभाष सचदेवा को 45,002 यानी 39.7% मत हासिल हुए थे. तीसरे स्थान पर कांग्रेस के राज कुमार मागो रहे जिनके खात में महज 6,111 मत आए. मोती नगर सीट से कुल 6 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी.

यह विधासनभा सीट दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के संसदीय क्षेत्र के रूप में जानी जाती है. 1993 में इस सीट से जीत हासिल करने वाले मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री बने थे.

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1993 में जीते खुराना

1993 में दिल्ली को विधानसभा का दर्जा मिलने के बाद मदन लाल खुराना ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर मोती नगर विधानसभा से चुनाव लड़ा और यहां से 9,138 मतों के अंतर से जीत हासिल की. इसके बाद 1998 में बीजेपी के ही अविनाश साहनी विजयी रहे.

2003 के चुनाव में मदन लाल खुराना एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ते हैं और उन्होंने कांग्रेस की चर्चित युवा चेहरा अलका लांबा को हराते हुए अपनी दूसरी जीत दर्ज कराते हैं. हालांकि कुछ समय बाद खुराना ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

बीजेपी ने लगाया जीत का चौका

2004 में यहां पर कराए गए उपचुनाव में भी बीजेपी ने फिर जीत का परचम लहराया. बीजेपी के सुभाष सचदेवा ने जीत हासिल कर पार्टी की यहां से जीत का चौका लगा दिया.

2004 के उपचुनाव में जीत के बाद 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुभाष सचदेवा ने जीत हासिल की थी. हालांकि वह 2015 में लगातार जीत का चौका लगाने में नाकाम रहे क्योंकि उन्हें आम आदमी पार्टी के शिव चरण गोयल के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

बीजेपी के लिए यह एक तरह से सुरक्षित सीट रही है क्योंकि उसने 1993 से लेकर 2013 तक 6 बार हुए चुनाव में जीत हासिल की है, हालांकि 2015 के चुनाव में उसे आम आदमी पार्टी के हाथों मात मिली.

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पिछली बार (2015) के विजेता शिव चरण गोयल के बारे में बात की जाए तो पिछले चुनाव में उनकी ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ एक भी आपराधिक केस दर्ज नहीं था. 58 वर्षीय गोयल 12वीं पास हैं. उनके पास कुल 18,14,62,602 रुपये की संपत्ति है.

दिल्ली में 8 फरवरी मतदान होगा जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी.

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