Sikandra Election Result 2020 : HAM ने जीती सिकंदरा सीट, कांग्रेस की हुई हार

Sikandra Election Results, Sikandra Vidhan Sabha seat Counting 2020: जमुई जिले की सिकंदरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में ही क्षत्रिय कुंड ग्राम जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मस्थली है. यह विधानसभा सीट लखीसराय, शेखपुरा और नवादा जिले से सटी हुई है.

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Sikandra Election Results 2020: सिकंदरा में भगवान महावीर की जन्मस्थली है. (फोटो- पीटीआई) Sikandra Election Results 2020: सिकंदरा में भगवान महावीर की जन्मस्थली है. (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • जमुई,
  • 10 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:21 AM IST

सिकंदरा विधानसभा सीट पर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने शानदार एंट्री की है. इस सीट पर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रफुल्ल कुमार मांझी ने कांग्रेस के सुधीर कुमार को 5505 वोटों से मात दी है. 

इस सीट पर हम के प्रफुल्ल कुमार मांझी को 47061 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के सुधीर कुमार को 41556 वोट मिले हैं. सिकंदरा विधानसभा सीट पर पहले चरण में मतदान हुआ था. इस दौरान 52.82 फीसदी लोगों ने वोट डाले थे.

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जमुई जिले की सिकंदरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में ही क्षत्रिय कुंड ग्राम जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मस्थली है. यह विधानसभा सीट लखीसराय, शेखपुरा और नवादा जिले से सटी हुई है. खास बात है कि यह बिहार के अंतिम छोर पर स्थित विधानसभा क्षेत्र है, इससे सटा झारखंड का गिरिडीह है. 

कौन- कौन थे मैदान में?

लोक जनशक्ति पार्टी- रविशंकर पासवान
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा- प्रफुल्ल कुमार मांझी
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी- नंदलाल रविदास
कांग्रेस- सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी

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कब हुआ चुनाव? 
पहला चरण – 28 अक्टूबर, 2020
नतीजा – 10 नवंबर, 2020

सिकंदरा सीट का राजनीतिक इतिहास
इस सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ था. तब कांग्रेस के मुश्ताक अहमद शाह पहले विधायक बने थे. इसके बाद सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. 1967 में एसएसपी के एस. विवेकानंद जीते. इसके बाद 1969 और 1972 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रामेश्वर पासवन विधानसभा पहुंचे. 1977 में जेएनपी के टिकट पर नगीना चौधरी जीतने में कामयाब हुए. 1980 में रामेश्वर पासवन ने वापसी की और बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जीते. फिर 1985 में वह कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीते. 1990 में सीपीआई के प्रयाग पासवान ने रामेश्वर पासवान से सीट छीन ली.

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1995 के चुनाव में प्रयाग पासवान सीपीआई के टिकट पर तो 2000 के चुनाव में केएसपी के टिकट पर जीते. इसके बाद 2005-फरवरी में रामेश्वर पासवान एलजेपी तो 2005-अक्टूबर और 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीते. 2015 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई और सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी जीतने में कामयाब हुए.

सामाजिक तानाबाना
यह अनुसूचित जाति बाहुल्य सीट है. इस विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर अभी तक 287732 लोगों  मतदाता सूची में दर्ज हैं. इसमें 151533 पुरुष मतदाता जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 136194 है.  भगवान महावीर की जन्मस्थली होने के कारण इस इलाके का धार्मिक महत्व भी है. यहां साल भर जैन तीर्थयात्री, महावीर की आराधना करने पहुंचते हैं. 

2015 के चुनावी नतीजे
2015 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी ने एलजेपी प्रत्याशी सुभाष कुमार चंद्र बोस को करीब 8 हजार वोटों से शिकस्त दी थी. सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी को 59092 वोट मिले थे, जबकि सुभाष चंद्र बोस को 51102 वोट मिले थे.

 

 

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