पूर्व IAS वीके पांडियन कौन हैं जिन्हें लेकर नवीन पटनायक को ओडिशा का विपक्ष घेर रहा है?

ओडिशा चुनाव में वीके पांडियन सेंटर पॉइंट बन गए हैं. पूर्व आईएएस वीके पांडियन को लेकर विपक्ष मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को घेर रहा है. वीके पांडियन कौन हैं?

Advertisement
वीके पांडियन (फाइल फोटोः पीटीआई) वीके पांडियन (फाइल फोटोः पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2024,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

लोकसभा के साथ ही ओडिशा विधानसभा के चुनाव भी हो रहे हैं. अंतिम चरण के मतदान से पहले ओडिशा की लड़ाई अब नवीन पटनायक के स्वास्थ्य और हिलते हाथ पर आ गई है. नवीन पटनायक की एक रैली की वीडियो क्लिप वायरल हो रही है जिसमें पूर्व आईएएस अधिकारी और बीजू जनता दल (बीजेडी) नेता वी कार्तिकेयन पांडियन ओडिशा सीएम का हाथ पोडियम पर अंदर की तरफ करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष वीके पांडियन पर हमलावर है और पूर्व आईएएस को लेकर नवीन पटनायक को घेर रहा है. ओडिशा चुनाव के बीच सरकार पर विपक्ष के हमलों का सेंटर पॉइंट बने वीके पांडियन कौन हैं?

Advertisement

आईएएस अधिकारी रहे हैं तमिलनाडु में जन्मे पांडियन

तमिलनाडु में जन्मे पूर्व आईएएस अधिकारी वीके पांडियन कृषि में ग्रेजुएट और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएट हैं. पूर्व आईएएस वीके पांडियन की गिनती सेवाकाल में भी मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबियों में होती थी. 2000 बैच के कैडर के आईएएस थे और उन्हें पहली पोस्टिंग 2002 में कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ में बतौर सब कलेक्टर मिली थी.

वीके पांडियन और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक

साल 2005 में उनको मयूरभंज जिले में बतौर डीएम पोस्टिंग मिली. वीके पांडियन के नवीन पटनायक की गुडबुक में आने की शुरुआत हुई 2007 में, जब उन्हें गंजाम का डीएम बनाया गया. गंजाम नवीन पटनायक का गृह जिला है और यहां तैनाती के दौरान पांडियन अपनी कार्यशैली से सीएम की गुडबुक में आ गए. धीरे-धीरे पांडियन की गिनती नवीन पटनायक के विश्वासपात्र नौकरशाह के रूप में होने लगी.

Advertisement

2011 से वीआरएस तक सीएम दफ्तर में रहे तैनात

वीके पांडियन को साल 2011 में सीएम ऑफिस में तैनाती मिल गई. वीके पांडियन को सीएम का निजी सचिव बना दिया गया और वह लंबे समय तक इस पद पर बने रहे. 2019 में जीत के बाद ने ओडिशा में जब लगातार पांचवी बार सरकार बनाई, उन्होंने 5टी योजना लॉन्च की और वीके पांडियन को इसका सचिव बना दिया गया. 5टी का सचिव बनाए जाने के बाद एक्टिव मोड में आए पांडियन ने ओडिशा के अलग-अलग इलाकों के दौरे किए और लगभग दो सौ बैठकें कर जनता की समस्याएं सुनीं.

वीके पांडियन और नवीन पटनायक (फाइल फोटो)

अपने इन दौरों के लिए पांडियन ने हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया और इसे लेकर के भी वह विपक्ष के निशाने पर रहे. वीके पांडियन ने पिछले साल यानि 2023 में वीआरएस ले लिया था. पांडियन के वीआरएस के लिए आवेदन करने के साथ ही उनके सियासत में आने की चर्चा हर ओर होने लगी थी. हुआ भी ऐसा ही. वीके पांडियन वीआरएस लेने के बाद बीजेडी में शामिल हो गए थे. 

यह भी पढ़ें:

पांडियन विपक्ष के निशाने पर क्यों?

आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेकर सियासत में आए वीके पांडियन इस चुनाव में बीजेडी के मुख्य कैंपेनर और चुनाव रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं. पांडियन के चुनाव लड़ने के भी कयास थे लेकिन वह खुद मैदान में नहीं उतरे लेकिन मुख्य कैंपेनर, चुनाव रणनीतिकार की भूमिका की वजह से विपक्ष के निशाने पर हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें:

विपक्षी पार्टियां इस बार नवीन पटनायक की जगह उनके आसपास के लोगों को निशाने पर लेने की रणनीति के साथ चल रही हैं. पांडियन बीजेडी के कैंपेन में भी लीड रोल में नजर आ रहे हैं और नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी की इमेज की वजह से भी वह विपक्ष के लिए मुख्य टारगेट बन गए हैं. विपक्षी पार्टियां इन चुनावों में ओडिशा के ओड़िया सीएम, ओड़िया अस्मिता को मुद्दा बनाते हुए वीके पांडियन को सुपर सीएम बता निशाना साध रही हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement