लोध बनाम कुर्मी... यूपी में बीजेपी के गले की फांस बनती जा रही कास्ट पॉलिटिक्स!

उत्तर प्रदेश में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और बीजेपी विधायक बृजभूषण सिंह राजपूत की लड़ाई कुर्मी बनाम लोध में तब्दील होती जा रही है. ऐसे ही कास्ट पॉलिटिक्स की सियासी माहौल बना रहा तो बीजेपी के लिए सत्ता की हैट्रिक लगाना आसान नहीं होगा. बीजेपी के लिए सियासी टेंशन बढ़ गई है?

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बृजभूषण राजपूत और स्वतंत्र देव सिंह की लड़ाई लोध बनाम कुर्मी बनी (Photo-ITG) बृजभूषण राजपूत और स्वतंत्र देव सिंह की लड़ाई लोध बनाम कुर्मी बनी (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे कास्ट पॉलिटिक्स की सियासी तपिश बढ़ती जा रही है. सूबे की राजधानी लखनऊ में रविवार को लोधी समाज का सम्मेलन हुआ, जिसमें लोधी जाति से ताल्लुक रखने वाले सांसद, विधायक और मंत्री सहित तमाम नेताओं ने शिरकत की. इस सम्मेलन के जरिए बीजेपी के भीतर जातिगत संतुलन को लेकर लोधी समाज ने बड़ा संदेश दिया है.

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लोधी समुदाय का सम्मेलन ऐसे समय हुआ है, जब बीजेपी के विधायक बृजभूषण राजपूत बनाम योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच सियासी टकराव की चर्चा तेज है. लोधी समाज से बृजभूषण राजपूत हैं तो कुर्मी समाज से स्वतंत्र देव सिंह हैं. 

यूपी की राजनीति में कुर्मी और लोध दोनों बीजेपी के वोटबैंक माने जाते हैं. लोध समाज कल्याण सिंह के दौर से बीजेपी का कोर वोटबैंक बना हुआ है तो कुर्मी समाज बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग नया कर्णधार बना है. ऐसे में कुर्मी बनाम लोध की पॉलिटिक्स बीजेपी के लिए सियासी टेंशन बनता जा रहा है.

स्वतंत्र देव सिंह बनाम बृजभूषण राजपूत
योगी सरकार के पावरफुल माने जाने वाले जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह 30 जनवरी को महोबा में एक कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे थे, लेकिन रास्ते में चरखारी से बीजेपी विधायक बृजभूषण सिंह करीब 50 से ज्यादा ग्राम प्रधानों के साथ उनका रास्ता रोक लिया. इस दौरान विधायक ने मंत्री पर जल जीवन मिशन के काम पूरे नहीं होने आरोप लगाया. इसे लेकर समर्थकों एवं सीओ सिटी के बीच झड़प की घटना घटी थी.

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विधायक ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह पर नल कनेक्शन नहीं मिलने, पाइप लाइन लीकेज होने, टंकी टूटने और टंकी नहीं बनने से जनता की परेशानी की बात को लेकर आरोप लगाए थे. इस दौरान मंत्री और विधायक के बीच जमकर नोक-झोंक हुई. बृजभूषण राजपूत और मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए. इसे लेकर सियासत गरमा गई है.

यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बृजभूषण राजपूत को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा. पार्टी ने साफ किया कि यह आचरण अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इसी बीच ब्रजभूषण राजपूत के बचाव में उनके पिता और पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत सामने आए और अपने बेटे को निर्दोष बताया. 

गंगा चरण राजपूत ने लिखा, ‘मेरा बेटा निर्दोष है. वह बुंदेलखंड के लिए जीता है, उसकी रग-रग में बुंदेलखंड बसा है. बुंदेलखंड की समस्याओं के लिए वह कई बार जेल गया, लाठियां खाईं और अपना खून तक बहाया. पानी की समस्या को लेकर उसने मंत्री से बात की, लेकिन अब इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है.’
  
लोधी समुदाय की लखनऊ में बैठक

बृजभूषण राजपूत को नोटिस दिए जाने के बाद राजधानी लखनऊ में रविवार को लोधी समाज का सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और मंत्री धर्मपाल सिंह जैसे लोधी समाज के नेताओं की मौजूदगी ने सियासी चर्चा को और भी बढ़ा दिया.  विधायक और मंत्री में टकराव के बाद लोधी सम्मेलन को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो बीजेपी के लिए सियासी टेंशन बन सकती है. 

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लोधी समुदाय की यह पहली बैठक नहीं है, उससे पहले वीरांगना अवंतीबाई लोधी की जयंती पर लोध समाज अपनी शक्ति दिखा चुका है. इसे पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र आंवला में बुलाई थी. बैठक में लोध समाज से आने वाले नेताओं को बड़ी संख्या में आमंत्रित किया गया. लोध समाज राज्य सरकार और संगठन में बड़ी हिस्सेदारी की चाह है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोध समुदाय जिस तरह से बैठक की है और उसमें बीजेपी के दिग्गज नेता पहुंचे हैं, उसे पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. 

कुर्मी बनाम लोधी अब बीजेपी के टेंशन
बृजभूषण राजपूत और स्वतंत्र देव सिंह का मामला पूरी तरह से कुर्मी बनाम लोधी समाज का रंग ले चुका है, जिससे भाजपा की चिंता बढ़ गई है. दोनों ही जातियों की नाराजगी ने बीजेपी के लिए सियासी समीकरण को बिगाड़ सकता है. धर्मपाल सिंह ने खुद बृजभूषण राजपूत को फोन किया था और पूरी घटना की जानकारी ली.

लोध समाज को बीजेपी का बड़ा वोट बैंक माना जाता है. समाज के नेता पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह एवं केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन बीजेपी ने कुर्मी समाज के पंकज चौधरी को अध्यक्ष बना दिया. लोध समाज के नेता को अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से समाज के नेता पहले से ही नाराज हैं और बृजभूषण राजपूत का विवाद बीजेपी की चिंता बढ़ा सकता है. 

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लोध और कुर्मी वोट बीजेपी की मजबूरी
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का जातीय समीकरण पहले ही गड़बड़ा चुका है. बीजेपी ने कुर्मी जाति से आने वाले पकंज चौधरी को बनाकर सियासी बैलेंस बनाने की कवायद की थी, लेकिन अब मामला लोध समुदाय का आ गया है. सूबे में यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि समय-समय पर अलग-अलग समाज की नाराजगी का नुकसान पार्टी को झेलना पड़ रहा.ऐसे में लोध बनाम कुर्मी की लड़ाई ने उसके 2027 की राह को काफी मुश्किल बना रहा.

कुर्मी समुदाय जातिगत आधार पर देखें तो यादव के बाद ओबीसी में सबसे बड़ी कुर्मी समुदाय की है. सूबे के 16 जिलों में कुर्मी और पटेल वोट बैंक 10 से 15 फीसदी तक है. इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और बस्ती जिले प्रमुख हैं.

वहीं, लोध समुदाय ओबीसी में एक और बड़ा वोट बैंक लोध जाति का है, जो नब्बे के दशक से बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है.यूपी के कई जिलों में लोध वोटरों का दबदबा है,जिनमें रामपुर, ज्योतिबा फुले नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, पीलीभीत, लखीमपुर, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा ऐसे जिले हैं, जहां लोध वोट बैंक पांच से 10 फीसदी तक है.

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यूपी में कल्याण सिंह के दौर से बीजेपी के साथ लोध वोटर जुड़ा हुआ है जबकि कुर्मी वोटर 2014 में बीजेपी के सियासी आधार को मजबूत किया है, लेकिन 2024 के चुनाव में खिसक गया है. 2024 में कुर्मी समुदाय ने सपा को बड़ी संख्या में वोट किए हैं तो लोध वोटर में भी सेंधमारी हुई है. ऐसे में कुर्मी बनाम लोध के चल रहे सियासी विवाद बीजेपी के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे इससे पार पाती है? 

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