असम में चुनाव से पहले पंचायत आजतक का आगाज हो गया है. इस कार्यक्रम में असम के राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों और चुनावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. इस दौरान खास सेशन 'कानून के पहरेदार' में लॉ एंड ऑर्डर जैसे जरूरी मुद्दे पर भी बात हुई.
सेशन के लिए मंच पर असम के डीजीपी हरमीत सिंह और असम के एडवोकेट जनरल देवाजीत सैकिया मौजूद रहे. दोनों ने असम में कानून व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए साथ ही अपने विचार भी सामने रखे.
असम पुलिस में आए बदलावों को लेकर पूछे गए सवालों पर हरमीत सिंह (डीजीपी असम) ने कहा कि पुलिस अब नागरिकों को केंद्र में रखकर काम कर रही है. नागरिकों के लिए सबसे जरूरी है कि क्या वह सुरक्षित महसूस करते हैं या नहीं? पुलिस इसको ध्यान में रखकर काम कर रही है. इसीलिए हमारा क्राइम रेट कम हुआ है. पेंडिग केस में भी 90 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. कन्विक्शन रेट में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.
असम पुलिस में आए हैं बदलाव
माइंडसेट, टेक्नोलॉजी और इंन्फ्रास्ट्क्चर में बदलाव हुए हैं और असम पुलिस में इसी तरह से बदलाव आए हैं. डीजीपी हरमीत सिंह ने कहा कि असम पुलिस ने पिछले दो दशकों में बड़ा परिवर्तन देखा है. पहले पुलिस बल का बड़ा हिस्सा उग्रवाद से निपटने में लगा रहता था, लेकिन अब पुलिस का स्वरूप नागरिकों को बेहतर सेवा देने वाली “सिटीजन सेंट्रिक” व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि साल 2000 में असम में उग्रवाद और हिंसा से जुड़े मामलों में 492 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पिछले कई वर्षों में ऐसी घटनाओं में भारी कमी आई है. अधिकांश उग्रवादी संगठन मुख्यधारा में लौट चुके हैं.
अपराध के आंकड़ों में सुधार दर्ज
अपराध के आंकड़ों में भी सुधार दर्ज हुआ है. 2021 में प्रति लाख आबादी पर अपराध दर 379 थी, जो अब घटकर लगभग 101.9 रह गई है और यह राष्ट्रीय औसत से भी कम है. चार्जशीट दाखिल करने की दर भी 39.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है. लंबित जांच मामलों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है और अब यह लगभग 11 हजार तक सिमट गई है. कन्विक्शन रेट में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो पहले करीब 6.1 प्रतिशत था और अब लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
एडवोकेट जनरल देवाजीत सैकिया ने कहा कि पहले राज्य में अभियोजन प्रणाली में कई कमियां थीं. पुलिस जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का उपयोग कम होता था और अभियोजन पक्ष को पर्याप्त संसाधन नहीं मिलते थे. इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने अभियोजन तंत्र को मजबूत किया है. इसके तहत नए अभियोजकों की भर्ती, स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति और पुलिस व अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय की व्यवस्था की गई है.
डीजीपी ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगभग 3910 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसके अलावा ड्रग्स के खिलाफ अभियान में भी असम पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है. पिछले पांच वर्षों में 15 हजार से अधिक ड्रग्स से जुड़े मामले दर्ज किए गए और 24 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. बेहतर कानून-व्यवस्था का सीधा असर राज्य के विकास पर भी दिखाई दे रहा है और शांति का माहौल निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है.
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