जानें, लेफ्टी किन वजहों से होते हैं खास....

हमारे आस-पास रहने वालों में वैसे लोगों की तादाद हमेशा अधिक होती है जो राइट हैंड का इस्तेमाल करते हैं, मगर क्या आप जानते हैं कि वो कौन सी बातें हैं जो लेफ्ट हैंड इस्तेमाल करने वालों को आम से खास बनाती हैं...

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रीता चौधरी

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

हमारी दुनिया में वैसे तो राइट हैंड (दांए हाथ) से काम करने वालों की बहुतायत है. यहां तक कि राइट को सही और लेफ्ट को गलत के अर्थ में भी लिया जाता है. बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि हम राइट हैंड से खाना खाएं उसी हाथ से लिखने की कोशि‍श भी करें. लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वालों का संख्या भी अपेक्षाकृत कम है. दुनिया के 90 प्रतिशत लोग राइट हैंड से ही लिखते हैं. दुनिया के केवल 10 फीसदी लोग लेफ्टी हैं. इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वाले किसी भी तरह से कमतर होते हैं. हालांकि ऐसी आम मान्यता है कि लेफ्ट हैंड से काम करने वाले असामान्य और कमजोर होते है.

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शायद यही वजह है कि पेरेंट्स लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स के साथ कई बार रोक-टोक तो कई बार सख्ती भी बरतते हैं. इस बात का दूसरा पहलू भी है. इस बीच कुछ ऐसे रिसर्च और फैक्ट हमारे सामने आए हैं जो पुरानी अवधारणाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर देती हैं. ये रिसर्च इस बात की ताकीद करती हैं कि लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वाले लोग ज्यादा प्रतिभावान होते हैं. कई दिग्गज भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. जैसे- महात्मा गांधी, बराक ओबामा, अमिताभ बच्चन, बिल गेट्स, रतन टाटा, सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, निकोल किडमैन, एंजेलीना जॉली, करण जौहर. लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि इन लेफ्टी सेलिब्रिटीज को भी कई बार कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

तो आइए जानते है लेफ्ट हैंड से जुड़ी कुछ खूबियों और समस्याओं के बारे में...

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  • क्रिकेट से लेकर तमाम दूसरे खेलों में लेफ्टी होने के अपने फायदे हैं. लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वाले लोग बॉ‌‌क्सिंग, टेनिस जैसे खेलों में ज्यादा अच्छे होते हैं. अब सिंधू को हरा कर रियो ओलंपिक 2016 में गोल्ड मेडल जीतने वाला मरीन को ही देख लें.  
  • लेफ्ट हैंडेड लोगों का आईक्यू लेवल अधिक होता है. न्यूयॉर्क की सेंट लॉरेंस यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक दायें हाथ के लोगों के मुकाबले बायें हाथ वालों का आईक्यू लेवल 140 से अधिक होता है.
  • लेफ्ट हैंड से काम करने वाले लोग संवेदनशील होते हैं.
  • जो लोग हमेशा ही लेफ्ट हैंड को उपयोग में लाते हैं उनके हाथों में होती है.
  • लेफ्टी शख्स राइटी शख्स की तुलना में स्ट्रोक जैसी समस्या से जल्दी उबरने की क्षमता रखते हैं.
  • वे तेजी से बदलती आवाजों को ज्यादा आसानी से सुन सकते हैं.
  • लेफ्टी पैसा कमाने और खर्च करने के मामले में भी राइट हैडेंड लोगों से आगे रहते हैं.

ऐसा नहीं है कि लेफ्ट हैंड वालों की दुनिया में सब-कुछ अच्छा ही है. वे रोजमर्रा की जिंदगी में कई समस्याओं से भी रूबरू होते हैं. आखिर क्या हैं उनकी समस्याएं...

  • स्कूल में बनी बेंच-चेयरों पर लिखना मुश्किल होता है क्योंकि ये लोगों के हिसाब से बनाये गये होते है.
  • स्पाइरल बाउंड कॉपियों पर लिखना काफी मुशकिल होता है.
  • कैंची चलाना मुश्किल भरा होता है.
  • आमतौर पर ऑफिस में कंप्यूटर का माउस राइट साइड पर ही होता है और लेफ्ट हैंडेड लोगों को इसे हर बार अपने हिसाब से लेफ्ट की ओर करना पड़ता है.
  • लेफ्ट हेडेंड लोगों के लिए गिटार बजाना आसान नहीं होता.
  • लेफ्ट हेडेंड लोग किसी और इंसान से हाथ मिलाने से पहले सोच में पड़ जाते है और कई बार तो आदतन लेफ्ट हेंड ही आगे बढ़ा देते हैं.    
  • शॉर्टहैंड जैसे लिपियों को लिखने में परेशानी होती है.
  • या आईपैड पर टाइप करना आसान नहीं होता.
  • टिन ओपनर इस्तेमाल करना भी मुश्किल लगता है.
  • क्रेडिट कार्ड और स्वाइप मशीने लेफ्ट हैंडेड लोगों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई हैं.
  • इंक पेन से लिखना मुश्किल होता है.
  • परीक्षा देते हुए या कभी साथ बैठकर लिखते हुए बगल वाले से हाथ टकराने की समस्या भी आम है.
  • लोगों द्वारा हमेशा आश्चर्य से पूछना कि अरे तुम लेफ्टी हो, आपको अलग सा महसूस करवाता है.
  • किसी के साथ अगल-बगल बैठकर खाना खाते हुए बगल वाले से हाथ टकराने की समस्या आपको और साथ वाले को परेशान करती है.

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