PM मोदी के नजरिए से क्या है पुरानी और नई एजुकेशन पॉलिसी में फर्क

नई श‍िक्षा नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Conclave on Transformational Reforms in Higher Education में आज अपने विचार रख रहे थे. उन्होंने यहां नई और पुरानी एजुकेशन पॉलिसी के बीच अंतर को कुछ यूं स्पष्ट किया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

नई श‍िक्षा नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ‘Conclave on Transformational Reforms in Higher Education under National Education Policy’ में संबोधन दिया. यहां उन्होंने पुरानी शि‍क्षा नीति के बारे में कहा कि वो पॉलिसी व्हाट टू थ‍िंक पर फोकस थी, अब जो नई श‍िक्षा नीति बनी है वो हाउ टू थ‍िंक के बेस पर बनी है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की नींव तैयार करने वाली है. बीते अनेक वर्षों से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें What to Think पर फोकस रहा है.

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जबकि इस शिक्षा नीति में How to think पर बल दिया जा रहा है. ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि आज जिस दौर में हम हैं, वहां इन्फॉर्मेशन और कंटेंट की कोई कमी नहीं है. पीएम मोदी ने कहा कि अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए इनक्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए. इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनका पार्टिसिपेशन भी बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि पॉलिसी को लेकर जितनी ज्यादा जानकारी स्पष्ट होगी फिर उतनी ही आसान इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना भी होगा. पीएम मोदी ने कहा कि 3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद, लाखों सुझावों पर लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया है.

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नई शिक्षा नीति पर बोले PM मोदी- ये सिर्फ सर्कुलर नहीं, नया भारत तैयार करने की नींव

National Education Policy- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में आज का ये इवेंट बहुत महत्वपूर्ण है. इस कॉन्क्लेव से भारत के श‍िक्षा जगत को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी.

कॉनक्लेव में पीएम मोदी ने कहा कि आज देश भर में न्यू एजुकेशन पॉलिसी की व्यापक चर्चा हो रही है. अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग अपने विचार दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ये एक स्वस्थ परंपरा है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा. ये भी खुशी की बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का भेदभाव है, या किसी एक ओर झुकी हुई है.

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पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रीफॉर्म कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा. यानी अब सबकी निगाहें इसे लागू करने की तरफ है. जहां तक राजनीतिक इच्छाशक्त‍ि की बात है, मैं पूरी तरह कमिटेड हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं.

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अपनी मातृभाषा में पढ़ाई को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. यह एक बहुत बड़ी वजह है, इसलिए जहां तक संभव हो पांचवीं कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है .

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