16 दिसंबर 2012: जब पार हुई थी हैवानियत की हद, पढ़ें- निर्भया केस की पूरी कहानी

16 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली में ऐसा अनर्थ हुआ कि पूरा देश महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़क पर आ गया. आज निर्भया केस को 7 साल पूरे हो चुके हैं और भी देश का हर व्यक्ति दोषियों की फांसी का इंतजार कर रहा है. जानें- उस रात की पूरी घटना के बारे में.

निर्भया कांड के दोषी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

  • निर्भया कांड के 7 साल, जानिए अब तक की पूरी कहानी
  • 29 दिसंबर 2012 को निर्भया ने ली थी आखिरी सांस

निर्भया केस को आज 7 साल बीत चुके हैं और अभी भी पूरे देश को दोषी मुकेश, विनय और अक्षय और पवन की फांसी का इंतजार है. आज ही का वो दिन था जब दिल्ली के मुनिरका में निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी. उस दिन पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त के साथ साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी मॉल में 'लाइफ ऑफ पाई' मूवी देखने गई थी. जिसके बाद घर के लिए उन्होंने ऑटो लिया.

शायद दोनों को इस बात अंजादा नहीं था कि  बुरा लम्हा उनका इंतजार कर रहा है. 16 दिसंबर की उस रात को काफी ठंड थी. जब निर्भया और उनके दोस्त ऑटो में सवार थे. उस समय रात के करीब 8 बज रहे थे. निर्भया के दोस्त ने aajtak को बताया था कि हमने पहले घर के लिए डायरेक्ट ऑटो से जाने का फैसला किया था, लेकिन ऑटो वाले माने नहीं. उन्होंने कहा इतनी दूर तक सवारी नहीं बैठाते,  हमारे घर जाने का समय होता है.

जिसके बाद हमने ऑटो से कहा कि आप मुनिरका तक छोड़ देना. क्योंकि रात काफी हो चुकी थी. ऐसे में हमने फैसला किया कि मुनिरका से घर के लिए दूसरा साधन देख लेंगे. दोनों मुनिरका के बस स्टैंड उतरे. उस समय रात के करीब 8:30 बज रहे थे.

दोस्त ने बताया जब मैं और निर्भया बस स्टैंड पर उतरे थे तो एक सफेद रंग की बस पहले से वहां खड़ी थी. जिसमें एक लड़का  बार-बार कह रहा था चलो कहां जाना है. दोस्त ने बताया कि बस में 6 लोग मौजूद थे और ऐसे दिखावा कर रहे थे जैसे काफी सवारी आने वाली हैं.

एक छोटा लड़का पालम मोड और द्वारका के लिए आवाज लगा रहा था. ऐसे में एक लड़का बार-बार मेरी दोस्त निर्भया को बोल रहा था " दीदी चलो, कहां जाना है, हम छोड़ देंगे". जिसके बाद हम दोनों बस में बैठ गए.

किसी ने नहीं सोचा कि बस की सवारी जानलेवा साबित होगी. जब बस थोड़ी देर आगे चली जब मुझे शक था कि कुछ सही नहीं चल रहा है. उन्होंने मुझसे किराया मांगा तो मैंने 20 रुपये दे दिए थे. दोस्त ने बताया जैसे ही बस थोड़ी और आगे चली तो दोषियों ने बस का गेट बंद कर दिया और 3 लोग सीट पर आए और मेरे चेहरे पर घूंसा मारा. जिसके बाद निर्भया ने फोन ट्राई किया, लेकिन दोषियों ने फोन छीन लिया.

उन्होंने मारने के लिए तीन रॉड का इस्तेमाल किया. कोई सिर पर मार रहा था, कोई पीठ पर तो कोई हाथों पर. जिसके बाद मेरे पैरों पर रॉड से खूब मारा. जैसे ही मैं गिरा, दोषी मेरे ऊपर से निर्भया को खींच कर पीछे ले गए. जहां उसके साथ रेप किया.

उस समय मैंने कांच तोड़ने की कोशिश की, लेकिन बस का कांच इतना मजबूत था कि हाथ से नहीं टूट सकता था. इसी दौरान दो से तीन लोग मुझे लगातार मार रहे थे. वहीं पिछली सीट में निर्भया के साथ दोषी इंसानियत की हद पार कर रहे थे. दोस्त ने बताया दोषी आपस में बातचीत करते हुए कह रहे थे कि 'मर गई है लड़की अब इन्हें फेंक देते हैं.' यहां तक उनकी मंशा थी कि हम पर बस चढ़ा दें, ताकि हम दोनों मर जाएं और किसी को पता न चले कि आखिर 16 दिसंबर की रात क्या हुआ था.

दोषियों ने दोस्त और निर्भया को झाड़ में फेंक दिया. जिसके बाद उनपर बस चढ़ाने की कोशिश भी की. लेकिन मैंने अपने दोस्त को दूसरी ओर मोड़ लिया. जिस वजह से बस हमारे ऊपर नहीं चढ़ पाई. बता दें, जिस जगह पर दोनों को फेंका गया था वह दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाका था.

निर्भया के दोस्त ने बताया था कि जिस रोड पर हमें फेंका गया था वहां लगातार गाड़ियां, ऑटो वाले आ रहे थे. मैं हाथ हिलाकर मदद मांगने की कोशिश कर रहा था. कुछ गाड़ियां आई भीं, लेकिन वो गाड़ी का शीशा नीचे करते थे, हमें देखते और चले जाते थे. ऐसे में एक बाइक वाले ने हमें देखा और उसने सबसे पहले अपने ऑफिस में कॉल किया. जिसके बाद वहां से गाड़ी आई और पुलिस भी आई. फिर हमें हॉस्पिटल ले जाया गया.

निर्भया ने सिंगापुर में ली आखिरी सांस

इस घटना के बाद देशभर में आंदोलन की आग फैल गई. पूरा देश बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड की मांग करने लगा. संसद में इसे लेकर जमकर हंगाम हुआ. इस बीच पीड़ित लड़की की हालत नाजुक होती जा रही थी. उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. सड़कों और सोशल मीडिया से उठी आवाज संसद के रास्ते सड़कों पर पहले से कहीं अधिक बुलंद होती नजर आ रही थी. दिल्ली के साथ-साथ देश में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे थे.

दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि वो पीड़ित लड़की को देखने जा सकें. हालांकि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सफदरजंग अस्पताल जाकर पीड़ित लड़की का हालचाल जाना था. निर्भया की हालत संभल नहीं रही थी. लिहाजा उसे सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 29 दिसंबर को निर्भया ने रात के करीब सवा दो बजे वहां दम तोड़ दिया था.

एक आरोपी ने तिहाड़ जेल में की आत्महत्या

मामला कोर्ट में चल रहा था. पुलिस ने मामले में 80 लोगों को गवाह बनाया था. सुनवाई हो रही थी. मगर इसी बीच 11 मार्च, 2013 को आरोपी बस चालक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली. हालांकि राम सिंह के परिवार वालों और उसके वकील का मानना है कि जेल में उसकी हत्या की गई थी.

बता दें,  18 दिसंबर 2012 को  घटना के दो दिन बाद दिल्ली पुलिस ने छह में से चार आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया. वहीं 21 दिसंबर 2012- दिल्ली पुलिस ने पांचवां आरोपी जो नबालिग था उसे दिल्ली से और छठे आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार किया था.

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