नेशनल साइंस डे: जानिये विकलांगों के लिए कितना बदला साइंस

आज 28 फरवरी को 'नेशनल साइंस डे' मनाया जाता है. आज के दिन क्यों मनाया जाता है साइंस डे और विकलांगों के लिए साइंस और तकनीक कितना बदल गया, जानिये...

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भारत के महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन के 'रमन इफेक्ट' से आज ही के दिन यानी कि 28 फरवरी 1928 को ही पर्दा हटा था. रमन इफेक्ट में यह बताया गया कि प्रकाश कभी भी सीधा नहीं चलता, कुछ किरणें अपने पथ से हटकट बिखर जाती हैं. इस खोज के लिए सीवी रमन को फिजिक्स का नोबेल प्राइज दिया गया और भारत रत्न से भी नवाजा गया.

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वो अक्सर कहते थे कि अगर महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में आईं तो वो उन ऊंचाइयों को छू सकती हैं, जिसे अब तक पुरुष नहीं छू सके हैं. कई दशक पहले कही गई उनकी बात आज साबित भी हो रही है. नासा और इसरो में आज कई महिला साइंटिस्ट हैं, जिनके काम को आज दुनिया सलाम कर रही है.

डॉ. रमन की उपलब्ध‍ियों को देखते हुए 28 फरवरी को नेशनल साइंस डे के रूप में मनाया जाता है. इस बार थीम है 'Science and technology for specially abled persons'. देखते हैं तकनीक और साइंस के क्षेत्र में विकलांगों के लिए क्या-क्या बदला...

1. शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए

- नवीनतम तकनीक से लैस वील चेयर
- स्कूटर और लाइट वेट वीलचेयर, खासतौर से जो लोग स्पोर्ट्स जैसे कि बासकेटबॉल, टेनिस और रेसिंग में हिस्सा लेना चाहते हैं, उनके लिए यह अद्भुत है.
- वॉकर, केन और नये तरह की वैसाखी, नकली हाथ, नकली पैर आदि

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2. क्लासरूम में पढ़ाई के लिए ऑटोमेटिक पेज पलटने, किताब को होल्ड करने, पेंसिल ग्र‍िप करने वाले डिवाइस आदि.

3. विकलांगों के लिए कई ऐसे डिवाइस भी आ गए हैं, जो व्यक्त‍ि का दिमाग पढ़कर काम करते हैं. मोबाइल में भी अब विकलांगों के लिए स्पेशल फीचर होते हैं. जो सुन नहीं सकते, उनके लिए कई तरह के डिवाइस विकसित किए गए हैं.

4.विकलांग फिल्में और टीवी के प्रोग्राम देख सकें इसके लिए क्लोज्ड कैप्शनिंग लाई गई है.

5.खाना बनाने, कपड़े पहनने और ग्रूमिंग से संबंधित भी कई तकनीक विकसित किए गए हैं.

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