पलंग में मशरूम की खेती कर फेमस हुईं वीणा देवी, PM मोदी ने दिया ये मौका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर संभाला है बिहार की वीणा देवी ने, जो महिलाओं को खेती की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर होना सिखा रही हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में.

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वाणी देवी (फोटो- ट्विटर) वाणी देवी (फोटो- ट्विटर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 6:15 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 7 महिलाओं को अपना ट्विटर हैंडल सौंपा. सबसे पहले ट्विटर चेन्नई की स्नेहा मोहनदास ने संभाला था, वहीं अब आखिरी में बिहार के मुंगेर की वीणा देवी ने संभाला है, जो मशरूम की खेती कर प्रसिद्ध हुई हैं.

उन्होंने ट्वीट कर बताया कैसे महिलाएं खेती कर आत्मनिर्भर हो रही हैं. वीणा देवी ने लिखा- आज मुंगेर की महिलाएं पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश कर रही हैं. घर में खेती से लेकर उपज को हाट में बेचने तक सारा जिम्मा खुद अपने कंधों पर उठाती हैं. इसलिए मैं देश की सभी महिलाओं से यही कहूंगी - बाहर निकलिए, खुद काम कीजिए और तब देखिए कितना अच्छा लगता है.

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उन्होंने कहा, आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. अगर देश की नारी शक्ति ठान ले तो घर के अपने कमरे से ही अपनी यात्रा शुरू कर सकती है. इसी खेती की वजह से मुझे सम्मान मिला. मैं सरपंच बनी. मेरे लिए खुशी की बात है कि अपने जैसी कई महिलाओं को ट्रेनिंग देने का अवसर भी मिल रहा है.

उन्होंने कहा- जहां चाह वहां राह होती है. इच्छाशक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है. बता दें, वीणा देवी साल 2013 से मशरूम की खेती कर रही हैं. वह महिलाओं को इस खेती के बारे में बताती हैं. जिससे महिलाएं घर पर ही खेती कर अपनी जीविका चलाती हैं. वीणा देवी ने बताया कैसे साल 2013 में मशरूम की खेती की शुरुआत की थी.

उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें बताया, कैसे उन्होंने शुरुआत में खुद के पैसों से 1 किलो मशरूम के एक बीज खरीदे थे, जिसके बाद जिस पलंग पर वह सोती थीं, उसी पलंग के अंदर मशरूम की खेती करनी शुरू की. बता दें, जगह की कमी के कारण उन्हें पलंग में ही मशरूम की खेती करनी पड़ी.

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जब वैज्ञानिकों ने वाणी देवी से पूछा कि आप मशरूम की खेती कहां पर कर रही हैं, तब उन्होंने बताया मैं एक छोटे से कमरे में खेती करती हूं. जिसके बाद वह प्रसिद्ध हो गई. वो लोग मेरी फोटो खींच कर ले गए.

उन्होंने कहा - मैं कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि मैं विश्वविद्यालय स्कॉर्पियो में बैठकर जाऊंगी. उस समय मुख्यमंत्री ने हमें पुरस्कार दिया. उस दिन मेरे लिए काफी खुशी का दिन था. मुझे बहुत अच्छा लगा था. मुझे सरपंच बना दिया गया. अब तक मैं 20 गांव में जाकर वहां की महिलाओं को ट्रेनिंग दे चुकी हूं कि कैसे मशरूम की खेती की जाती है.

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