दिल्ली के कॉलेजों में स्थानीय छात्रों को आरक्षण, NCR के छात्र नाराज

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से कहा है कि वे राजधानी दिल्ली के छात्रों को 80 प्रतिशत आरक्षण देने की संभावना तलाश करें.

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अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2017,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी के छात्रों को दिल्ली सरकार के सभी यूनिवर्सिटीज और गवर्नमेंट कॉलेजो में 80% आरक्षण देने का मन बना लिया है और इसके लिए दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को इसके आदेश भी दे दिए है. इस पहल से जहां दिल्ली के छात्रों में खुशी है वही देश के अन्य राज्यो के छात्र इससे मायूस दिख रहे है.

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खास तौर से दिल्ली के आसपास के इलाके जैसे नोएडा ,गाजियाबाद और गुड़गांव के छात्र बेहद नाराज है और ऐसा होने पर अपने भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर रहे है.

दिल्ली के मुखिया केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली के छात्र लगातार उनसे इस बात को लेकर दुख जाहिर करते रहे है कि अच्छे अंको के बावजूद उनको खुद के शहर के कॉलेजो में ही ऊंची कटऑफ के चलते दाखिला नही मिल पा रहा हैं , उनके साथ देश के अन्य राज्यो के छात्र भी एडमिशन की दौड़ में हिस्सा बनते है.

जिससे उनकी सीटे छिन जाती है और उन्हें दूसरे छोटे कॉलेजो में एडमिशन लेना पड़ता है. अरविंद केजरीवाल की इस पहल से दिल्ली के छात्रों को एडमिशन का अवसर मिलेगा लेकिन वही राजधानी के कॉलेजो पर समान अधिकार का हवाला देते हुए दूसरे शहरों के छात्र इस फैसलें को गलत ठहरा रहे है.

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गाजियाबाद के छात्र मायूस

दिल्ली से सटे गाजियाबाद के छात्र इस फैसले से बेहद मायूस है. यहां की रहने वाली दीप्ति ने इसी साल कॉमर्स स्ट्रीम से 12वी की परीक्षा 95% अंको से पास की है और उसका सपना दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज में एडमिशन लेने का था क्यों कि गाजियाबाद में अच्छे कॉलेज नही है.

दीप्ति का कहना है -" अगर ऐसा होता है तो मेरा सपना टूट जाएगा. मेरे पास यहां कोई दूसरा विकल्प भी मौजूद नही है और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर मुझे बेहतर भविष्य की उम्मीद थी जो ऐसा होने पर पूरी नही होगी.

नोएडा

नोएडा दिल्ली से बेहद करीब है. यहां बड़े प्राइवेट कॉलेज तो है पर उनकी उची फीस से ज्यादातर बच्चें दाखिला नही ले पाते है. नोएडा से मेट्रो के जरिए आसानी से दिल्ली भी पहुंचा जा सकता है और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजो की फीस भी प्राइवेट कॉलेजों से कम है जिससे बेहतर भविष्य का सपना लेकर हज़ारो छात्र दिल्ली आते है.

नोएडा की रहने वाली साक्षी का कहना है - "दिल्ली सरकार इस तरह का फैसला नही ले सकती. दिल्ली देश की राजधानी है और उस पर सभी का समान अधिकार है, मेरे भी 98% अंक है , बाहर पढ़ाने के लिए मेरे माता पिता के पास पैसे नही है. अब कहा जाएं".

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गुड़गांव के छात्र नाराज़

वहीं गुड़गांव के छात्र भी आप सरकार के इस फैसलें से बेहद नाराज है. 12वी पास छात्रों के साथ 12वी में पढ़ने वाले छात्र भी इस पहल पर सवाल उठा रहे है. अगले साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अभी से तैयारी कर रही नेहा बेहद गुस्से में है. उसका कहना है " वो हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकते है.

हम अच्छे मार्क्स के लिए दिन रात मेहनत करते है और DU के कॉलेजों में एडमिशन मेरिट बेस्ड होते है. दिल्ली के छात्र भी मेहनत करे और एडमिशन लें. अगर सभी राज्यो के कॉलेजों में आरक्षण हो जायेगा तो देश का कोई भी छात्र कही और एडमिशन नही ले पायेगा".

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