मेरी जरूरतें कम हैं, इसलिए मेरे जमीर में दम है... फिल्म सिंघम का ये डॉयलाग सौरभ की जिंदगी का फलसफा है. बेटर इंडिया से बातचीत में वो कहते हैं कि ये ही डायलॉग उन्हें यूपीएससी की तैयारी के दौरान ताकत देता रहा. IAS बनने के लिए दिन रात पढ़ना जरूरी नहीं.
झारखंड के दुमका जिले के रहने वाले सौरभ ने साल 2018 में 113वीं रैंक हासिल की है. महज 32 साल की उम्र में उन्होंने ये सफलता प्राप्त की है. उन्होंने इसी साल अप्रैल में हुए इंटरव्यू में सबसे ज्यादा 201 नंबर हासिल किए. इससे पहले उन्होंने 2017 में पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया था जिसके मेन्स में वह फेल हो गए थे.
सौरभ के निजी जीवन की बात करें तो वो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में कर्मचारी थे, साथ ही एक बच्चे के पिता भी. वो कहते हैं कि मेरा बचपन बिना इंटरनेट के बीता, लेकिन उसके अलावा मुझे हर सुविधा दी गई. मेरा बचपन पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल में बीता.
सौरभ ने बारहवीं करने के बाद कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद सीए और सीएस की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के Faculty of Management Studies से किया. उनके परिवार में पत्नी और बेटे के अलावा उनके माता-पिता भी साथ रहते हैं. उन्होंने आरबीआई ज्वाइन करने से पहले बैंकिंग की तैयारी की थी. वो कहते हैं कि उसी दौरान यूपीएससी के do’s and don’ts पढ़ते वक्त उनके मन में आया कि वो भी यूपीएससी की तैयारी कर सकते हैं.
इसलिए चुना यूपीएससी
वो कहते हैं कि मुझे अपनी नौकरी बेहद पसंद है, बैंकिंग का काम दिलचस्प है. इसके बावजूद मैं हमेशा चाहता था कि मैं कुछ ऐसा करूं कि समाज के काम आ सकूं. इसी चाहत ने मुझे तैयारी के लिए प्रेरित किया. मुझे याद है कि जब मेरे पिता के पास एक प्रिंटिंग प्रेस थी वहां सरकारी अधिकारी अक्सर आते थे. मैं देखता था कि मेरे पिता भी हमेशा उनके लिए बहुत सम्मान रखते थे.
इससे भी ज्यादा मुझे दुमका के एक डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने प्रभावित किया. वो समस्याओं को समझने के लिए लोगों से बातचीत करते थे, फिर पूरे मन से उन्हें सुलझाने में लग जाते थे. इससे उन्होंने लोगों और सरकार के बीच संचार की खाई को पाटने की बहुत कोशिश की. कहीं न कहीं मैं उनके जैसा बनना चाहता था.
सौरभ बताते हैं कि मैंने अपनी पत्नी पारुल से एक बार यूपीएससी का जिक्र किया था, लेकिन फिर अपनी आरबीआई की नौकरी में व्यस्त हो गया. फिर एक दिन पारुल ने पूछा कि आपके IAS के सपने का क्या हुआ. मुझे याद आया साथ ही ख्याल आया कि आरबीआई में जब ज्वाइन किया था तब 29 साल का था, अभी अगर इस उम्र में ये फैसला नहीं लिया तो कभी नहीं ले पाऊंगा. तभी, मैंने एक जोखिम लेने का फैसला किया और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. मेरी पत्नी और पेरेंट्स मुझे मोटिवेट करने लगे.
जिंदगी ने लिया नया मोड़, बना पिता
वो बताते हैं कि अभी तैयारी शुरू किए दो ही महीने हुए थे कि उन्हें ये खुशखबरी मिली कि वो और पारुल पेरेंट्स बनने वाले हैं. अब पारुल और पेरेंट्स के साथ उनकी भी जिम्मेदारी बढ़ गई थी, लेकिन वो सभी जिम्मेदारियां निभाते हुए तैयारी में जुटे रहे.
ऐसे की तैयारी
सौरभ को लगभग चार से पांच महीने अध्ययन के पैटर्न, तैयारी की रणनीति समझने में ही लग गए. अब उनके पास क्लास लेने का समय नहीं था, वो पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर निर्भर थे. जहां ज्यादातर सिविल सर्विसेज एस्पिरेंट्स नौ घंटे तैयारी करते हैं. वहीं सौरभ नौकरी से आकर रोज केवल चार से पांच घंटे ही पढ़ पाते थे. उन्होंने बताया कि मेरे लिए रूटीन सेट करना सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था. वो बताते हैं कि कॉमर्स में पकड़ होने के बावजूद मैंने मैनेजमेंट को अपने वैकल्पिक सब्जेक्ट के तौर पर चुना. ये मेरी पहली गलती थी.
लोगों की सेवा करने की तरह, यूपीएससी की तैयारी एक ब्लैंकेट अप्रोच पर नहीं हो सकती है. यहां हर समस्या को विषयवार सुलझाना होगा. इसके लिए आप एक बैकअप विकल्प हमेशा रखें ताकि भले ही आप इसे क्लियर न कर पाएं लेकिन इसे दुनिया का अंत न मानें. अपने वैकल्पिक विषय को चुनने में सावधानी बरतें और लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करें और निरंतरता बनाए रखें. हमेशा ये सोचें कि बस आप आधे रास्ते में हैं.
सौरभ की यात्रा से यह साबित होता है कि देश में सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को क्लियर करने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं है. इसके लिए अनुभव और सही मानसिक रवैया आपकी सबसे अच्छी संपत्ति साबित हो सकता है. वो कहते हैं कि तैयारी के दौरान जीवन के सारे अनुभवों ने स्टेप बाइ स्टेप मुझे सिखाया. अगर दूसरी बार में मैंने यूपीएससी क्लियर नहीं किया होता तो अब मेरी उम्र की सीमा भी निकल जाती.