क्या स्कूलों में भी लागू होगा... यहां पढ़िए UGC से जुड़े हर सवालों के जवाब

UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू किए, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकना है. इसके तहत Equity Committees, Equity Squads, 24x7 हेल्पलाइन और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू होगी. नियम के चार मुख्य सेक्शन विवादास्पद हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है.

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यह नियम सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होगा. ( Photo: ITG) यह नियम सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होगा. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST

देशभर में UGC के नए नियम 2026 को लेकर भारी विवाद मचा हुआ है. पहले सोशल मीडिया पर विरोध में #UGCRolleback ट्रेंड हुआ. फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और इसे भेदभाव बढ़ाने वाला बताया गया. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इसका विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया. आखिर यह नियम क्या है, इसे क्यों बनाया गया, और इसमें कौन-कौन से विवादित सेक्शन हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

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UGC का नया नियम क्या है और किसने जारी किया?
UGC (University Grants Commission) ने 13 जनवरी 2026 को नया नियम लागू किया. इसे नाम दिया गया है- “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026”. इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और असमानता रोकना, पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ होने वाली शिकायतों पर निगरानी रखना है. UGC का कहना है कि 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 100% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी. साथ ही, रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए यह नियम बनाया गया.

नियम कब लागू होगा?
UGC के नोटिफिकेशन के अनुसार, नियम तुरंत लागू कर दिया गया है, यानी 13 जनवरी 2026 से यह कानून मान्य है.

नियम किन संस्थाओं में लागू होगा?
यह नियम सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होगा. फिलहाल, इसका असर स्कूलों पर नहीं है, केवल उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा. कुछ प्राइवेट या विशेष संस्थान नियम के दायरे से बाहर हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश कॉलेज और यूनिवर्सिटी इसका पालन करेंगे.

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UGC के नए Equity Regulations 2026 नियम किन-किन कॉलेजों/संस्थानों में लागू नहीं होंगे 
सबसे पहले यह स्पष्ट है कि UGC का यह नया नियम सिर्फ “उच्च शिक्षा संस्थानों” (Higher Education Institutions) के लिए है, यानी यह स्कूलों पर लागू नहीं होगा. यानी 10वीं-12वीं तक की पढ़ाई वाले स्कूलों में यह नियम नहीं लागू होते. UGC ने 13 जनवरी 2026 से यह नियम सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू कर दिया है.

1. स्कूलों पर यह नियम लागू नहीं है
UGC का नियम केवल शैक्षणिक संस्थानों के उच्च स्तर (कॉलेज, यूनिवर्सिटी) तक सीमित है. इसका कोई असर स्कूलों पर नहीं है. अगर कोई स्कूल UGC से संबद्ध नहीं है, तो यह नियम वहां लागू नहीं होगा. इसका मतलब है कि प्राथमिक, माध्यमिक या हाई स्कूल में UGC के Equity Regulations का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

2. कुछ विशेष संस्थान या कार्यक्रम जिनमें लागू होने को लेकर स्पष्टीकरण नहीं
हाल के नोटिफिकेशन में यह नहीं बताया गया कि कुछ खास संस्थान या यूनिट (जैसे अनुसंधान केन्द्र, स्वायत्त पब्लिक इंस्टीट्यूट या अंतरराष्ट्रीय सहयोग केंद्र) को अलग से छूट मिलेगी या नहीं — लेकिन वे भी “उच्च शिक्षा संस्थान” के दायरे में आते हैं, इसलिए मूल रूप से नियम उन पर भी लागू माना जाता है. इसका मतलब, केंद्रीय यूनिवर्सिटी, राज्य यूनिवर्सिटी, मान्यता प्राप्त कॉलेज,ये सभी नियम के दायरे में आते हैं.

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3. “Higher Education Institutions” की परिभाषा
UGC के नियम के अनुसार, हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (HEIs) में शामिल हैं:
विश्वविद्यालय
कॉलेज
“डीड टू बी यूनिवर्सिटी”

अन्य ऐसे संस्थान जो UGC से मान्यता प्राप्त हैं

इन सभी संस्थानों को नियम के तहत
Equal Opportunity Centre
Equity Committee
Equity Squad
24×7 शिकायत हेल्पलाइन
जैसे प्रावधान लागू करने होंगे.

वेमुला केस से क्या कनेक्शन है?
रोहित वेमुला मामला पिछले सालों में शिक्षा जगत में चर्चा का विषय रहा. वेमुला दलित छात्र था और उसे यूनिवर्सिटी में भेदभाव का सामना करना पड़ा था. इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करने की टिप्पणियां दी थीं. UGC के नए नियम 2026 का उद्देश्य भी यही है कि ऐसे जातिगत भेदभाव और असमानता के मामले रोके जाएं.

नियम के 4 मुख्य विवादित सेक्शन
1. Equity Committees और Equity Squads का गठन
हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में Equity Committee और Equity Squad बनाए जाएंगे. छात्रों का कहना है कि इसमें सवर्ण छात्रों का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं. Equity Squad को बहुत अधिकार दिए गए हैं और ‘भेदभाव’ की परिभाषा स्पष्ट नहीं है.

2. 24x7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली
हर संस्थान में हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre होगा. छात्र किसी भी भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं. छात्रों का कहना है कि नियम में झूठी शिकायतों पर रोक नहीं है, जिससे कोई भी बिना सबूत आरोपित किया जा सकता है.

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3. अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों पर विशेष ध्यान
नियम का उद्देश्य है कि एससी, एसटी और पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोका जाए. लेकिन सामान्य वर्ग के छात्र और शिक्षक इसे एकतरफा मान रहे हैं.उनका कहना है कि यह नियम सवर्ण छात्रों को संभावित अपराधी मानकर भेदभाव बढ़ा सकता है.

4. सख्त कार्रवाई का अधिकार
यदि कोई संस्थान नियम का पालन नहीं करता, तो UGC उनकी मान्यता रद्द कर सकता है या फंड रोक सकता है. छात्र और शिक्षक मानते हैं कि नियम संस्थानों पर अत्यधिक दबाव डालता है और इसे बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के लागू करना मुश्किल है.

6.  छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
कई छात्र संगठन और शिक्षक संघ UGC के नए नियम का विरोध कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर #UGCRolleback ट्रेंड कर रहा है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर विरोध जताया. छात्रों का कहना है कि नियम एकतरफा है, झूठी शिकायतों का प्रावधान नहीं है, और सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकार खतरे में हैं.

7. UGC का पक्ष
UGC का कहना है कि नियम समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. बिना निगरानी के पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोकना मुश्किल है. नियम धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे. उद्देश्य सिर्फ समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. UGC का नया नियम शिक्षा प्रणाली में समानता और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास है.

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लेकिन इसके कुछ सेक्शन विवादास्पद हैं, खासकर सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए. टीचर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक सभी चिंतित हैं कि नियम सवर्ण छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों के खिलाफ तो नहीं जा रहा. अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका के बाद UGC नियम में बदलाव करता है या नहीं.  फिलहाल, यह मामला शिक्षा जगत में सबसे बड़ा और गर्म चर्चा का विषय बन गया है.

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