विश्वविद्यालयों के फाइनल ईयर एग्जाम को SC की हरी झंडी, कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में छूट संभव

कोरोना वायरस महासंकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विश्वविद्यालों में फाइनल ईयर की परीक्षाओं को हरी झंडी दे दी है. हालांकि, कोरोना से प्रभावित क्षेत्रों में कुछ रियायत दी जा सकती हैं.

Advertisement

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST
  • कोर्ट ने कहा राज्य सरकारें कोरोना संकट काल में अपने से एग्जाम नहीं कराने का फैसला नहीं कर सकतीं.
  • राज्य सरकारें UGC की अनुमति के बिना छात्र को प्रमोट नहीं कर सकतीं.
  • राज्यों को कोराेना काल में एग्जाम कराने में दिक्कत है वो UGC के पास exam टालने की एप्लीकेशन दे सकते हैं

कोरोना वायरस महासंकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विश्वविद्यालों में फाइनल ईयर की परीक्षाओं को हरी झंडी दे दी है. हालांकि, कोरोना से प्रभावित क्षेत्रों में कुछ रियायत दी जा सकती हैं. यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर परीक्षा कराने के यूजीसी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 18 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

जानिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खास बातें 

Advertisement

कोर्ट ने कहा कि फाइनल ईयर एग्जाम की परीक्षा होगी, 30 सितंबर तक परीक्षा कराने के UGC के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया. 

कोर्ट ने ये भी कहा कि राज्य सरकारें कोरोना संकट काल में अपने से एग्जाम नहीं कराने का फैसला नहीं कर सकतीं. 

राज्य सरकारें UGC की अनुमति के बिना छात्र को प्रमोट नहीं कर सकतीं. बता दें कि कई राज्य अपने फाइनल इयर छात्रों को प्रमोट करने की बात कह रहे थे, कोर्ट में इसका मामला भी आया था. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों को कोरोना संकट काल में एग्जाम कराने में दिक्कत है वो UGC  के पास exam टालने की एप्लीकेशन दे सकते हैं

बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक करा लेने के यूजीसी द्वारा 6 जुलाई को जारी निर्देशों को चुनौती देनी वाली याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई पूरी कर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. 

Advertisement

बता दें कि 30 सितंबर को यूजीसी ने परीक्षा की तारीख तय की थी. सुप्रीम कोर्ट में ग्रेजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षा के मामले में कोर्ट के फैसले के बाद छात्रों में न‍िराशा है. बता दें कि याचिकाकर्ताओं में COVID पॉजिटिव का एक छात्र भी शामिल था, उसका कहना था कि ऐसे कई अंतिम वर्ष के छात्र हैं, जो या तो खुद या उनके परिवार के सदस्य COVID पॉजिटिव हैं. ऐसे छात्रों को 30 सितंबर, 2020 तक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर करना, अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है.

क्या था मामला

देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के करीब 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर यूजीसी द्वारा 6 जुलाई को जारी की गई संशोधित गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की थी. इसमें यूजीसी ने अपनी संशोधित गाइडलाइंस में देश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा था कि वे फाइनल ईयर की परीक्षाएं 30 सितंबर से पहले करा लें. छात्रों ने अपनी याचिका में मांग की थी कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट उनके पूर्व के प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement