नीट पीजी 2025-26 के लिए योग्यता कटऑफ को घटाने को लेकर मुद्दा गर्म हो गया है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की ओर से 13 जनवरी, 2026 को की गई है. ये हाल ही में आए उस नोटिस के खिलाफ की गई है जिसमें क्वालिफाइंग कटऑफ को कम कर -40 कर दिया गया था.
डॉक्टरों और कार्यकर्ताओं ने -40 फीसदी नंबरों की अनुमति देने वाले नए NEET PG नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
दायर याचिका में ये लोग हुए शामिल
बता दें कि ये जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ.आकाश सोनी ने दायर की है. इसमें कहा गया है कि जारी हुए नोटिस के मुताबिक, कटऑफ को बेहद कम, यहां तक की शून्य और निगेटिव लेवल तक घटा दिया गया है.
प्वाइंट्स में समझे पूरा मामला
इन नियमों का उल्लंघन करता है ये फैसला
ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. इस जनहित याचिका में गंभीर संवैधानिक महत्व के मुद्दे उठाए गए हैं, जिसमें तर्क दिया गया है कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम योग्यता मानकों में की गई कमी मनमानी, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है और इससे मरीज की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की अखंडता को गंभीर खतरा है. याचिका में यह भी बताया गया है कि पीजी लेवल पर मेरिट में की ये ढील राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत वैधानिक जनादेश के विपरीत है.
न्याय की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से उचित निर्देश देने की मांग की है,जिसमें विवादित नोटिस को रद्द करना और चिकित्सा शिक्षा में न्यूनतम योग्यता मानकों की सुरक्षा करना शामिल है.
aajtak.in