India Today Education Conclave 2026: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा जगत की कई हस्तियां बदलते एजुकेशन ट्रेंड और भविष्य को लेकर बात कर रहे हैं. एजुकेशन कॉन्क्लेव में देश की टॉप यूनिवर्सिटी और स्कूल के प्रोफेसर, चेयरमैन, प्रिंसिपल जुड़ रहे हैं, जो AI से लेकर एजुकेशन सेक्टर में हो रहे बदलावों पर बात कर रहे हैं. आइए जानते हैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है...
India Today Education Conclave LIVE Updates 2026:
अगले सेशन में अमृता विश्व विद्यापीठम के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के डीन प्रोफेसर कमल बिजलानी ने बताया कि अब एआई किस तरह से काम कर रहा है. उन्होंने आगे बताया है कि भारत में स्टूडेंट की मदद AI एजेंट्स कैसे करता है. उन्होंने बताया कि AI जानकारी देकर मदद कर सकता है और जरूरत स्टूडेंट तक का स्कोलरशिप की जानकारी पहुंचा सकता है. उन्होंने बताया कि कई एलिजिबिल स्टूडेंट को ये पता ही नहीं होता है कि उनको स्कोलरशिप कैसे और कहां से मिलेगी.
वहीं 'लीडिंग विद परपज: स्ट्रैटेजीज फॉर स्कूल एक्सीलेंस' सेशन में दिल्ली विश्वविद्यालय की सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की प्रोफेसर नमिता रंगनाथन ने स्कूलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए क्या जरूरी है, इस पर विस्तार से बात की. इस सत्र की अध्यक्षता एजुकेशन टुडे की चीफ एजुकेशन ऑफिसर रेखा कृष्णन ने की.
प्रोफेसर नमिता रंगनाथन ने कहा कि स्कूलों को अब पुराने तरीकों से आगे बढ़कर नई सोच अपनानी होगी.स्कूल सिर्फ इमारत नहीं, एक 'यूनिवर्स' है..कॉन्क्लेव में उन्होंने जोर देकर कहा कि हर स्कूल एक छोटा समाज होता है, जहां बच्चे दुनिया को समझना शुरू करते हैं.स्कूल में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चा खुद को सुरक्षित भी महसूस करे और सीखने के लिए प्रेरित भी हो.
अगले सेशन Screens, Students and Sensibility: Rethinking Social Media in Education में Children First के को-फाउंडर और डायरेक्टर अमित सेन सोशल मीडिया का बच्चों पर पड़ रहे असर के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि आज के दौर में बच्चों को सोशल वर्ल्ड सुबह से शाम पूरे वक्त उन्हें फॉलो करता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में ऑस्ट्रेलिया की तरह बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाना भी काफी मुश्किल है. उन्होंने बताया कि पहले देखना होगा कि ऐसी पॉलिसी को कैसे लागू किया जा, कैसे इसकी निगरानी की जाए और इसके क्या नेगटेवि रिजल्ट हो सकते हैं.
उन्होंने बताया कि इसकी सफलता पूरी तरह से सावधानीपूर्वक और व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी. साथ ही, भारत जैसे देश में, जहां व्यापक विविधता है और राजनीतिक इरादों, पॉलिसी मेकिंग और जमीनी कार्रवाई के बीच अक्सर अंतर देखने को मिलता है, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या ऐसा ही दृष्टिकोण कारगर साबित हो पाएगा.
कॉन्क्लेव की शुरुआत पहले सेशन एन इकोसिस्टम फॉर एनेबल्ड एंड एम्पावर्ड एजुकेटर्स (An Ecosystem for Enabled and Empowered Educators) के साथ हुई. इस दौरान के आर मंगलम यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रोफेसर दिनेश सिंह ने एजुकेशन सेक्टर में बदलाव को लेकर कहा कि अब हमें करिकुलम बदलने की जरुरत है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब कोर्स में सुधार करना चाहिए, अभी बच्चों को काफी ज्यादा पढ़ाया जा रहा है और उन्हें हद से ज्यादा नहीं पढ़ाया जाना चाहिए. उन्हें एक के बाद एक कोर्स ऑफर किया जा रहा है. वे ऐसे कोर्स करते रहते हैं, जिनका कोई मतलब ही नहीं है. अब जो वक्त है, उसके हिसाब से कम पढ़ाना होगा और ये टीचर समझ नहीं रहा है.
साथ ही उन्होंने प्रोजेक्ट बेस्ड एजुकेशन पर फोकस किया और उन्होंने बताया कि नई एजुकेशन पॉलिसी के कुछ सिद्धांतों के आधार पर बड़ा बदलाव किया जा सकता है. अब ब्लैक बोर्ड बेस्ड एजुकेशन की जगह प्रोजेक्ट बेस्ड एजुकेशन को लाना चाहिए और टीचर को एक मेंटोर की तरह काम करना चाहिए. उन्होंने बताया कि जब प्रोजेक्ट बेस्ड पढ़ाई करते हैं तो नॉलेज खुद से आती है और नई एजुकेशन पॉलिसी को अच्छे से अपना लिया जाए तो देश नॉलेज इकोनॉमी बन जाएगा.
उन्होंने कोराना के वक्त स्टेनफोर्ट यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए काम का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि उस दौर में स्टेनफोर्ट यूनिवर्सिटी ने काफी इकोनॉमी जनरेट की थी, लेकिन भारत की यूनिवर्सिटीज ने कुछ नहीं किया. साथ ही उन्होंने वर्क टाइम को लेकर कहा कि जब आपका दिल लगेगा तो काम ही करेंगे. आप जबरदस्ती किसी को रोककर क्या ही करवा लेंगे. उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट बेस्ड एजुकेशन के जरिए कई तरह के स्किल बढ़ रहे हैं.
उन्होंने टीचर्स को लेकर कहा कि टीचर खतरे में है. उन्होंने टीचर्स के लिए कहा, 'मन के विचार को बदलना जरूरी है. आने वाले दिनों में टेक्नोलॉजी अहम होगी. न्यूक्लियर फ्यूजन, डेटा एंड आर्टिफिशियल इंटिलिजेंस, कॉन्टम कम्यूटिंग जैसी चीजों पर काम करना होगा. टीचर्स को इन सबमें ध्यान लगाना होगा, वरना भारत के लिए मुश्किल होगा.'
साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे टीचर की कमी है कि वो कहने में डरते हैं कि मुझे नहीं आता है. उन्होंने अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि कई बड़े एक्सपर्ट्स ने माना है कि उन्हें नहीं आता है. ऐसे ही टीचर मान ले कि उन्हें नहीं आता है और स्टूडेंट को बड़ा मान ले तो सबकुछ बदल जाएगा. ऐसा करना पड़ेगा, वरना एआई उसे खा जाएगा.
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