DUSU: तीन साल बाद होगा डीयू कैंपस में चुनाव! छात्रों को लुभाने में जुटे छात्र संगठन

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव सितंबर में होने की संभावना है. पिछले तीन वर्षों से महामारी और एकेडमिक कैलेंडर पर इसके प्रभाव के कारण छात्र निकाय के चुनाव रुके हुए थे. पिछला DUSU चुनाव 2019 में हुआ था. जानिए- कैसा रहा था लास्ट चुनाव, किसे मिली थी जीत

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साल 2019 में ABVP को मिली थी जीत (Getty) साल 2019 में ABVP को मिली थी जीत (Getty)

अनमोल नाथ

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

तीन साल बीत गए. पहले कोरोना का कहर फिर सीयूईटी और लेट एकेडमिक सेशन के कारण छात्र निकाय के चुनाव रुके हुए थे. इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव सितंबर में होने की संभावना है. अब डेट की घोषणा के साथ ही छात्रसंघ चुनाव की तैयारी कर रहे संगठनों में सरगर्मी तेज हो गई है. 

इससे पहले पिछला DUSU चुनाव 2019 में हुआ था.विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार वर्तमान में विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में व्यस्त है, इसके अंत तक हम चुनाव अभ्यास की तैयारी शुरू कर देंगे. अधिकारी ने आगे कहा कि चुनावों का भाग्य एड‍मिशन पर निर्भर करता है, जितनी जल्दी यह खत्म होगा, हम छात्र चुनावों की प्रक्रिया शुरू कर देंगे. 

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एबीवीपी को मिली थी ऐतिहासिक जीत 
पिछले साल 2019 में, भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में तीन सीटें जीतीं थीं. वहीं कांग्रेस के छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) को एक सीट मिली थी.  एबीवीपी के छात्र नेता अक्षित दहिया ने 29,000 से अधिक वोटों से डूसू अध्यक्ष पद जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. 

तैयारी में जुटे हैं छात्र संगठन, ये हैं चुनावी एजेंडे 
एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर की दो प्रमुख छात्र पार्टियां हैं. दोनों ही संगठन वोट के लिए छात्रों का ध्यान खीचने के लिए तैयारियां कर रखी हैं. इंडिया टुडे टीवी ने दोनों राजनीतिक संगठनों से बात की और जाना कि वे किन मुद्दों को लेकर छात्रों के पास जाएंगे. एनएसयूआई ने प्रवेश सत्र के दौरान छात्रों को सलाह देने के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की है, दूसरी ओर, एबीवीपी सीयूईटी के लिए मुफ्त क्रैश कोर्स प्रदान कर रही है. 

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दोनों राजनीतिक दलों का कहना है कि छात्र संघ चुनाव राजनीतिक नहीं, सामाजिक है और छात्र सक्रियता का हिस्सा हैं. दिल्ली एनएसयूआई के अध्यक्ष कुणाल सहरावत ने कहा कि एनएसयूआई विश्वविद्यालय में कम छात्रावासों का मुद्दा उठाने की योजना बना रही है और अगर हम सत्ता में आते हैं, तो हम परिसर के पास आवास के लिए किराया नियंत्रण अधिनियम की मांग करेंगे. युवा कांग्रेस ब्रिगेड परिवहन के मुद्दों को भी शीर्ष पर रखेगी, छात्रों के लिए मेट्रो में रियायत और छात्रों के लिए विशेष बसें अभियान में प्राथमिकताएं होंगी. 

दाखिले के तुरंत बाद एनएसयूआई सदस्यता अभियान और घोषणा पत्र पर काम शुरू कर देगी. सहरावत ने कहा कि डीयू एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है लेकिन भाजपा के पिछले नौ वर्षों के शासन में कोई नया कॉलेज और कोई नया छात्रावास नहीं बना है. 

एबीवीपी के सामने है बड़ी चुनौती 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध एबीवीपी की मुख्य चुनौती पद पर बने रहना है. एबीवीपी दिल्ली के अध्यक्ष अभिषेक टंडन के अनुसार, पार्टी चुनाव के लिए हमेशा तैयार है. हमारा कैडर छात्रों की सेवा के लिए 365 दिन और 24 घंटे सक्रिय है. फिलहाल हमारा ध्यान प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों की मदद करने पर है. 

क्या होते हैं डूसू चुनाव 
डूसू चुनाव हर साल चार केंद्रीय पैनल पदों के लिए होते हैं. ये पद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के लिए हैं. इसके अलावा डीयू के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कॉलेज और विभिन्न संकाय भी अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं. 

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