बजट से पहले जान लीजिए इन शब्दों का मतलब, आसानी से समझ पाएंगे पूरी स्पीच

Union Budget 2026: आम बजट 2026 1 फरवरी को पेश होना है. बजट स्पीच में कई ऐसे टेक्निकल शब्द होते हैं, जिनका मतलब आम तौर पर लोगों को पता नहीं होता है.

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बजट 1 फरवरी को पेश किया जाना है. (Photo:ITG) बजट 1 फरवरी को पेश किया जाना है. (Photo:ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

आम बजट 2026 1 फरवरी को पेश होना है. जब भी बजट पेश किया जाता है, उस वक्त बजट में कुछ ऐसे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका मतलब कई लोगों को नहीं पता होता है. ऐसे में बजट आने से पहले आपको इन शब्दों का मतलब बताते हैं ताकि आप बजट स्पीच  को आसानी से समझ सकें. 

Direct Tax: डायरेक्ट टैक्स वह Tax होता है, जो जनता सरकार को सीधे तौर पर देते हैं. ये टैक्स इनकम पर लगता है. इसके तहत इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स शामिल होते हैं. 

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Indirect Tax: इनडायरेक्ट टैक्स किसी प्रोडक्ट या सर्विस पर लगने वाला Tax होता है. इसमें उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, सेवा शुल्‍क, जीएएसटी आते हैं.

Financial Year: फाइनेंशियल ईयर यानी वित्त वर्ष, इसका मतलब उस वर्ष से होता है, जो वित्तीय मामलों में हिसाब के लिए आधार होता है. इसे सरकारों द्वारा अकाउंटिंग और बजट के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

GDP: ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद या GDP किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सर्विस की कुल वैल्यू होती है. 

Finance Bill: फाइनेंशियल बिल को वित्त विधेयक कहा जाता है और यह बजट में प्रस्तावित नए टैक्स, टैक्स स्लैब में चेंज से संबंधित होता है. 

Budget Estimate: बजट एस्टिमेट विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और योजनाओं को आवंटित धनराशि का अनुमान होता है, जिसमें बताया जाता है कि पैसे का इस्तेमाल कहां और किस तरह से होगा.

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Exemption: टैक्सपेयर्स की वह इनकम जो टैक्स के दायरे में नहीं आती. यानी जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता. 

Assessee: ऐसा व्यक्ति जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत टैक्स भरने के लिए उत्तरदायी होता है.

Capital Gains: पूंजीगत एसेट्स को बेचने या लेन-देने से होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन्स कहलाता है.

Capital Asset: जब कोई व्यक्ति बिजनेस या प्रोफेशनल किसी भी उद्देश्य से किसी चीज में निवेश करता है या खरीदारी करता है तो इस रकम से खरीदी गई प्रॉपर्टी कैपिटल एसेट कहलाती है. यह बॉन्ड, शेयर मार्केट और रॉ मैटेरियल में से कुछ भी हो सकता है.

Short Term Capital Assets: कम अवधि के पूंजीगत एसेट्स 36 महीने से कम समय के लिए रखे जाते हैं. वहीं शेयर, सिक्योरिटी और बॉन्ड आदि के मामले में यह अवधि 36 महीने की बजाय 12 महीने की है.

Fiscal deficit: सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को आर्थिक शब्दावली में ‘राजकोषीय घाटा’ कहा जाता है. इससे इस बात की जानकारी होती है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितने उधार की जरूरत होगी. कुल राजस्व का हिसाब-किताब लगाने में उधार को शामिल नहीं किया जाता है. यानी, सरकार के खर्च और आमदनी के अंतर को वित्तीय घाटा या बजटीय घाटा कहा जाता है.

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Finance Bill: इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के विचार से नए करों आदि का प्रस्ताव करते हैं. इसके साथ ही वित्त विधेयक में मौजूदा कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है. संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है.

Budget deficit: जब खर्चा सरकार के राजस्व से ज्यादा हो जाता है, तब पैदा होने वाली स्थि‍ति को ही बजट घाटा कहते हैं. 

Excise duty: एक्साइज ड्यूटी अथवा उत्पाद शुल्क वह शुल्क होता है, जो देश के भीतर बनने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह कस्टम ड्यूटी से अलग होता है. कस्टम ड्यूटी देश के बाहर से आने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह उत्पाद के प्रोडक्शन और खरीद पर लगता है.

Disinvestment: जब सरकार अपने संचालन की किसी कंपनी या संस्थान में अपनी हिस्सेदारी बेचती है, तो उसे विनिवेश कहा जाता है. इसका मतलब ये है कि सरकार अपने अधिकार वाली कंपनी में से हिस्सेदारी निजी कंपनियों या व्यक्त‍ि को बेच देती है.
 

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