जानें- उस सरकार के बारे में, जिसकी याद में मोदी ने लालकिले पर फहराया झंडा

आजाद हिंद सरकार एक ऐसी अस्थाई सरकार थी, जो आजादी के पहले ही गठित कर दी गई थी. जिसकी 75वीं वर्षगांठ पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परचम लालकिले पर तिरंगा फहराया है.

नरेंद्र मोदी (फोटो- BJP)
मोहित पारीक
  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

आजाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल में दूसरी बार लालकिले पर तिरंगा फहराया. मोदी ऐसा करने वाले संभवत: पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं. दरअसल भारत में अंग्रेजी हुकूमत के बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज ही के दिन यानी 21 अक्टूबर को आजाद हिंद सरकार की स्थापना कर आजादी का पहला सपना पूरा किया था.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर के कैथी सिनेमा हॉल में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की घोषणा की थी. वहां पर नेताजी स्वतंत्र भारत की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री, युद्ध और विदेशी मामलों के मंत्री और सेना के सर्वोच्च सेनापति चुने गए थे. वित्त विभाग एस.सी चटर्जी को, प्रचार विभाग एस.ए. अय्यर को तथा महिला संगठन लक्ष्मी स्वामीनाथन को सौंपा गया.

इसके साथ ही सुभाष चंद्र बोस ने जापान-जर्मनी की मदद से आजाद हिंद सरकार के नोट छपवाने का प्रबंधन किया और डाक टिकट भी तैयार करवाए. बता दें कि जुलाई, 1943 में बोस पनडुब्बी से जर्मनी से जापानी नियंत्रण वाले सिंगापुर पहुंचे. वहां उन्होंने 'दिल्ली चलो' का प्रसिद्ध नारा दिया. 4 जुलाई, 1943 ई. को बोस ने 'आजाद हिन्द फौज ' और 'इंडियन लीग' की कमान को संभाली. उसके बाद उन्होंने सिंगापुर में ही 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में अस्थायी भारत सरकार 'आजाद हिन्द सरकार' की स्थापना की.

बता दें कि जापान के अलावा 9 देशों की सरकारों ने आजाद हिंद सरकार को अपनी मान्यता दी थी, जिसमें जर्मनी, फिलीपींस, थाईलैंड, मंचूरिया, और क्रोएशिया आदि देश शामिल थी. 30 दिसंबर 1943 को ही अंडमान निकोबार में पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने तिरंगा फहराया था. ये तिरंगा आजाद हिंद सरकार का था.

ये भी कहा जाता है कि आजाद हिंद फौज के सदस्यों ने पहली बार देश में साल 1944 को 19 मार्च के दिन झंडा फहराया दिया. कर्नल शौकत मलिक ने कुछ मणिपुरी और आजाद हिंद के साथियों की मदद से माइरंग में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. जापानी साम्राज्य की सैनिक, आर्थिक और नैतिक सहायता से यह सरकार टिकी रही और जापान के सरेंडर करने के बाद भी आजाद हिंद ने हार नहीं मानी और युद्ध जारी रखा.

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