हाथ में बड़ी डिग्री, ऑफिस में 'मैनेजर' की कुर्सी, लेकिन घर लौटते ही वही पुराना चूल्हा-चौका! केंद्र सरकार की ताजा 'भारत में महिला और पुरुष 2025' रिपोर्ट ने भारतीय महिलाओं की इस दोहरी ज़िंदगी की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि देश की बेटियां पढ़ाई और कमाई में तो लड़कों को पछाड़ रही हैं, लेकिन जब बात घर के कामों की आती है, तो आज भी वे पुरुषों के मुकाबले तीन गुना से ज़्यादा वक्त खपा रही हैं.
केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) की ये रिपोर्ट बताती है कि भारतीय महिलाएं अब सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि बड़े पदों पर भी अपनी धाक जमा रही हैं. लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि घर के कामकाज का बोझ अब भी उन्हीं पर सबसे ज्यादा है.
पढ़ाई में लड़कों को छोड़ा पीछे
शिक्षा के क्षेत्र से आई खबरें बेहद सुखद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हायर एजुकेशन में महिलाओं का नामांकन पुरुषों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ा है. जहां पुरुषों का नामांकन अनुपात 28.9 है, वहीं महिलाएं 30.2 के आंकड़े के साथ उनसे आगे निकल गई हैं. अच्छी बात यह भी है कि स्कूली शिक्षा के हर स्तर पर अब लड़के और लड़कियों की संख्या बराबर हो गई है.
मैनेजर तो बनीं, पर घर के काम में नहीं मिली 'छुट्टी'
करियर के मामले में महिलाओं ने बड़ी छलांग लगाई है. प्रबंधकीय (मैनेजेरियल) पदों पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या में 102.54% का जबरदस्त उछाल आया है. लेकिन रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू 'टाइम मैनेजमेंट' से जुड़ा है.
आंकड़ों के मुताबिक, महिलाएं घर के कामों (अनपेड डोमेस्टिक वर्क) में रोजाना औसतन 289 मिनट खर्च करती हैं. इसके उलट, पुरुष घर के कामों में सिर्फ 88 मिनट ही हाथ बंटाते हैं. यानी ऑफिस में बॉस बनने के बाद भी घर की बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं के ही कंधों पर है. वहीं, इसी अवधि के दौरान पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 73.80 प्रतिशत रहा. इसके अलावा, श्रम बल भागीदारी (LFPR) में भी सुधार हुआ है, खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी 37.5% से बढ़कर 45.9% हो गई है.
लिंग अनुपात में भी हुआ सुधार
रिपोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं में देश का सुधरता लिंग अनुपात (Sex Ratio) भी शामिल है. जन्म के समय लिंग अनुपात 904 से बढ़कर अब 917 हो गया है, जो समाज की बदलती सोच का संकेत है.
शिक्षा और स्वास्थ्य में बेहतर हुए हालात
लिंग अनुपात: जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 में 904 था, जो अब सुधरकर 2021-23 में 917 हो गया है.
उच्च शिक्षा: उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन (Gross Enrolment Ratio) बढ़कर 30.2 हो गया है, जो पुरुषों (28.9) की तुलना में अधिक है.
स्कूली शिक्षा: प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक देश ने स्कूली शिक्षा के हर लेवल पर लैंगिक समानता हासिल कर ली है.
मंत्रालय का मानना है कि ये आंकड़े नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को भविष्य में अधिक समावेशी और जेंडर-सेंसिटिव योजनाएं बनाने में मदद करेंगे. यह पूरी रिपोर्ट मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट (mospi.gov.in) पर उपलब्ध है.
आजतक एजुकेशन डेस्क