चीन ने ताइवान के सामने एक बार फिर से अपनी दादागीरी दिखाई है. बीजिंग ने ताइवान को 'सर्वनाश' की चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ये देश अमेरिका से मिले मिसाइलों को मेनलैंड चाइना में इस्तेमाल करता है तो यह कदम उसके समूल विनाश को न्यौता देना होगा. चीन की ये धमकी तब आई है जब मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि ताइवान अमेरिका से मिले ATACMS टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस HIMARS लॉन्चर तैनात करने पर विचार कर रहा है.
रसिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस लॉन्चर का इस्तेमाल ताइवान चीन के खतरे को भांपते हुए कर सकता है.
इस मिसाइल की तैनाती ने चीनी सुरक्षा और राजनयिक हलकों में सिहरन पैदा कर दी है. ताइवान इन मिसाइलों को अपने उन द्वीपों के पास तैनात करना चाह रहा है तो चीन के नजदीक स्थित हैं.
मंगलवार को चीनी मिलिट्री के प्रवक्ता जियांग बिन ने फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट के आइडिया की आलोचना की और कहा कि चीन पर हमला करने के लिए ऐसे सिस्टम के इस्तेमाल की अटकलें “बहुत ज़्यादा बेतुकी और ओवरकॉन्फिडेंट” हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें ताइवान की औपचारिक आज़ादी की वकालत करने वाले लोग फैला रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे युद्ध भड़कने का खतरा है और अगर कोई लड़ाई होती है तो “उनका सर्वनाश तय है.”
ताइवान ने अपने सुरक्षा उपायों को चुस्त करते हुए 82 M142 HIMARS सिस्टम और 420 ATACMS मिसाइलों को अमेरिका से खरीदने का ऑर्डर दिया है. पिछले साल दिसंबर में ही 11.1 बिलियन डॉलर के बदले में अमेरिका ने ताइवान के साथ इस मेगा डील की घोषणा की थी.
इन बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज 300 km है. इसका मतलब है कि अगर पेंघू (Penghu) और डोंगयिन (Dongyin ) द्वीपों पर इनकी तैनाती की जाती है तो ये मिसाइलें चीन के तटीय इलाकों को निशाना बना सकेंगी. दिसंबर के आखिर में ताइवान के पास हुए एक नौसैनिक एक्सरसाइज की चीनी मीडिया कवरेज में आलोचना की गई थी. इस रिपोर्ट में HIMARS सिस्टम से होने वाले संभावित खतरे पर ज़ोर दिया गया था.
HIMARS लॉन्चर और ATACMS मिसाइलों के बारे में समझें
HIMARS यानी कि High Mobility Artillery Rocket System अमेरिकी सेना का एक हल्का, पहियों वाला मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर है. इसका पूरा नाम M142 HIMARS है. यह डिफेंस कंपनी Lockheed Martin द्वारा विकसित किया गया है और FMTV 5-टन ट्रक पर आधारित है.
इसका वजन लगभग 13-16 टन है, इसके क्रू में 3 सदस्य होते हैं और यह "shoot-and-scoot" रणनीति के लिए जाना जाता है .
HIMARS एक लॉन्च पॉड ले जाता है, जिसमें या तो 6 GMLRS रॉकेट्स या 1 ATACMS मिसाइल फिट होती है. ATACMS यानी कि Army Tactical Missile System, MGM-140 एक सॉलिड-प्रोपेलेंट बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी लंबाई 4 मीटर, व्यास 61 सेमी, वजन 1,300-1,700 किग्रा है.
अलग वैरिएंट्स में इसकी रेंज 165-300 किमी तक होती है. यह GPS/INS गाइडेड है, जिससे सटीकता बहुत उच्च है. यह सिस्टम यूक्रेन युद्ध में प्रभावी साबित हुआ, जहां HIMARS ने रूसी लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया. ATACMS दुश्मन के गहरे लक्ष्यों जैसे कमांड पोस्ट, एयरफील्ड्स पर प्रेसिजन स्ट्राइक करता है.
1949 से चला आ रहा है विवाद
ताइवान और चीन का विवाद 1949 से चला आ रहा है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चीन में गृहयुद्ध हुआ जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत हासिल की. हारने वाली राष्ट्रवादी सरकार (कुओमिन्तांग) ताइवान भाग गई और वहां चीनी गणतंत्र (ROC) की स्थापना की. चीन तभी से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और "वन चाइना पॉलिसी" के तहत इसे अलग देश नहीं मानता.
चीन कहता है कि जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी कर सकता है. जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र, लोकतांत्रिक देश मानता है, जहां अलग पहचान, सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था है. वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. चीन नियमित रूप से ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास, विमान उड़ानें और जहाज भेजता है.
भू राजनीतिक जरूरतों का ख्याल रखते हुए अमेरिका ताइवान को हथियार देता है और उसकी रक्षा का वादा करता है.
aajtak.in