कंक्रीट के जंगलों में रहते-रहते इंसान कितने पत्थर दिल हो चुके हैं. यह कहानी उसी की एक बानगी है. दिल्ली में तभी पूरे तीन दिनों तक डेढ़ महीने की एक मासूम बच्ची बंद कमरे में अपनी मां की लाश के पास पड़ी-पड़ी रोती रही और किसी को कानों-कान उसकी भनक तक नहीं लगी. बच्ची की मौसी ने तीन रोज बाद दरवाजे पर दस्तक दी, तो राज खुला गया.
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के सब्ज़ी मंडी इलाके के एक मकान में दीपा नामक महिला पिछले कुछ महीनों से अकेली रह रही थीं. उसके घरवालों की मानें तो दीपा की मुकुल नाम के एक शख्स से शादी हुई थी, लेकिन शादी के बाद से मुकुल और उसके घरवाले कभी दहेज के लिए तो कभी बेटी पैदा होने की वजह से दीपा को परेशान किया करते थे.
फिर हालत इतनी बिगड़ी कि दीपा और मुकुल का मामला वीमेन सेल तक जा पहुंचा, लेकिन वीमेन सेल ने अधिकारियों ने रिश्ते को एक ही झटके में खत्म करने की बजाए दोनों को कुछ दिनों तक अलग-अलग रहने की सलाह दी, ताकि मामले को सुलझाया जा सके. इसके बाद दीपा अपनी नवजात बच्ची को लेकर यहीं अकेली रहने लगी.
मासूम को छोड़ मां ने की खुदकुशी
नियम के मुताबिक मुकुल को बीवी की खर्चों के साथ-साथ बच्चे की परवरिश के लिए भी रुपए देने थे, लेकिन घरवालों की मानें तो मुकुल ने मुंह फेर लिया. इसी से हार कर दीपा ने ये कदम उठा लिया. चूंकि दीपा पहले ही खुदकुशी कर चुकी थी, उसका फोन नहीं उठ रहा था. इस पर दीपा के भाई ने अपनी बहन राखी को उसके पास भेजा.
अंदर का मंजर देख चौंक गई बहन
राखी जब अपनी बहन की खबर लेने उसके इस मकान में पहुंची, तो अंदर का मंजर देख कर चौंक गई. दीपा की लाश फंदे के सहारे पंखे से लटक रही थी और पास ही पालने पर लेटी उसकी मासूम बेटी लगातार रोए जा रही थी. लाश की हालत देख कर भी ये साफ हो गया कि ये सिलसिला पिछले तीन दिनों से चल रहा था.
...तो चली जाती बच्ची की जान
इसके बाद राखी ने लोगों की इस खबर दी और बच्ची को अस्पताल पहुंचा गया, जहां उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है. लेकिन मां की लाश के पास तीन दिनों तक रोती रही इस बदनसीब बच्ची पर अगर अब भी किसी की नजर नहीं पड़ती, तो शायद उसकी भी जान चली जाती. पुलिस ने दीपा के पति को हिरासत में ले लिया है.
मुकेश कुमार