कार चोरी का मास्टरमाइंड है सवा दो फीट का शख्स, दो साल में चुराई इतनी कारें

शातिर बौने की वजह से इस गैंग ने महज कुछ दिनों में ही 60 से अधिक कारें चुरा लीं. यह लोग कारें डिमांड आने पर चोरी करते थे. जिस मॉडल की डिमांड आई, उस मॉडल की कार की रेकी करते थे और फिर मौका देखकर उसकी चोरी को अंजाम देते थे.

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पुलिस की गिरफ्त में बौना और अन्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में बौना और अन्य आरोपी

हिमांशु मिश्रा

  • गाजियाबाद,
  • 24 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

  • गाजियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
  • बरामद हुईं चोरी की गईं नौ कारें
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पुलिस ने कार चोरों के एक ऐसे गैंग को पकड़ा है, जिसका मास्टर माइंड महज सवा दो फीट का एक था. पुलिस के मुताबिक इस शातिर बौने की वजह से इस गैंग ने महज कुछ दिनों में ही 60 से अधिक कारें चुरा लीं. यह लोग कारें डिमांड आने पर चोरी करते थे. जिस मॉडल की डिमांड आई, उस मॉडल की कार की रेकी करते थे और फिर मौका देखकर उसकी चोरी को अंजाम देते थे.

पुलिस ने इस शातिर बौने के गैंग के चार बदमाशों को मंगलवार की देर शाम गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए लोगों में सवा दो फीट का बौना भी शामिल है. ने इनके पास से चोरी की नौ कारें भी बरामद की हैं. चोरी की इन कारों को इन लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखा था. पुलिस की पूछताछ में आरोपी कार चोर बौना ने बताया कि वह एक-दो बार सीसीटीवी में कैद भी हुआ है, जब वो कार के आसपास रेकी कर रहा था. बौना ने बताया कि लोगों ने उसे बच्चा समझ कर उस पर शक तक नहीं किया. बौना होने का उसे फायदा मिला.

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पुराना है गैंग

पुलिस के मुताबिक कार चोरों का यह गैंग काफी पुराना है. पुलिस ने बताया कि सवा दो फीट के जमशेद उर्फ बौना जब दो साल पहले इस गैंग में शामिल हुआ, तब से गैंग ने कार चोरी की वारदातों को ताबड़तोड़ अंजाम दिया. इसी वजह से गैंग का नाम बौना पड़ गया. पकड़े गए बदमाशों का नाम रौनक अली, जात मोहम्मद, याकूब और जमशेद उर्फ बौना है. रौनक और बौना, दोनों रिश्ते में मामा- भांजे हैं और संभल के रहने वाले हैं.

सरगना की तलाश में पुलिस

इस गैंग सरगना सोनू है. पुलिस उसकी तलाश में जुटी है. सोनू ही वह शख्स था, जो चोरी की कारों को ठिकाने लगाने का काम करता था. कौन सी कार चोरी करनी है, उसे कहां छिपाना है और कहां डिलीवरी देनी है, यह सब सोनू ही तय करता था. कार चोरी को अंजाम देने का काम बौने का था. बौना आराम से किसी भी पार्किंग में घुस जाता था. वह दूर से नजर भी नहीं आता था. फिर वह का लॉक तोड़ उसे स्टार्ट करके वहां से आराम से निकल जाता था. बौने के पीछे उसका भांजा रौनक रहता था, जो स्टार्ट कार को लेकर वहां से भाग निकलता था.

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