नोटबंदी के नाम पर ठगी, पैसा लेकर रिटर्न देना बंद कर दिया

पैसा निवेश कराने वाली कंपनी ने 2014 में यह काम शुरू किया था. जब नवंबर 2016 में नोटबंदी का फैसला हुआ तो कंपनी के मालिक जनता से लिए पैसे पर रिटर्न देने से इनकार करने लगे. उन्होंने इसके पीछे नोटबंदी को वजह बताया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और कंपनी के मालिकों को गिरफ्तार किया गया.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

जावेद अख़्तर / पुनीत शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:20 AM IST

एक तरफ कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी दल नोटबंदी को फेल बता रहे हैं तो दूसरी तरफ एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें कुछ जालसाजों ने मोदी सरकार के इस फैसले का इस्तेमाल ठगी करने के लिए किया. हालांकि, ये बात अलग है कि उनके मंसूबों पर जल्दी ही पानी फिर गया और वे पुलिस की गिरफ्त में आ गए.  

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ऐसे ही दो जालसाजों को दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है. ये ठग प्लॉट के नाम पर ठगी का धंधा करते थे. इनके नाम हरीश अरोड़ा और विशाल टंडन हैं. हालांकि, इनका गुरु पहले ही इस मामले में गिरफ्तार हो चुका है, जो इनका रिश्तेदार भी है.

ये है पूरा मामला

दरअसल, मई 2018 में पुलिस ने शांति स्वरूप सतीजा नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था जो कनॉट प्लेस में संपत्ति डेवलपर्स के नाम से कंपनी चलाते थे. सतीजा ने राजस्थान में एक रेजिडेंशियल स्कीम चालू की थी, जिसमें लोगों से 2,3,4, प्रतिशत रेट पर इन्वेस्ट के आधार पर फंड इकट्ठा किया जाता था.

ये स्कीम 2014 में चलाई गई थी. लेकिन 8 नवंबर 2016 की रात जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया तो सतीजा ने इसके बहाने अपनी साजिश रच डाली. सतीजा ने नोटबंदी का बहाना बनाकर ग्राहकों को रिटर्न देना बंद कर दिया.

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मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इस मामले में एक्शन लिया और शांति स्वरूप को  चार्जशीट किया गया. अब क्राइम ब्रांच ने सतीजा के दो और सहयोगी हरीश व विशाल को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों आरोपियों को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. बता दें कि हरीश अरोड़ा आरोपी सतीजा का बहनोई है, जो ऑफिस का कामकाज देखता था, जबकि विशाल टंडन सतीजा का दामाद है.

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