पठानकोट में एयरफोर्स बेस पर हुए आतंकी हमले को लेकर एक अधिकारी ने बड़ा खुलासा किया है. 'आज तक' से खास बातचीत में सरकार से जुड़े एक बड़े अधिकारी ने बताया कि एयरबेस में हमला करने वाले आतंकियों को पाकिस्तान के चकलाला और लयालपुर एयरबेस में ट्रेनिंग दी गई थी.
अधिकारी के मुताबिक, सभी आतंकियों को के अंदरूनी हिस्से की भी पूरी जानकारी थी और उन्हें यह भी पता था कि वहां मौजूद एयरक्राफ्ट को कैसे तबाह करना है. हालांकि उनमें से किसी को भी विमान उड़ाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी. अधिकारी ने बताया कि खुफिया इनपुट में पठानकोट पर हमले जैसी कोई जानकारी नहीं थी. हालांकि कुछ इलाकों में सेना को अलर्ट किया गया था.
हमले से दो दिन पहले ही हटाए गए थे ये हथियार
बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आतंकियों को खासकर पठानकोट एयरबेस पर हमले के लिए ट्रेनिंग दी गई थी. उन्हें एयरबेस में एयरक्राफ्ट की स्थित, पेट्रोल और हथियार रखे जाने की जगहों के बारे में स्पष्ट जानकारी थी. हालांकि हमले से ठीक दो दिन पहले ही मिसाइल और कुछ एयरक्राफ्ट को वहां से हटाया गया था.
आतंकियों के मारे जाने के बाद एयरबेस में 29 धमाके
ऑपरेशन खत्म होने में ज्यादा समय लगने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ' थी. सुरक्षाबल आतंकियों को खाना, हथियार मनोवैज्ञानिक तरीके से तोड़ना चाहते थे.' उन्होंने कहा कि सेना कम से कम नुकसान चाहती थी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर आतंकी एयरबेस में रखे हथियारों तक पहुंच जाते तो फिर सेना किसी भी तरह से जान गंवाने या नुकसान की परवाह किए बिना तेजी से हमला करती. आतंकियों के मारे जाने के बाद भी सेना ने एयरबेस के अंदर 29 धमाके किए हैं.
अधिकारी ने बताया कि रिहायशी इलाका होने की वजह से ऑपरेशन में थोड़ा समय लग गया. ऑपरेशन में सेना ने कैस्पर अटैक हेलीकॉप्टर और बीएमपी का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन 2 जनवरी की सुबह करीब 3:35 बजे शुरू हुआ और सभी आतंकी 3 जनवरी को दोपहर 1:30 बजे तक मार गिराए गए थे. एनएसजी से सेना के सीनियर अधिकारी मेजर जनरल दुष्यंत सिंह ऑपरेशन की अगुवाई कर रहे थे.
कोऑर्डिनेशन की कमीं नहीं थी
सुरक्षाबलों और एजेंसियों के बीच की कमी होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'सभी जवान ट्रेंड थे लेकिन उन्हें से निपटने की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए थी. एयरफोर्स, आर्मी, एनएसजी और पंजाब पुलिस में पूरा सामंजस्य था, कहीं से कोई कमी नहीं छोड़ी गई.'
एयरबेस में आतंकियों ने अपनाई ये चाल
बातचीत के दौरान अधिकारी ने यह भी कहा कि करने वाले आतंकी 26/11 हमले के मुकाबले ज्यादा ट्रेंड थे. उनके पास हथियार ज्यादा थे लेकिन ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए. उन्होंने कहा कि छह में से दो आतंकी एयरबेस में आने के बाद आराम कर रहे थे ताकि सेना को यह लगे कि सिर्फ चार ही आतंकी वहां हैं. और जब चारों मारे गए तब उन्होंने हमला किया. दोनों आतंकी एयरबेस में रखे सामान को नुकसान पहुंचाना चाहते थे और 3 जनवरी की सुबह फायदा उठाने की कोशिश भी की लेकिन वे फंस गए और धमाके में खुद को उड़ा लिया.
शहीद सैनिकों को लेकर भी किया खुलासा
सरकार से जुड़े सीनियर अधिकारी ने खुफिया तंत्र के फेल होने की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि में सिर्फ एक गार्ड कमांडो गुरसेवक सिंह शहीद हुए. उनके अलावा DSC के पांच जवान निहत्थे थे, जब आतंकियों ने एयरबेस में घुसते ही मेस पर धावा बोला. वहीं, लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन विस्फोटक को डिफ्यूज करते वक्त हादसे का शिकार हुए शहीद हो गए. आतंकी हमले की सूचना मिलने के एक घंटे के अंदर ही एनएसजी की टीम को पठानकोट भेज दिया गया था.
गुरदासपुर के एसपी की बातों पर जताया संदेह
आतंकी हमले के दौरान एयरबेस में मौजूद सामान को लेकर एयर मार्शल निर्देश दे रहे थे. अधिकारी ने इंटरव्यू के दौरान गुरदासपुर के एसपी सलविंदर सिंह के बयान को संदिग्ध बताया. उन्होंने कहा कि एसपी के पुराने व्यवहार के कारण ही पंजाब की पुलिस ने मामले को लेकर उतनी सक्रियता नहीं दिखाई. एसपी पर छेड़छाड़ के भी आरोप लग चुके हैं.
उन्होंने कहा कि पठानकोट मामले पाकिस्तान को वैसी ही कार्रवाई करनी चाहिए जैसी उससे 16 अक्टूबर को पेशावर में हुए हमले पर की थी. आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए और साजिश रचने वालों की संपत्ति जब्त की जाए. उन्होंने कहा कि 15 जनवरी को प्रस्तावित विदेश सचिव स्तर की बातचीत पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर ही निर्भर है.
सियालकोट में था एक हैंडलर
पठानकोट हमले से जुड़ा एक हैंडलर सियालकोट में मौजूद था और वहां से निर्देश दे रहा था, जबकि बाकी हैंडलर शकरगढ़ और बहवालपुर में थे और आतंकियों के संपर्क में थे. सभी आतंकी पंजाब के शकरगढ़ बॉर्डर से भारत में घुसे.
ब्रजेश मिश्र / संजय बरागटा