चाय बेचने वाले मदन से ज्योतिषाचार्य तक, कुछ ऐसा रहा है दाती महाराज का सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि राजस्थान के पाली में जन्मे दाती महाराज का बचपन का नाम मदन है और वह कभी PM मोदी की ही तरह चाय बेचा करते थे.

दाती महाराज (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
अरविंद ओझा/आशुतोष कुमार मौर्य
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2018,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

दिल्ली के छतरपुर में मशहूर शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज इन दिनों अपने ऊपर लगे रेप के आरोप के चलते चर्चा में हैं. आम तौर पर लोग दाती महाराज को टेलीविजन चैनलों पर ग्रह-नक्षत्रों, राशिफल और भाग्यफल बताने वाले ज्योतिषाचार्य और धर्मगुरू के तौर पर जानते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि राजस्थान के पाली में जन्मे दाती महाराज का बचपन का नाम मदन है और वह कभी PM मोदी की ही तरह चाय बेचा करते थे.

ढोलक बजाकर पेट पालता था दाती महाराज का परिवार

दाती महाराज का जन्म 10 जुलाई को राजस्थान के पाली जिले के अलवस गांव में मेघवाल समुदाय में हुआ था. दाती महाराज का नाम उस समय मदन था. उनका परिवार ढोलक बजाकर अपना पेट पालता था और मदन के पिता देवाराम भी ढोलक बजाने का काम ही करते थे.

जन्म के 4 महीने बाद ही मदन की मां की मौत हो गई. बच्चों की जिम्मेदारी भी अब पिता पर ही थी. लेकिन कुछ साल बाद ही मदन के पिता देवाराम की भी मौत हो गई. इसके बाद मदन गांव के एक शख्स के साथ दिल्ली आ गया और चाय की दुकान में काम करने लगा.

चाय बेचना छोड़ शुरू किया कैटरिंग का धंधा

चाय की दुकान पर काम करने के अलावा मदन इधर-उधर के छोटे-मोटे काम भी किया करता था. छोटे मोटे काम करते हुए ही मदन ने कैटरिंग का धंधा शुरू किया. मदन का कैटरिंग का काम ठीकठाक चलने लगा. मदन ने 1996 तक दिल्ली में कैटरिंग का काम किया.

इसी बीच मदन राजस्थान के भविष्य बांचने वाले एक व्यक्ति के संपर्क में आया. मदन ने उसे अपना गुरु बना लिया और ज्योतिष का ज्ञान सीखने लगा. ज्योतिष विद्या सीखने के बाद मदन ने अपना नाम बदला और नया नाम रखा दाती महाराज.

कैलाश कॉलोनी में खोला पहला ज्योतिष सेंटर

मदन से दाती महाराज बनने के बाद दिल्ली के कैलाश कालोनी में उन्होंने अपना पहला ज्योतिष सेंटर खोल लिया. दाती महाराज के ज्योतिष ज्ञान से भले लोगों की किस्मत न बदली हो, लेकिन दाती की किस्मत जरूर बदलने लगी.

इसी ज्योतिष सेंटर पर वह दिल्ली के कई बड़े कारोबारियों और नेताओं के संपर्क में आ गया. दाती महाराज से जुड़े एक शख्स ने बताया की दाती महाराज ने एक नामी शख्स के जीवन को लेकर भविष्यवाणी की, जो सही हुई.

बस उस शख्स ने खुश होकर दाती महाराज को फतेहपुर बेरी में स्थित अपना पुश्तैनी मंदिर दान कर दी. फिर दाती महाराज ने अपने रसूख और दबंगई से मंदिर के आस-पास की जमीनें भी कब्जा लीं और शनिधाम मंदिर की स्थापना की.

दिल्ली से राजस्थान तक करोड़ों का साम्राज्य

राजस्थान में अपना गांव छोड़कर दिल्ली आए दाती महाराज की किस्मत शनिधाम मंदिर की स्थापना के साथ ही चमकने लगी. कई टीवी चैनलों पर दाती महाराज का ज्योतिष प्रोग्राम चलने लगा, जिसके बाद उसकी पहचान कई बड़े नेताओं और कारोबारियों से हुई.

7 एकड़ में फैला है आज शनिधाम मंदिर और आश्रम

दाती महाराज ने तीन दशक पहले जिस शनिधाम मंदिर की स्थापना की, वह आज साउथ दिल्ली के पॉश इलाके छतरपुर में पड़ता है. शनिधाम मंदिर से ही सटा दाती महाराज का एक फार्म हाउस भी है. फतेहपुर बेरी में स्थित दाती महाराज का यह आश्रम 7 एकड़ लंबी-चौड़ी जमीन पर फैला हुआ है.

दाती महाराज ने बाद में राजस्थान के अपने होमटाउन पाली में भी लावारिस बच्चों के लिए एक आश्रम बना डाला. दाती महाराज के इस चिल्ड्रन होम को कई जगहों से फंड मिलता है. साथ ही दाती महाराज ने एक स्कूल भी खोल रखा है, जिसमें तकरीबन 1000 बच्चे पढ़ते हैं. इस स्कूल के साथ में हॉस्टल भी है और एक बड़ी गोशाला भी.

ज्योतिषाचार्य से आयुर्वेदाचार्य बनने की ओर, खोला मेडिकल कॉलेज

ज्योतिषाचार्य के तौर पर ख्याति अर्जित कर चुके दाती महाराज अब आयुर्वेदाचार्य भी बनने में लगे हुए हैं. दाता महाराज ने आयुर्वेद में अपना साहित्य छापने और बेचने का कारोबार भी शुरू कर दिया है. फिलहाल दाती महाराज एक मेडिकल कॉलेज भी खोल रहा है, जिसका काम अभी जारी है.

दाती महाराज ने आश्रम चलाने के लिए एक कमेटी बनाई, जिसका बजट करोड़ों का है. दाती महाराज ने आजतक से खास बातचीत में इसी कमेटी से जुड़े लोगों पर आरोप लगाया है कि वो बाबा के खिलाफ साजिश रचकर पैसा हजम करना चाहते हैं.

यह कमेटी हर साल शनि आमवस्या वाले दिन एक प्रोग्राम आयोजित करती है, जिसमें करोड़ों का चंदा बाबा के अनुयायियों से बाबा को मिलता है. बाबा की गैरमौजूदगी में बाबा का काम उसका भाई अर्जुन देखता है. बाबा को 2010 में हरिद्वार में हुए कुंभ मेले में महामंडलेश्वर की उपाधि मिली थी.

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