बगदादी पर आखिरी प्रहार, इन चार बातों से डरा हुआ है गद्दार

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन के सरगना बगदादी के कई बार कमजोर होने की खबर आई. लेकिन इस बार वाकई उसकी हालत खराब है. ना सिर्फ चार-चार देशों में उसके आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूद हो रहे हैं, बल्कि कच्चे तेल और वसूली से होने वाली उसकी कमाई में भयंकर गिरावट आई है. इन सबसे बगदादी बाहर निकल पाता कि गठबंधन सेना ने चारों तरफ से हमला बोल उसकी कमर तोड़ दी है.

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आईएसआईएस का सरगना अबु बकर अल बगदादी आईएसआईएस का सरगना अबु बकर अल बगदादी

मुकेश कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन के सरगना बगदादी के कई बार कमजोर होने की खबर आई. लेकिन इस बार वाकई उसकी हालत खराब है. ना सिर्फ चार-चार देशों में उसके आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूद हो रहे हैं, बल्कि कच्चे तेल और वसूली से होने वाली उसकी कमाई में भयंकर गिरावट आई है. इन सबसे बगदादी बाहर निकल पाता कि गठबंधन सेना ने चारों तरफ से हमला बोल उसकी कमर तोड़ दी है.

अपने आतंक से जो कल तक दुनिया को रुलाया करते थे. जो बिना बात ही बेगुनाहों के सिर काट लिया करते थे. जो बगैर किसी जुर्म के लोगों को फेंक दिया करते थे. जो इंसानों को जिंदा जला दिया करते थे. जो लोगों को जीते जी डुबो कर मार डालते थे. आतंक के उस सबसे बड़े सौदागर बगदादी और उसके आतंकियों के बुरे दिन उनकी गर्दन पर चढ़ बैठे हैं. मोसुल में सबसे बड़ा हमला इसका सबूत है.

इन चार बातों से डरा हुआ है बगदादी
1- अबकी बार बचना मुमकिन नहीं: पिछले डेढ़ साल से बगदादी भागा-भागा फिर रहा है. ये हाल तब था, जब उसके आतंकियों की तूती बोलती थी. इराक से लीबिया और सीरिया से टर्की तक सरकारें उसके सामने सरेंडर की मुद्रा में थीं. लेकिन अब तो अपने आतंक की राजधानी में मारे जाने के हद तक घिर गया है. उसको एहसास हो रहा होगा कि उसके लिए खुद को बचाना अब आसान नहीं. उसके आतंक का साम्राज्य इराक में ही सिकुड़ता गया है.

2- हाथ से निकल गये कई इलाके: मोसुल में घुसने से पहले इराकी सेना ने रमादी, तिरकित और फजुल्लाह जैसे शहरों में आईएस का सफाया कर दिया. वही काराकोश, हमाम अल अलील, खाजेर, कुवायर और तल अफर जैसे शहरों में बगदादी के आतंकी आखिरी घड़ियां गिन रहे हैं. 17 अक्टूबर को पहले ही दिन सेना ने मोसुल के पास 200 किलोमीटर का एरिया मुक्त करा लिया. इसके बाद चार दिन के अंदर बर्टेला में 100 आतंकी मारे गए.

3- तेल कुओं और उगाही की कमाई 30 फीसदी गिरी: दरअसल बगदादी ने खाड़ी देशों की अराजकता का लाभ उठाते हुए तेल कुओं पर अपना कब्जा कर लिया था. लेकिन अब हालत इतनी खराब हो गई है कि वो अपने आतंकियों को तनख्वाह तक नहीं दे पा रहा है. इससे आतंकी तो भाग ही रहे थे. इस पर इराकी सेना का हमला इतना तेज हुआ कि बगदादी के आतंकी तो बुर्के में भी भागने लगे. ये दूसरी बात है कि उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

4- कौन बनेगा उसके आतंक का खलीफा:
ये बात तो बगदादी भी जानता है कि जैसे ही उसके हलक से जान निकलेगी, आईएसआईएस का आतंक भी बेमौत मारा जाएगा. खुद को इस्लामिक स्टेट का खलीफा बनाने का सपना देखने वाला बगदादी ये भी नहीं सोच पा रहा कि उसके बाद आतंक का खलीफा कौन बनेगा. जानकारों का मानना है कि अगर कोई खलीफा बन भी गया तो भी वो आईएस को बर्बाद होने से बचा नहीं सकता है.

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